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    चिरिया माइंस में मजदूरों की छंटनी पर मधु-गीता कोड़ा का Sail को अल्टीमेटम

    Updated: Tue, 19 May 2026 10:09 PM (IST)

    पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने चिरिया माइंस में ठेका मजदूरों की छंटनी और बकाया वेतन के मुद्दे पर सेल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा ...और पढ़ें

    गीता कोड़ा।

    गीता कोड़ा।

    HighLights

    1. 245 ठेका मजदूरों की छंटनी रोकने, बकाया भुगतान की मांग।

    2. स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार न मिलने पर आंदोलन की चेतावनी।

    संसू, चिरिया। मनोहरपुर लौह अयस्क खदान (चिरिया माइंस) में ठेका मजदूरों की छंटनी रोकने, उनके बकाया वेतन के भुगतान और स्थानीय बेरोजगारों की समस्याओं को लेकर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने सीधे तौर पर सेल (SAIL) प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 
     
    दोनों शीर्ष नेताओं ने चिरिया पहुंचकर प्रभावित ठेका मजदूरों से मुलाकात की। इसके बाद नेताओं ने चिरिया माइंस के जीएम रवि रंजन और एचआर हेड विकास दयाल के साथ उनके कार्यालय में एक उच्च स्तरीय बैठक की। 
     
    इस दौरान प्रबंधन से मांग की गई कि छंटनी किए गए 245 ठेका मजदूरों को काम पर वापस लिया जाए और उनकी सुकरी, दुबिल व सप्लाई से जुड़ी समस्याओं का निपटारा करते हुए बकाया राशि का अविलंब भुगतान हो। 
     

    सात महीने से साजिश के तहत बैठाया  

    सेल प्रबंधन की ओर से जल्द सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया गया है। चिरिया रेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने प्रबंधन और ठेका कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए। 
     
    उन्होंने कहा कि साजिश के तहत ठेका मजदूरों की छंटनी करने की नीयत से उन्हें पिछले सात महीनों से काम से बैठाकर रखा गया है। गीता कोड़ा ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि ठेका मजदूरों की काम पर जल्द वापसी नहीं कराई गई, तो सेल प्रबंधन के खिलाफ उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। 
     
    अंजाम के लिए प्रबंधन खुद जिम्मेदार होगा। पूर्व सांसद ने क्षेत्र में बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता जताते हुए कहा कि चिरिया माइंस एशिया की सबसे बड़ी लौह अयस्क खदान है, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं दिया जा रहा है।  
     

    प्रबंधन का बहाना  

    कंपनी की पुरानी आदत हमेशा रोने-धोने की रही है। प्रबंधन का तर्क है कि खदान में खनन का काम एक छोटी सी जगह में सिमटा है, इसलिए नई बहाली नहीं की जा रही।सीएसआर (CSR) के तहत आईटीआई (ITI) करने वाले स्थानीय युवकों को अब तक न तो सर्टिफिकेट मिला है और न ही उनके पैसों का भुगतान हुआ है। 
     
    यह स्थिति बेहद निराशाजनक है। यदि स्थानीय बेरोजगारों को उनका हक नहीं मिला, तो क्षेत्र के युवाओं में कभी भी भयंकर जनाक्रोश का विस्फोट हो सकता है। 
     
    उन्होंने साफ किया कि चिरिया माइंस से स्थानीय मजदूरों की छंटनी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बेरोजगारों के हक के लिए सेल से सीधी लड़ाई लड़ी जाएगी।