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    2000 साल पुरानी कला या सिर्फ ‘विंटेज एक्सेसरी’, पेरिस फैशन वीक में क्यों नहीं मिला भारत को क्रेडिट?

    Updated: Sat, 14 Mar 2026 05:20 PM (GMT+05:30)

    पेरिस फैशन वीक में राल्फ लॉरेन के रैंप पर मॉडल मॉडल पांरपरिक झुमके पहनकर उतरीं, लेकिन ब्रांड ने भारत को क्रेडिट नहीं दिया। ...और पढ़ें

    पेरिस फैशन वीक में रैंप पर भारतीय झुमके पहनकर उतरीं मॉडल्स (Picture Courtesy: Instagram)

    पेरिस फैशन वीक में रैंप पर भारतीय झुमके पहनकर उतरीं मॉडल्स (Picture Courtesy: Instagram)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हाल ही में पेरिस फैशन वीक के दौरान राल्फ लॉरेन (Ralph Lauren) के रैंप पर जब मॉडल पारंपरिक भारतीय झुमके पहनकर उतरीं, तो इंटरनेट पर एक नई बहस छिड़ गई।

    इस विवाद का कारण है कि ब्रांड ने इन झुमकों को केवल एक विंटेज एक्सेसरी के रूप में पेश किया, लेकिन भारत से जुड़े इसके इतिहास और कारीगरी का कोई जिक्र नहीं किया गया।

    झुमके का 2000 साल पुराना सफर

    झुमके का इतिहास कोई नया नहीं है, बल्कि इसके प्रमाण लगभग 300 ईसा पूर्व के मिलते हैं। दक्षिण भारत और दक्कन की प्राचीन मंदिर मूर्तिकलाओं में इसकी आकृति देखी जा सकती है। चोल राजवंश के दौरान इसे खास पहचान मिली और आगे चलकर मुगल काल और राजदरबारों के प्रभाव से इसमें कई बदलाव आए। सदियों से यह भारतीय दुल्हनों और श्रृंगार का एक खास हिस्सा रहा है।

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    (Picture Courtesy: Instagram)

    इसकी बनावट इसे दुनिया की दूसरी ईयरिंग्स से अलग बनाती है। एक झुमके की पहचान उसके घंटीनुमा गुंबद, 3D- डायमेंशन और पहनने पर उसकी सुंदर लहरदार गति से होती है। आमतौर पर यह एक कान के स्टड से शुरू होता है जो नीचे की ओर गुंबद में बदल जाता है, जिसे मोतियों या रत्नों से सजाया जाता है।

    जब भारतीय डिजाइन बने ग्लोबल ट्रेंड

    यह पहली बार नहीं है जब किसी इंटरनेशनल ब्रांड्स ने भारत को बिना श्रेय दिए यहां की चीजों को ग्लोबल मंच पर पेश किया है।

    • प्राडा (Prada)- कोल्हापुरी चप्पलों को "लेदर फ्लैट सैंडल" कहा
    • गुच्ची (Gucci)- भारतीय दस्तार को "इंडी फुल टर्बन" नाम से पेश किया
    • लुई विटों (Louis Vuitton)- बिना श्रेय दिए 'ऑटो रिक्शा बैग' लॉन्च किया
    • पश्चिमी देशों ने हमारे दुपट्टे को स्कैंडिनेवियन स्कार्फ और हल्दी वाले दूध को गोल्डन लाट्टे का नाम तक दे दिया।
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    (Picture Courtesy: Instagram)

    क्यों इन्हें पेटेंट नहीं करवाया गया?

    दरअल, झुमका एक हेरिटेज क्राफ्ट है और कॉपीराइट केवल नए डिजाइन को पेटेंट देता है, सदियों पुराने डिजाइनों की नहीं। इसी तरह, ट्रेडमार्क ब्रांड की रक्षा करते हैं, सांस्कृतिक प्रतीकों की नहीं। हेरिटेज डिजाइनों का सांस्कृतिक महत्व तो बहुत है, लेकिन कानूनी सुरक्षा बहुत कमजोर है, जिससे उन्हें पेटेंट कराना मुश्किल होता है।

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    (Picture Courtesy: Instagram)

    क्या है इस समस्या का समाधान?

    इस समस्या का समाधान म्यूजियम एट्रिब्यूशन जैसी पद्धति में छिपा है। जैसे म्यूजियम किसी कलाकृति के कलाकार, संस्कृति और उसके मूल स्थान का साफ उल्लेख करते हैं, वैसे ही फैशन ब्रांड्स को भी करना चाहिए।

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