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    Anime ने बदल दी भारतीयों की थाली? Gen-Z की नई पसंद बना जापानी जायका, रामेन बार्स हुए हाउसफुल

    Updated: Sun, 01 Feb 2026 08:10 AM (GMT+05:30)

    युवाओं के बीच इंस्टाग्राम ट्रेंड में बदल चुकी है जापानी भोजन की स्वीकार्यता। दिल्ली की लोधी कालोनी स्थित जापानी रेस्त्रां गुप्पी के हेड शेफ सौरभ शरण ब ...और पढ़ें

    Gen-Z की नई पसंद बना जापानी भोजन (Picture Credit- AI Generated)

    Gen-Z की नई पसंद बना जापानी भोजन (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. जापानी भोजन, खासकर सुशी और रामेन, Gen-Z में लोकप्रिय।

    2. शाकाहारी सुशी और फ्यूजन व्यंजनों ने भारतीय स्वाद को आकर्षित किया।

    3. एनीमे का प्रभाव और स्वास्थ्य जागरूकता ने लोकप्रियता बढ़ाई।

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। 2026 की सर्दियों की एक सुहानी शाम, दिल्ली के एक पाश इलाके में स्थित जापानी रेस्त्रां में लंबी वेटिंग इस बात की गवाह है कि भारत के खान-पान की संस्कृति में बड़ा बदलाव आ चुका है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे महानगरों में जापानी भोजन केवल विदेशी विकल्प नहीं, ‘ट्रेंड’ बन चुका है।

    चाहे वह चापस्टिक से सुशी खाने की कोशिश करते हुए कालेज छात्र की मुस्कान हो या रामेन के शोरबे की चुस्की लेते हुए कामकाजी पेशेवर, जापानी भोजन ने भारत के फूड मैप को नया और शानदार रंग दे दिया है।

    सुशी में मिला शाकाहारी स्वाद

    जापानी भोजन की भारत में एंट्री का सबसे बड़ा श्रेय सुशी को जाता है। शुरुआत में सुशी को केवल मांसाहारी व्यंजन माना जाता था, लेकिन भारतीयों के चयन को समझते हुए हमने इसमें बदलाव भी किए। अब एस्परैगस, एवोकाडो, ककड़ी और यहां तक कि पनीर तथा मसालेदार मेयोनेज के साथ तैयार की गई सुशी ने शाकाहारी भारतीयों का दिल जीत लिया है। पाबलेनो पेपर सुशी, मैंगो सुशी हो या निगिरी अथवा उरामाकी, जापानी भोजन में अब शाकाहारी संतुष्टि भी है। 

    सुकून से भरा रामेन का कटोरा

    सुशी ने भारत में जापानी भोजन की पहचान बनाई, तो रामेन ने उसे भारतीयों के लिए ‘कंफर्ट फूड’ बना दिया। जापानी रामेन का उमामी स्वाद युवाओं को खूब भाता है। विशेष रूप से सर्दियों में एक बड़े कटोरे में गरमा-गरम नूडल, उबला हुआ अंडा, सीवीड और मसालों से भरपूर शोरबा जेन जी के लिए इंस्टैंट नूडल्स का प्रीमियम और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प बन गया है। भारतीय ग्राहकों को शोरबे में तीखापन पसंद है, इसलिए हम इसमें मिचो और चिली आयल का संतुलित मेल बिठाते हैं। बेंगलुरु जैसे शहरों में तो अब रामेन बार्स युवाओं के हैंगआउट का मुख्य केंद्र बन गए हैं।

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     कलात्मक अनुभव है तेप्पान्याकी डाइनिंग 

    जापानी भोजन केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि कलात्मक अनुभव भी देता है। अब रेस्त्रां में ही नहीं, महंगी शादियों और बड़े आयोजनों में तेप्पान्याकी डाइनिंग का चलन तेजी से बढ़ा है। इनमें लाइव जापानी काउंटर होना प्रतिष्ठा का विषय माना जाने लगा है। यहां शेफ लोहे की एक बड़े गर्म आयताकार तवे पर आपके सामने खाना पकाते हैं, जिसमें आग के करतब और चाकू चलाने की कला शामिल होती है!

    बढ़ती स्वीकार्यता के कारण

    जापानी भोजन अपनी ताजगी और कम तेल के लिए जाना जाता है। सेहत के लिए जागरूक लोगों को बाहर खाने के लिए यह कांसेप्ट पसंद आ रहा है। चावल और नूडल्स भारत और जापान दोनों ही देशों के मुख्य आहार हैं, जिससे भारतीयों को इस नए स्वाद को अपनाने में अधिक कठिनाई नहीं हुई। दूसरी तरफ भारत में कोरियाई पाप कल्चर की तरह ही जापानी एनीमे की दीवानगी ने जेन जी में वहां की संस्कृति और भोजन के प्रति आकर्षण पैदा किया है।

    चुनौतियां भी कम नहीं थीं

    कई समानताओं के बावजूद भारत में जापानी भोजन के सामने बड़ी चुनौती थी—कच्चा मांस और सीफूड। भारतीय स्वाद कलिकाएं पके हुए और मसालेदार भोजन की आदी हैं। इसका समाधान फ्यूजनके रूप में निकला। आज स्पाइसी टूना रोल या टेंपुरा (तली हुई सब्जियां या झींगे) जैसे विकल्प हैं। किमची तो है ही, इसके साथ ही, वसाबी का तीखापन भारतीयों को हरी मिर्च की याद दिलाता है।

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