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    पेड़ की टहनियों से लेकर सुहाग की निशानी बनने तक: जानिए कैसे तैयार होती हैं लाख की चूड़ियां

    Updated: Wed, 08 Apr 2026 04:00 PM (IST)

    लाख की चूड़ियां अपने सुंदर रंग और डिजाइन के लिए खूब पसंद की जाती हैं। इन चूड़ियों को प्राकृतिक रेसिन से बनाया जाता है। ...और पढ़ें

    दिलचसप है लाख की चूड़ियों का इतिहास (AI Generated Image)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत अपनी विविध संस्कृति और पारंपरिक हस्तशिल्प के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। इन हस्तशिल्प कलाओं में लाख की चूड़ियां अपनी खास जगह रखती हैं। रंग-बिरंगी और खूबसूरत डिजाइन वाली ये चूड़ियां अपने सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के कारण सदियों से भारतीय महिलाओं के शृंगार का हिस्सा हैं। 

    लेकिन क्या आप जानते हैं इन्हें बनाया कैसे जाता है और क्यों ये इतना खास महत्व रखती हैं? आइए जानें लाख की चूड़ियों का इतिहास, बनाने की प्रक्रिया और इनका सांस्कृतिक महत्व। 

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    (Picture Courtesy: gaatha.org)

    लाख की चूड़ियों का इतिहास

    लाख की चूड़ियों का इतिहास बहुत पुराना है। लाख का उल्लेख पौराणिक ग्रंथों और महाकाव्यों में भी मिलता है। महाभारत के काल में लाक्षागृह का प्रसंग आता है, जो साबित करता है कि प्राचीन काल में भी भारतीय कारीगर लाख के गुणों और इसके इस्तेमाल से अच्छी तरह परिचित थे।

    मुगल और राजपूतों के काल में लाख की चूड़ियां बनाने की कला और ज्यादा विकसित हुई। जयपुर में महाराज सवाई जय सिंह II और हैदराबाद में कुतुब शाही निजाम के राज में इन लाख की चूड़ियों खूब प्रचलित हुईं।

    ऐतिहासिक रूप से, लाख की चूड़ियां विवाहित महिलाओं के लिए सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती रही हैं। राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में यह परंपरा खासतौर से प्रचलित है। पुराने समय में, शादी और संतान के जन्म जैसे शुभ अवसरों पर मनिहार को खासतौर से घर बुलाया जाता था ताकि वे नई बहू और परिवार की महिलाओं को चूड़ियां पहना सकें।

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    (Picture Courtesy: Instagram)

    लाख होता क्या है? 

    लाख एक प्राकृतिक रेसिन है। यह केरिया लाका नाम के बेहद छोटे कीटों द्वारा बनाया जाता है। ये कीट ढाक और बेर जैसे पेड़ों की टहनियों पर रहते हैं और वहीं से अपना खाना लेते हैं। इनके शरीर से छोड़ा गया रेसिन ही लाख कहलाता है। आज इसका इस्तेमाल केवल चूड़ियों में ही नहीं, बल्कि फर्नीचर पॉलिश, कॉस्मेटिक्स और दवाओं में भी किया जाता है।

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    कैसे बनाई जाती हैं लाख की चूड़ियां?

    लाख की चूड़ियां बनाने की प्रक्रिया जितनी क्रिएटिव है, उतनी ही मेहनत भरी भी। 

    • सबसे पहले कच्चे लाख और बरोजा को लोहे की कड़ाही में गर्म करके पिघलाया जाता है। इसमें घिया पत्थर का पाउडर मिलाया जाता है, ताकि मिश्रण गाढ़ा और मजबूत हो सके।
    • तैयार पेस्ट को लंबी डंडियों पर लपेट लिया जाता है। इसके बाद अलग-अलग रंगों की लाख की टिकिया को गर्म करके मुख्य लाख पर चढ़ाया जाता है।
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    (Picture Courtesy: gaatha.org)
    • रंगीन लाख को गर्म स्थिति में ही लकड़ी के सांचों या एल्युमीनियम के रिंग पर चढ़ाया जाता है। हत्था की मदद से इसे चपटा और चिकना कर एक समान गोल आकार दिया जाता है।
    • चूड़ी के गर्म रहते ही उस पर बारीक कांच, मोती, कुंदन या नग लगाए जाते हैं। ठंडी होने पर ये जड़ित चीजें लाख में मजबूती से धंस जाती हैं।
    • सबसे आखिर में, चूड़ियों को ठंडे पानी में डाला जाता है ताकि वे सख्त हो जाएं और अपनी चमक बनाए रखें।

    डिजाइन और आधुनिक स्वरूप

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    (Picture Courtesy: Instagram)

    आज लाख की चूड़ियां अपने रंगों जैसे लाल, हरा, सुनहरा और गुलाबी के लिए जानी जाती हैं। आधुनिक समय में ग्राहकों की पसंद के अनुसार इनमें पेस्टल रंगों और ओमब्रे इफेक्ट का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। लाख की चूड़ियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये त्वचा के लिए सुरक्षित होती हैं और टूट जाने पर इन्हें दोबारा गर्म करके जोड़ा जा सकता है। 



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