ना 5 घंटे, ना 9 घंटे... तो सेहतमंद रहने के लिए कितनी नींद है जरूरी? 5 लाख लोगों के डेटा से मिला सही जवाब
एक स्टडी के अनुसार, कम या ज्यादा नींद लेना बायोलॉजिक एज को तेजी से बढ़ा सकता है और समय से पहले मौत के जोखिम को बढ़ा सकता है।

कम या ज्यादा सोना हो सकता है खतरनाक (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल की लाइफस्टाइल में नींद से समझौता करना आम बात हो गई है। कुछ लोग 4-5 घंटे की नींद लेते हैं, तो वहीं कुछ ऐसे भी हैं, जो 10-12 घंटे की नींद भी ले रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कम या ज्यादा सोना आपकी उम्र को तेजी से बढ़ा सकता है?
जी हां, लगभग 5 लाख लोगों पर की गई एक स्टडी में सामने आया है कि जरूरत से ज्यादा या कम सोना बायोलॉजिकल एज को तेजी से बढ़ाने और समय से पहले मौत के खतरे से जुड़ा हो सकता है। इसलिए आप कितनी देर सो रहे हैं, इस पर ध्यान देना जरूरी है। आइए जानें इस बारे में और भी कुछ बातें।
सेहत और नींद के घंटे
रिसर्च के मुताबिक, 6 घंटे से कम सोने वाले लोगों में किसी भी कारण से मौत का जोखिम 50% ज्यादा देखा गया। वहीं, 6-8 घंटे सोने वालों की तुलना में आठ घंटे से ज्यादा सोने वालों में यह खतरा 40% पाया गया। शरीर के अंगों और लिंग के हिसाब से बायोलॉजिक एज में सबसे कम अंतर 6.4 से 7.8 घंटे के बीच देखी गई।
इस स्टडी के मुताबिक, महिलाओं के लिए 6.5 से 7.8 घंटे की नींद और पुरुषों के लिए 6.4 से 7.7 घंटे की नींद सबसे बेहतर पाई गई और इसका असर दिल, दिमाग, लिवर, इम्यून सिस्टम, स्किन, एंडोक्राइन सिस्टम, फैट टिश्यू और पैनक्रियाज पर साफ देखा गया। हालांकि, ये स्टडी सीधे तौर पर ये साबित नहीं करती है कि नींद की कमी या ज्यादा सोना समय से पहले मौत या उम्र बढ़ने का कारण बनती है।
दक्षिण एशियाई शहरों का हाल
दिल्ली, चेन्नई और कराची के 16,287 वयस्कों पर की गई एक स्टडी में लोगों के नींद के पैटर्न को लेकर कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। एक वयस्क को औसत 7.3 घंटे की नींद चाहिए होती है। हालांकि, इस स्टडी में 5.5% ऐसे लोग थे, जो 5 घंटे से कम सो रहे थे, 12.4% नौ घंटे से ज्यादा सोने वाले थे, 12% वयस्क इनसोम्निया की समस्या से जूझ रहे थे और 14.5% लोगों को खर्राटे की शिकायत थी।
नींद की गुणवत्ता भी जरूरी
आप कितनी देर सोते हैं, सिर्फ उस पर ध्यान देना काफी नहीं है। आपकी नींद कितनी गहरी है और कंसीस्टेंसी भी उतनी ही जरूरी है। हर व्यक्ति के लिए सोने का कोई एक सही नंबर नहीं होता। लगातार 6 घंटे से कम सोना या बहुत ज्यादा सोना, इस बात का संकेत हो सकता है कि आपकी नींद की गुणवत्ता बेहतर न हो, आपके शरीर को तरोताजा महसूस न हो रहा हो या आपको कोई अंदरूनी बीमारी है। ऐसी स्थिति दिल और मेटाबॉलिज्म से जुड़े खतरों को बढ़ा सकती है।
बीमारियों से कनेक्शन
अच्छी नींद और भविष्य में बीमारियों के जोखिम के बीच कुछ अहम कनेक्शन पाए गए हैं। कम सोने से मेंटल हेल्थ, मेटाबॉलिज्म, दिल, लंग्स और डाइजेशन से जुड़ी बीमारियों पर असर पड़ता है। वहीं, नींद में खलल या बिगड़ा हुआ बॉडी क्लॉक शरीर में सूजन, हार्मोनल इंबैलेंस और टिश्यू की मरम्मत की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
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