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    रणवीर सिंह के 'रामलीला' लुक में छिपी है गुजरात के इस खानाबदोश समुदाय की कहानी, ‘नजरबट्टु’ से है खास कनेक्शन

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 10:00 AM (IST)

    फिल्में समाज की संस्कृति और रीति-रिवाजों का प्रतिबिंब होती हैं, गुजरात-राजस्थान का यह समुदाय भी इन फिल्मों से अछूता नहीं रहा है। ...और पढ़ें

    रणवीर सिंह की गोलियों की रासलीला रामलीला का रबारी कढ़ाई से कनेक्शन (Image Source: Bhansali Productions)

    रणवीर सिंह की गोलियों की रासलीला रामलीला का रबारी कढ़ाई से कनेक्शन (Image Source: Bhansali Productions)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कुछ लोग अपने घरों को बुरी नजर से बचाने के लिए नींबू मिर्च टांगते हैं तो कुछ खुद को बुरी नजर से बचाने के लिए काला टीका और काला धागा बांधने पर विश्वास करते हैं। इन्हीं के बीच हमारे गुजरात और राजस्थान में एक समुदाय निवास करता है जिनके कढ़ाईदार कपड़े ही उनके लिए बुरी शक्तियों का रक्षा कवच है। हम बात कर रहे हैं रबारी समुदाय की, जिसका जिक्र एक चर्चित फिल्म तक में किया गया। 

    रबारी समुदाय की कढ़ाईदार कपड़े 

    गुजरात और राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में रबारी एक घुमक्कड़ समुदाय है, जिनके कढ़ाई का काम उनकी संस्कृति का तो हिस्सा है ही, साथ ही यह एक भाषा भी है। दरअसल, महिलाएं खुद को अभिव्यक्त करने के लिए रबारी कढ़ाई करती हैं। इस समुदाय में शीशे, मोती और मनकों से कपड़ों, मूर्तियों और सजावट का सामान बनाया जाता है। रबारी महिलाएं घरेलू सजावट के सामान, पोशाकें और बैग जैसी तरह-तरह की चीजें बनाती हैं, जिसे हमने जरूर अपने होम डेकोर में शामिल किया होगा। 

    शीशे की कढ़ाई बुरी नजर से बचाए 

    इस समुदाय में शीशे के काम यानी मिरर वर्क को अभाला भारत का नाम दिया गया है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इन शीशों का काम बुरी नजर से बचाना है। इस समुदाय में ऐसी मान्यता है कि जब भी कोई बुरी नजर से देखता है तो कढ़ाई में लगे शीशे उस नेगेटिव एनर्जी से टकराते हैं और उस नजर को वापिस भेज देते हैं। इसी वजह से रबारी महिलाएं अपने बच्चे के कपड़े और पालने में शीशे का काम करती है ताकि उसे बुरी नजर से बचाया जा सके। इसी के साथ पैटर्न वाले ब्लाउज वाले पहनना उन महिलाओं के लिए जरूरी है जो विधवा नहीं हैं। 

    दहेज के लिए खुद तैयार करती हैं सामान 

    खानाबदोश इस समुदाय में लड़कियां अपने दहेज का सामान भी खुद तैयार करती हैं, यह उनके रीति-रिवाजों का एक हिस्सा है। कढ़ी हुई घाघरा-चोली, शीशे और मनकों के काम वाले भारी दुपट्टे, कोठालों और तकियों के कवर से लेकर वॉल हैंगिंग तक, सारा सामान ये लड़कियां अपने हाथ से बनाती हैं और फिर उन्हें दहेज में ससुराल लेकर जाती हैं। 

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    शोक में पहने जाते हैं रंगीन कपड़े 

    रबारी समुदाय में युवा महिलाएं जिनके पति जीवित हैं, शोक के दौरान रंगीन कपड़े खासकर कढ़ाई वाले ब्लाउज पहनती हैं। उनके ब्लाउज के साइड में बनी एम्ब्रॉइडरी इस बात का संकेत करती है कि महिला शोक में है। जबकि बुजुर्ग महिलाएं अगर काले कपड़े पहनें तो यह उनके लिए शोक का प्रतीक माना जाता है। इसके पीछे एक किंवदंती है जिसके अनुसार, वे एक ऐसे राजा का सम्मान कर रही हैं जिसने सदियों पहले रबारी समुदाय की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवा दी थी। 

    बॉलीवुड फिल्म से कनेक्शन 

    साल 2013 में आई ‘गोलियों की रासलीला-रामलीला’ में रबारी समुदाय की संस्कृति और उनके पहनावे की झलक देखने को मिलती है। फिल्म में लीड रोल निभाने वाले रणवीर सिंह की घुटनों तक की चूड़ीदार धोती, घेरदार केड़िया कानों में कुंडल और चांदी के भारी कड़े सभी का कनेक्शन कच्छ के रबारी समुदाय से था। 


    Source: IGNCA