बनारसी से लेकर कांजीपुरम तक: कपड़ों पर क्यों बनते हैं अंगूर-सेब जैसे फल? पढ़ें इनका असली मतलब
भारतीय कपड़ों पर बने फलों के मोटिफ्स सिर्फ कला नहीं, बल्कि सुख, समृद्धि और पवित्रता जैसे गहरे संदेश देते हैं। आइए जानते हैं इन फलों के पीछे छिपा असली ...और पढ़ें

भारतीय कपड़ों पर फलों के डिज़ाइन का गहरा अर्थ और महत्व जानें (Picture Credit- AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सदियों से अपनी अनूठी संस्कृति के लिए मशहूर भारत में कपड़ों पर होने वाल कारीगरी सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि खूबसूरती की परिभाषा है। देश-विदेश में पसंद किए जाने वाले हमारे पारंपरिक परिधानों पर बनाई गई हर डिजाइन का अपना एक गहरा मतलब होता है।
अक्सर आपने कपड़ों पर फूल-पत्तियों की सुंदर डिजाइन देखी होगी, लेकिन क्या कभी उन पर सजे फलों की डिजाइन्स पर गौर किया है? ये मोटिफ्स (Motifs) सिर्फ कपड़ों की शोभा नहीं बढ़ाते, बल्कि अपने भीतर सुख और समृद्धि का खास संदेश भी देते हैं। आइए जानते हैं भारतीय कपड़ों की शान बढ़ाने वाले इन फलों वाली खास डिजाइन और उनके पीछे छिपे दिलचस्प मतलब के बारे में।
आम

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कपड़ों पर आम की आकृति वाली डिजाइन आपको अक्सर ही देखने को मिल जाती होगी। दुनियाभर मे "पैस्ले" के रूप में जानी जाने वाली यह डिजाइन फर्टिलिटी, समृद्धि और प्रचुरता का प्रतीक होती है। आम बोलचाल में इसे कैरी,अंबी या बूटे की डिजाइन भी कहा जाता है, जो बनारसी बुनाई, कांचीपुरम रेशम, कश्मीरी शॉल, अजराख और चिकनकारी में पाई जाती है।
अनार
पोषण से भरपूर अनार भी कपड़ों पर खूब देखने को मिलता है। इसे खाने से सेहत को तो फायदे मिलते ही है। साथ ही कपड़ों पर भी यह खूब शानदार लगते हैं। कपड़ों पर होने वाली अनार के सैकड़ों बीजों वाली यह डिजाइन जीवन, फर्टिलिटी, समृद्धि और निरंतरता का प्रतीक माने जाते हैं। यह डिजाइन कलमकारी, बनारसी कपड़ों और मुगल-प्रेरित डिजाइनों में आम है।
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अंगूर
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शाही विलासिता से जुड़ी अंगूर की डिजाइन को अक्सर 'अंगूर जल' लताओं के रूप में दर्शाया जाता है। यह डिजाइन आमतौर पर लग्जरी और शाही रुतबे का प्रतीक मानी जाती है। यह फारसी उद्यान सौंदर्यशास्त्र से अत्यधिक प्रभावित है।
नारियल
नारियल समृद्धि, पवित्रता और निस्वार्थता का प्रतीक माना जाता है। आमतौर पर सेरेमोनियल और मंदिर के कपड़ों में इस डिजाइन का इस्तेमाल होता है। साथ ही नारियल पर हाथ से चित्रित जानवरों की आकृतियां कोकोनट आर्ट का हिस्सा हैं।
केला
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केला शुभारंभ और फर्टिलिटी का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा केला विवाह और फसल कटाई जैसे मौकों से भी जुड़ा हुआ है। इसके पत्ते और फल मंदिर के कपड़ों और उत्सव के कपड़ों में दिखते हैं।
अंजीर
ज्ञान, पोषण और लंबी आयु का प्रतीक यह डिजाइन पीपल और बरगद जैसे पवित्र पेड़ों से प्रेरित है। इसे लोक कढ़ाई और मंदिर के रूपांकनों में इस्तेमाल किया जाता है।
कमल की फली
कमल का फूल पुनर्जन्म, पवित्रता, आध्यात्मिक जागृति और जीवन चक्र का प्रतीक माना जाता है। अपनी इसी खासियत की वजह से लोटस पॉड बनारसी ब्रोकेड, मंदिर में इस्तेमाल होने वाले कपड़ों और बौद्ध कला में देखने को मिलता है।
सेब

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सेहत दुरुस्त रखने वाला सेब भी कपड़ों पर अक्सर देखने को मिलता है। समृद्धि, सुंदरता और प्रचुरता का प्रतीक सेब प्राकृतिक सुंदरता को झलकाता है। यह कश्मीरी क्रूएल कढ़ाई, शॉल, बोटनिकल टेक्सटाइल और लोक शिल्प में देखने को मिलता है।
संतरा
ताजगी, ऊर्जा और सौभाग्य का प्रतीक संतरा लघु चित्रों में दिखता है, जिससे कपड़ों के पैटर्न प्रेरित होते हैं। मुगल काल में इसके बाग शाही विलासिता दर्शाते थे।
कटहल
आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन भारतीय टेक्सटाइल्स पर कटहल भी देखने को मिलता है। प्रचुरता, पोषण और ग्रामीण जीवन का प्रतीक कटहल केरल के लोक वस्त्रों, मंदिर परंपराओं, ग्रामीण इलाकों में बुने जाने वाले कपड़ों की बॉर्डर और दक्षिण भारतीय वस्त्रों में पाया जाता है।
जामुन

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धरती और मौसम से जुड़ी से यादों का प्रतीक जामुन अपने खास रंग की वजह से टेक्स्टाइल में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी डिजाइन आमतौर पर आदिवासी वस्त्रों, लोक कला, कढ़ाई और वानस्पतिक शिल्प में मिलती है।