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    16 माओवादियों के सरेंडर से सारंडा-कोल्हान में टूटा नेटवर्क, अब 3 टॉप कमांडरों की तलाश में एजेंसियां

    By sudhir pandeyEdited By: Sanjeev Kumar
    Updated: Wed, 29 Jul 2026 06:00 AM (IST)

    रांची में 16 माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद सारंडा-कोल्हान में नक्सली नेटवर्क ध्वस्त हो गया है। सुरक्षा एजेंसियां अब मिसिर बेसरा, असीम मंडल और सालुका ...और पढ़ें

    मिसिर बेसरा, असीम मंडल और सालुका कायम।

    मिसिर बेसरा, असीम मंडल और सालुका कायम।

    HighLights

    1. सुरक्षा एजेंसियां अब तीन शीर्ष कमांडरों पर कर रही फोकस।

    2. मिसिर बेसरा, असीम मंडल, सालुका कायम के दस्ते हुए कमजोर।

    सुधीर पांडेय, चाईबासा। रांची में डीजीपी के समक्ष मंगलवार को 16 माओवादियों के एक साथ आत्मसमर्पण करने के बाद कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में नक्सलियों का नेटवर्क ध्वस्त हो गया है। 
     
    सरेंडर करने वालों में से 14 माओवादी सारंडा और कोल्हान के जंगलों में सक्रिय थे। इस बड़ी सफलता के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों का पूरा फोकस संगठन के बचे हुए तीन शीर्ष हार्डकोर कमांडरों मिसिर बेसरा, असीम मंडल और सालुका कायम पर केंद्रित हो गया है।
     

    तीन कमांडरों के इर्द-गिर्द सिमटा माओवादी संगठन

    खुफिया एजेंसियों का मानना है कि माओवादी संगठन फिलहाल अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है। यदि ये तीन शीर्ष कमांडर गिरफ्तार होते हैं या आत्मसमर्पण करते हैं, तो कोल्हान प्रमंडल से माओवादी नेटवर्क का पूरी तरह से सफाया हो जाएगा।

    •     असीम मंडल दस्ता: खुफिया सूत्रों के अनुसार असीम मंडल का दस्ता तेजी से सिमट चुका है। उसके साथ अब सचिन (उर्फ रामप्रसाद मार्डी), उसकी पत्नी, रवि सरदार और उसकी पत्नी समेत केवल 11 सदस्य ही बचे हैं। सुरक्षा बलों को सूचना मिली है कि इस दस्ते ने अब पश्चिम बंगाल में शरण ली है।
    •     मिसिर बेसरा दस्ता: मिसिर बेसरा का दस्ता भी लगातार कमजोर हुआ है। उसके साथ अब मेहनत मोछू (उर्फ विभीषण) और रोहित समेत मात्र चार सदस्य ही सक्रिय हैं। हाल ही में मिसिर के बेहद करीबी सहयोगी अजय महतो को गिरिडीह-बोकारो सीमा स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया, जिसे संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
    •     सालुका कायम दस्ता: सालुका कायम फिलहाल पोड़ाहाट क्षेत्र में एक अलग नेटवर्क के साथ सक्रिय है। उसके साथ राहत, रीता और पिंकी समेत चार लोग हैं। वह मुख्य रूप से लेवी (अवैध वसूली) और आर्थिक स्रोतों को बचाए रखने की जिम्मेदारी संभाल रहा है।


    अंतिम चरण में सुरक्षा बलों का अभियान

    सूत्रों का यह भी दावा है कि शीर्ष माओवादी अश्विन और चंदन लोहरा पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके हैं (हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है)।

    पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव, लगातार गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण ने सारंडा तथा कोल्हान के जंगलों में नक्सलियों की रीढ़ तोड़ दी है। 
     
    अधिकारियों का मानना है कि बचे हुए तीनों कमांडरों के निष्क्रिय होते ही क्षेत्र में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान का निर्णायक अंत हो जाएगा।

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