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हर वायरल स्किनकेयर प्रोडक्ट आपके लिए नहीं! इंडियन स्किन को चाहिए अलग देखभाल, न करें ये गलतियां

Published: Sat, 07 Nov 2026 09:39 AM (IST)

इंडियन स्किन टोन विदेशी लोगों की त्वचा से बहुत अलग हैं, इसलिए वायरल स्किनकेयर प्रोडक्ट हमेशा असरदार नहीं।

इंडियन स्किन टोन के हिसाब से स्किनकेयर (Image Source: AI Generated)

इंडियन स्किन टोन के हिसाब से स्किनकेयर (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इन दिनों स्किनकेयर में इस्तेमाल होने वाले बहुत से प्रोडक्ट त्वचा के लिए फायदेमंद तो हैं, लेकिन कई बार हम अपनी स्किन टोन को बिना देखे ही इन्हें उपयोग में लाना शुरू कर देते हैं। जबकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे त्वचा की देखभाल से जुड़े ज्यादातर नुस्खे और प्रोडक्ट हमारी त्वचा से मैच ही नहीं करते। हमें समझने की जरूरत है कि इंडियन स्किन टोन विदेशों में रहने वाले लोगों की स्किन से बहुत से मामलों में अलग है। 

ऐसे में आइए जानते हैं कि स्किनटोन को ध्यान में रखते हुए किस तरह का स्किनकेयर रूटीन फॉलो किया जाना चाहिए। 

इंडियन स्किन टोन कैसे अलग है? 

अमेरिका या सियोल जैसे शहरों की ठंडी हवा के बीच रहने वाले लोगों की स्किनटोन का फिट्जपैट्रिक स्केल I से III के बीच होता है। वहीं बात करें इंडियन स्किनटोन की, तो भारतीयों की स्किन टोन को टाइप II से टाइप VI के बीच 5 श्रेणियों जैसे- फेयर आइवरी, गोल्डन व्हीटिश और डीप एस्प्रेसो में बांटा गया है।

ऐसा इसलिए क्योंकि यहां धूप की हानिकारक यूवी रेज, तटीय इलाकों की उमस, हार्ड वॉटर, धूल-मिट्टी जैसी बातें इसकी चुनौतियों को अलग बनाती हैं। 

चुनौतियां

  • हाइपरपिग्मेंटेशन

  • ऑयली टी-जोन 

  • हार्ड वॉटर 

  • प्रदूषण और हानिकारक यूवी किरणें  

स्किनकेयर में रखें इन बातों का ध्यान 

स्किन बैरियर का खास ध्यान रखें : भारतीयों की स्किन गर्मी, उमस और प्रदूषण के संपर्क में ज्यादा रहती है, ऐसे में स्किन बैरियर का खास ख्याल रखा जाना जरूरी है। इसके लिए कम pH वाले फेस वॉश से पूरे दिन में दो बार क्लेंजिंग करें। बैरियर की सुरक्षा के लिए ज्यादा कठोर फोमिंग फेस क्लेंजर का इस्तेमाल करने बचें। 

हाइपरपिग्मेंटेशन के लिए सीरम : अगर चेहरे पर काले और गहरे भूरे रंग के दाग-धब्बे हों, तो इससे बचने के लिए डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह पर सीरम स्किनकेयर रूटीन में शामिल करें। 

सनस्क्रीन से कोई समझौता नहीं : यह स्किनकेयर का वो स्टेप है जिससे किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जाना चाहिए। कम से कम 30+ SPF वाली सनस्क्रीन को रूटीन का हिस्सा जरूर बनाएं। वैसे 50+ SPF सनस्क्रीन यूवी रेज से सुरक्षा में ज्यादा असरदार मानी जाती है। 

हफ्ते में एक बार एक्सफोलिएशन : त्वचा से डेड स्किन सेल्स हटाने के लिए हफ्ते में एक से दो बार एक्सफोलिएशन की भी सलाह दी जाती है। इससे स्किन का टेक्स्चर ठीक होने के साथ ही डलनेस भी कम होती है। 

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