JAC Inter Result : 300 दिहाड़ी पर मेस में खाना बनाने वाली मां की बेटी बनी टॉपर, अब बनेगी इंजीनियर
आशा पिंगुवा ने आर्थिक तंगी के बावजूद 80.02% अंक प्राप्त कर नोवामुंडी कस्तूरबा गांधी विद्यालय में टॉप किया है। उनकी मां ने दिहाड़ी मजदूरी कर उन्हें पढ़ ...और पढ़ें

आशा पिंगुवा
HighLights
आशा पिंगुवा ने 80.02% अंक प्राप्त कर स्कूल टॉप किया।
आशा अब इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने का लक्ष्य रखती हैं।
संवाद सूत्र, नोवामुंडी। कहते हैं कि हौसले मजबूत हों तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं। इसे सच कर दिखाया है नोवामुंडी की आशा पिंगुवा ने।
आर्थिक तंगी और पारिवारिक संघर्षों के बीच पढ़ाई जारी रखते हुए आशा ने 80.02 प्रतिशत अंक प्राप्त कर नोवामुंडी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की स्कूल टॉपर बनने का गौरव हासिल किया है।
पिता का साया उठा, तो मां ने संभाली कमान
आशा की इस सफलता के पीछे उसकी मां राईबारी पिंगुवा का अथक संघर्ष और त्याग छिपा है। वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के दौरान आशा के पिता पांडु पिंगुवा का निधन हो गया था।
पति की मौत के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी राईबारी के कंधों पर आ गई। खुद केवल पांचवीं तक पढ़ी राईबारी ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी तीन बेटियों के भविष्य के लिए मजदूरी का कठिन रास्ता चुना।
300 की दिहाड़ी से संवारा भविष्य
बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए राईबारी ने पहले मध्यान्ह भोजन बनाने का कार्य किया। वर्तमान में वह आनंदिता स्टील्स लिमिटेड आयरन खदान के मेस में खाना पकाने का काम करती हैं।
प्रतिदिन मिलने वाली 300 रुपये की मजदूरी (लगभग 7,800 रुपये महीना) से ही वह घर का खर्च, ट्यूशन फीस और तीनों बेटियों की पढ़ाई का जिम्मा उठा रही हैं। आशा की छोटी बहनें आरती (कक्षा 9) और दीप्ति (कक्षा 5) भी कस्तूरबा विद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।
अब बनेगी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर
कला संकाय (Arts) में 401 अंक प्राप्त करने वाली आशा पिंगुवा का लक्ष्य अब तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ना है। वह आगे इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ट्रेड में नामांकन लेकर अपना करियर बनाना चाहती है।
बेटियां बोझ नहीं होतीं
उसकी सफलता उन परिवारों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो अभावों के कारण बेटियों की शिक्षा को बोझ समझने लगते हैं। बेटी की सफलता पर भावुक मां राईबारी पिंगुवा कहती हैं कि बेटियां कभी बोझ नहीं होतीं।
यदि उन्हें अवसर और शिक्षा मिले तो वे हर ऊंचाई को छू सकती हैं। एक मां चाहे अनपढ़ ही क्यों न हो, वह अपनी मेहनत के दम पर बच्चों को बेहतर भविष्य दे सकती है।
आशा की मेहनत, लगन और एक मां के अटूट विश्वास ने यह साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत हों, सपनों को पूरा किया जा सकता है।