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कभी अंग्रेजी कपड़ों के बहिष्कार का हथियार था 'खादी', जानिए कैसे युवाओं के वॉर्डरोब में बनाई अपनी जगह

Published: Thu, 13 Aug 2026 08:30 PM (IST)

क्या आपने कभी सोचा है कि एक साधारण-सा कपड़ा कैसे पूरे देश की आजादी का प्रतीक बन सकता है? जी ...और पढ़ें

चरखे से निकला कपड़ा कैसे बना सस्टेनेबल फैशन का हिस्सा? दिलचस्प है खादी का सफर (Image Source: AI-Generated)

चरखे से निकला कपड़ा कैसे बना सस्टेनेबल फैशन का हिस्सा? दिलचस्प है खादी का सफर (Image Source: AI-Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। 15 अगस्त को इस साल हम अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस (Independence Day 2026) मनाने जा रहे हैं। ऐसे में, जब भी हम आजादी के इस जश्न और तिरंगे की बात करते हैं, तो एक नाम अपने आप हमारे जेहन में आ जाता है। जी हां, 'खादी'... जो सिर्फ हाथ से काता और बुना हुआ एक आम कपड़ा नहीं, बल्कि हमारे देश की आजादी की लड़ाई का एक बेहद अहम हिस्सा रहा है।

कभी अंग्रेजों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध का प्रतीक रहा खादी, आज आधुनिक दुनिया में सस्टेनेबल और ट्रेंडी फैशन का एक शानदार विकल्प बन गया है। आइए जानते हैं कि इस खास कपड़े ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज के फैशन रैंप तक का सफर कैसे तय किया।

Khadi youth fashion trends

(Image Source: AI-Generated)

महज एक कपड़ा नहीं, आत्मनिर्भरता का प्रतीक है खादी

19वीं सदी में ब्रिटिश नीतियों के कारण भारतीय कपड़ा उद्योग पूरी तरह तबाह होने लगा था। विदेशी कपड़ों से बाजार पटे पड़े थे, जिससे स्थानीय बुनकरों की रोजी-रोटी छिन रही थी। इसी दौर में, साल 1920 में महात्मा गांधी ने 'स्वदेशी आंदोलन' की शुरुआत की। उन्होंने खादी को केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि आजादी और आत्मनिर्भरता का हथियार बना दिया।

चरखा चलाना शांतिपूर्ण सत्याग्रह का प्रतीक बन गया। सूत कातने की इस प्रक्रिया ने जाति और वर्ग के सभी भेदभावों को मिटाकर समाज को एक कर दिया। यही कारण है कि आज भी हमारे राष्ट्रीय ध्वज को बनाने के लिए खादी के कपड़े का ही इस्तेमाल किया जाता है।

'खादी ग्रामोद्योग' ने संवारा लाखों कारीगरों का भविष्य

देश आजाद होने के बाद, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बहुत जरूरत थी। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कई कदम उठाए:

  • 1954 में भारत सरकार ने 'खादी और ग्रामोद्योग आयोग' की नींव रखी। इसका मुख्य उद्देश्य गांवों में रोजगार बढ़ाना, स्थानीय कारीगरों को बचाना और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना था।
  • सरकार लगातार युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट और ट्रेनिंग प्रोग्राम चला रही है। देशभर में खुले खादी विकास ग्रामोद्योग केंद्र, अक्टूबर से जनवरी के बीच ग्राहकों को विशेष छूट भी देते हैं ताकि इसकी बिक्री को बढ़ाया जा सके।

'खादी' को क्यों कहा जाता है सांस लेने वाला कपड़ा?

आज की जागरूक दुनिया में लोग पर्यावरण को लेकर सतर्क हैं, और खादी इस मामले में बिल्कुल खरी उतरती है।

  • हर मौसम के अनुकूल: सूती, ऊन और रेशम के धागों से तैयार होने वाली खादी की बुनाई इतनी खास होती है कि इसमें हवा आसानी से आर-पार हो जाती है। यह कपड़ा गर्मियों में शरीर को ठंडा और सर्दियों में गर्म रखता है।
  • इको-फ्रेंडली: इसे प्राकृतिक रेशों और पारंपरिक तरीकों से बनाया जाता है, इसलिए इसका कार्बन फुटप्रिंट बेहद कम होता है। यह स्किन-फ्रेंडली भी है और इसे सांस लेने वाला कपड़ा कहा जाता है।

Swadeshi movement history

(Image Source: AI-Generated)

डेनिम जींस के साथ छा रहे हैं खादी के कुर्ते

पुराने समय में खादी को थोड़ा खुरदरा और डल समझा जाता था, लेकिन अब फैशन डिजाइनर्स ने इसका पूरा रूप ही बदल दिया है।

  • कलर और डिजाइन: आज की खादी चमकीले रंगों और बेहतरीन टेक्सचर में उपलब्ध है।
  • कढ़ाई और सजावट: इसे रेशम और लिनन के साथ मिलाकर और भी आरामदायक बनाया जा रहा है। अब खादी पर फुलकारी, चिकनकारी, कांथा और कलमकारी जैसी पारंपरिक कलाओं के साथ-साथ शीशे, मोती और गोटा-पत्ती का खूबसूरत काम किया जाता है।
  • युवाओं की पसंद: आज के युवा खादी के कुर्तों को डेनिम जींस के साथ पहनना खूब पसंद कर रहे हैं। अब सिर्फ कुर्ते ही नहीं, बल्कि स्कार्फ, जैकेट, काफ्तान, साड़ियां और फ्यूजन वियर भी खादी में उपलब्ध हैं।

सस्टेनेबल कपड़ों की मांग से मिला नया मुकाम

दुनिया भर में लोग अब एथिकल और सस्टेनेबल फैशन की ओर मुड़ रहे हैं, जिससे खादी का भविष्य बेहद सुरक्षित और उज्ज्वल नजर आता है। इसके महत्व को देखते हुए हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने भी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे सेमिनार और सम्मेलनों में अतिथियों के सम्मान के लिए खादी के उत्पादों का ही इस्तेमाल करें।

कुल मिलाकर, खादी ने यह साबित कर दिया है कि वह केवल इतिहास के पन्नों में दर्ज आजादी का प्रतीक नहीं है, बल्कि आज के दौर का एक बेहद खूबसूरत, आरामदायक और सदाबहार फैशन स्टेटमेंट भी है।

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