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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 29, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कहीं लंगड़ा तो कहीं तोतापरी कहलाया ‘फलों का राजा’, जानें आमों के दिलचस्प नामों की कहानी

Published: Sat, 29 Jun 2024 06:45 PM (IST)

शायद ही कोई ऐसा हो जिसे आम खाना पसंद नहीं। यही वजह है कि इसे फलों का राजा भी कहा ...और पढ़ें

जानें कैसे पड़े आमों के अलग-अलग नाम
जानें कैसे पड़े आमों के अलग-अलग नाम

HighLights

  1. फलों का राजा आम कई लोगों का पसंदीदा फल होता है।
  2. भारत में आम की कई तरह की किस्में पाई जाती हैं।
  3. साथ ही इन सभी के अलग-अलग नाम भी हैं, जिनका इतिहास बेहद दिलचस्प है।

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। फलों का राजा आम (Mango) अपने बेहतरीन स्वाद की वजह दुनियाभर में जाना जाता है। मीठा, रसीला और गूदेदार आम का नाम सुनते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। शायद ही कोई ऐसा हो, जिसे आम खाना पसंद नहीं। गर्मियों में मिलने वाले इस फल की वजह से ही लोग बेसब्री से इस मौसम का इंतजार करते हैं। भारत में आम की कई सारी किस्में (Mango Species) पाई जाती हैं, जिनका अपना अलग स्वाद और खासियत होती है। बेहद स्वादिष्ट और खास इन भारतीय आमों की विदेशों में भी काफी डिमांड है।

आम के इन विभिन्न किस्मों के नाम तो सभी ने सुने होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर इन आमों के ये नाम कैसे पड़े। अगर आपके मन में भी अक्सर यह सवाल आता रहता है, तो आज इस आर्टिकल में हम आपके इस सवाल का जवाब लेकर आए हैं। आज हम आपको बताएंगे 10 प्रमुख भारतीय आमों के नामों की अनोखी कहानी के बारे में-

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लंगड़ा

लंगड़ा आम की लोकप्रिय किस्मों में से एक है और इसका इतिहास करीब 250-300 साल पुराना है। ऐसा कहा जाता है कि बनारस में एक लंगड़े आदमी ने अपने घर के पीछे एक बीज बोया था। इस व्यक्ति को उसके साथी 'लंगड़ा' कहकर पुकारा करते थे। ऐसे में जब घर के पीछे लगाए बीज से उगे पेड़ के आम जब बाजार में गए, तो लोग इसके स्वाद से काफी प्रभावित हुए और इस तरह आम की इस किस्म का नाम लंगड़ा पड़ गया।

दशहरी

आम खाने के शौकीन कई लोगों का पसंदीदा आम दशहरी है। यह बेहद मीठा और रसभरा होता है, जिसे आमतौर चूसकर खाया जाता है। इसके नाम का श्रेय अब्दुल हमीद खान कंधारी को जाता है, जिन्होंने लखनऊ के काकोरी के पास दशहरी गांव के पास आम के पौधे लगाए थे और इसलिए इस गांव के नाम पर इसका नाम दशहरी पड़ा। बाद में यह आम लखनऊ के नवाबों के बगीचों में लोकप्रिय हो गए थे।

तोतापरी आम

यह भी भारत में पाई जाने वाली आम की एक लोकप्रिय किस्म है, जिसे इसके अनोखे आकार और स्वाद की वजह से पसंद किया जाता है। जैसा कि इसके नाम तोतापरी से ही पता चलता है, तोते जैसे रंग और आकार के कारण इस आम को तोतापरी नाम दिया गया है।

चौंसा

आम की बात की जाए, तो चौंसा का जिक्र जरूर किया जाता है। यह फलों की राजा की एक बेहद स्वादिष्ट और लोकप्रिय किस्म है, जो मुख्य रूप से गर्मी खत्म होने और बारिश की शुरुआत के समय बाजार में नजर आता है। बात करें इसका नाम की, तो भारतीय शासक शेरशाह सूरी ने बिहार के चौसा में हुमायूं पर जीत हासिल करने के बाद इस जीत के सम्मान और याद में अपने पसंदीदा आम का नाम "चौंसा" रखा था।

केसर आम

केसर आम भी कई लोगों का पसंदीदा आम होता है, जिसका स्वाद और खुशबू लोग चाहकर भी भूल नहीं पाते हैं। बात करें इसके नाम की, तो केसर जैसी खुशबू होने की वजह से यह आम केसर कहलाया। इसके अलावा कुछ खाद्य इतिहासकारों का मानना है कि साल 1934 में, जूनागढ़ के नवाब मुहम्मद महाबत खान III ने इस आम के नारंगी गूदे को देखकर इसे केसर कहा था, जिसके बाद इसका यह नाम मशहूर हो गया है।

अनवर रतोल

इस आम का पहला पेड़ उत्तर प्रदेश के रतोल में लगाया गया था। इसके बाद इस आम को उगाने वाला पाकिस्तान चला गया, वहां उसने इस आम का एक पेड़ उगाया और अपने पिता के नाम पर इसके फलों का नाम "अनवर-उल-हक" रखा। इस तरह आम की इस किस्म को "अनवर रतोल" कहा जाने लगा।

सिंधरी

सिंधरी आम के नाम की कहानी भी पाकिस्तान से जुड़ी हुई है। दरअसल, इस आम के पेड़ को सबसे पहले साल 1930 के दशक की शुरुआत में ब्रिटिश शासन के दौरान मीरपुरखास में उगाया गया। इन आमों को मूल रूप से पाकिस्तान के सिंध प्रांत का माना जाता है, इसलिए इन्हें सिंधरी नाम दिया गया है।

मालदा

मालदा आम भी इस फल का एक लोकप्रिय प्रकार है, जिसे देशभर में बड़े शौक से खाया जाता है। इस आम के नाम की कहानी भी काफी दिलचस्प है। दरअसल, मालदा आम का नाम पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के नाम पर पड़ा है, क्योंकि यहां इसकी खेती की जाती है। इस आम की एक विशेष किस्म को फाजलि भी कहा जाता है और इसका मांग विदेशों में भी काफी ज्यादा है।

अल्फांसो

अल्फांसो भी एक भारतीय आम है, लेकिन इसका नाम सुन कई लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं कि यह देसी है या विदेशी। दरअसल, हापुस आम को ही अल्फांसो कहा जाता है। हालांकि, इसके इस विदेशी नाम के पीछे बेहद दिलचस्प कहानी है। भारत में पुर्तगालियों का राज हुआ करता था, तब पुर्तगाल के सैन्य रणनीतिकार अफोंसो अल्बूकर्क ने गोवा में स्वादिष्ट आमों के कई बागान लगाए थे। धीरे-धीरे इन आमों का स्वाद लोगों को भी भाने लगा और अफोंसो की मौत के बाद श्रद्धांजलि के तौर पर इस खास आम को 'अल्फांसो' नाम दिया गया।

दुधिया मालदा

यह आम की एक ऐसी किस्म है, जिसे पानी की जगह दूध से सींचा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि लखनऊ के नवाब फिदा हुसैन इसे पाकिस्तान के इस्लामाबाद से लाए थे। उनके पास बहुर सारी गाय थीं, जिनके बचे हुए दूध से वह इस पौधे की सिंचाई दूध से किया करते थे। जब यह पेड़ बड़ा हुआ और इसमें फल आए, तो उसमें से दूध जैसा कुछ पदार्थ निकला, जिसके बाद इसका नाम दूधिया मालदा पड़ गया।

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