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    तनाव, खराब नींद और दिनभर की थकान का परमानेंट इलाज है योग, डॉक्टर्स ने बताया- 'सेहत का बड़ा निवेश'

    Updated: Sun, 21 Jun 2026 08:00 AM (IST)

    हम में से ज्यादातर लोग यही मानते हैं कि योग का मतलब बस शरीर को लचीला बनाना और अपने उठने-बैठने के तरीके को ठीक करना है, लेकिन इसकी असली कहानी तो इन शार ...और पढ़ें

    फ्लेक्सिबिलिटी के अलावा हेल्दी हार्ट और लंबी उम्र की गारंटी भी देता है योग (Image Source: AI-Generated)

    फ्लेक्सिबिलिटी के अलावा हेल्दी हार्ट और लंबी उम्र की गारंटी भी देता है योग (Image Source: AI-Generated) 

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज 21 जून को हम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रहे हैं। अक्सर लोग मानते हैं कि योग सिर्फ शरीर को लचीला बनाने और पॉश्चर को सुधारने का एक जरिया है, लेकिन सच तो यह है कि इसके फायदे केवल शारीरिक कसरत से कहीं आगे तक फैले हुए हैं। आज के समय में डॉक्टर भी यह मानने लगे हैं कि योग दिल की सेहत, सांस लेने की क्षमता, तनाव कम करने, अच्छी नींद और लंबी उम्र के लिए एक बेहद असरदार और पूरक अभ्यास है।

    बदलती लाइफस्टाइल की बीमारियों का अचूक इलाज

    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर उम्र के लोग लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। लंबे समय तक काम करना, लगातार तनाव, दिन भर बैठे रहना, खराब नींद और शारीरिक मेहनत की कमी- ये सब मिलकर दिल की बीमारियों, मोटापे, डायबिटीज और सांस की समस्याओं का खतरा बढ़ा रहे हैं। ऐसे में योग एक सरल लेकिन बेहद ताकतवर बचाव के उपाय के रूप में काम करता है।

    International Day of Yoga

    (Image Source: Magnific) 

    दिल की सेहत के लिए एक लंबा निवेश

    दिल की सेहत की बात करें तो नियमित योग से कार्डियोवस्कुलर बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है। मेडिटेशन, सही तरीके से सांस लेना और योग के हल्के मूवमेंट तनाव घटाते हैं और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखते हैं।

    सीके बिड़ला अस्पताल, बीएम बिड़ला हार्ट हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी डायरेक्टर डॉ. अनिल मिश्रा कहते हैं, "योग को सिर्फ फिटनेस एक्टिविटी नहीं, बल्कि दिल की सेहत के लिए एक लंबे समय का निवेश मानना चाहिए। नियमित अभ्यास से ब्लड प्रेशर सुधरता है और तनाव कम होता है। यहां तक कि रोजाना सांस से जुड़ी साधारण एक्सरसाइज और माइंडफुलनेस भी दिल के लिए बहुत फायदेमंद हो सकती है।"

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    सांसों का विज्ञान है योग

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर अक्सर हमारा ध्यान मुश्किल आसनों पर जाता है, लेकिन योग की असली ताकत पूरी तरह से 'अदृश्य' है-और वह है हमारे सांस लेने का तरीका। आधुनिक जीवनशैली ने अनजाने में हमारी फेफड़ों की क्षमता को कम कर दिया है। हजारों सालों से लोग प्राणायाम के जरिए शरीर को स्वस्थ रख रहे हैं और दुनिया के पहले 'रेस्पिरेटरी फिजियोलॉजिस्ट' की तरह काम कर रहे हैं।

    आधुनिक विज्ञान भी अब इस बात को मानता है कि हमेशा नाक से सांस लेना चाहिए। नाक से सांस लेने पर शरीर में 'नाइट्रिक ऑक्साइड' नामक एक जरूरी मॉलिक्यूल बनता है। यह खून की नलियों को चौड़ा करता है और शरीर की हर कोशिका तक ऑक्सीजन पहुंचाता है। मुंह बंद रखकर सांस लेने से शरीर उस तनाव से बच जाता है, जो मुंह से सांस लेने पर पैदा होता है।

    इसके अलावा, योग हमें लंबी और धीमी सांसें छोड़ना सिखाता है। इससे शरीर के अंदर फंसी पुरानी हवा बाहर निकलती है और हमारा 'रेस्ट एंड डाइजेस्ट' सिस्टम एक्टिव हो जाता है, जिससे तुरंत ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट कम हो जाता है।

    रोजाना सिर्फ 20-30 मिनट का योग है काफी

    सीके बिड़ला अस्पताल, सीएमआरआई के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. श्याम कृष्णन बताते हैं, "योग उन गिने-चुने अभ्यासों में से एक है जो शरीर और दिमाग दोनों को एक साथ फायदा पहुंचाता है। गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है, तनाव कम होता है और नींद अच्छी आती है।"

    वह आगे कहते हैं कि योग में इंटेंसिटी से ज्यादा निरंतरता जरूरी है। दिन में सिर्फ 20 से 30 मिनट का योग भी लंबे समय में गजब के फायदे दे सकता है। अपनी सेहत बदलने के लिए आपको सिर के बल खड़े होने की जरूरत नहीं है, बस रोज़ाना ध्यान से सांस लेना ही हमारी सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक दवा है।

    लंबी उम्र और बुढ़ापे में असली सहारा

    योग का एक और बड़ा योगदान स्वस्थ और लंबी उम्र को बढ़ावा देना है। सही मायनों में उम्र बढ़ने का मतलब सिर्फ ज्यादा साल जीना नहीं है, बल्कि अपना काम खुद कर पाना, चलते-फिरते रहना और अच्छी क्वालिटी की जिंदगी जीना है। योग से शरीर का संतुलन, मांसपेशियों की ताकत और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, जो बढ़ती उम्र को बेहतरीन बनाने के लिए बहुत जरूरी है।

    दवा का विकल्प नहीं, एक सहयोगी है योग

    हालांकि, एक्सपर्ट्स यह चेतावनी भी देते हैं कि योग किसी मेडिकल इलाज की जगह नहीं ले सकता, बल्कि यह उसके साथ मिलकर काम करता है। जब योग को सही खानपान, पर्याप्त नींद, नियमित हेल्थ चेकअप और मौजूदा बीमारियों के सही इलाज के साथ जोड़ा जाता है, तब इसके सबसे बेहतरीन परिणाम मिलते हैं।

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर यह संदेश बिल्कुल साफ है- योग का मतलब अपने शरीर को तोड़-मरोड़ कर मुश्किल आसन करना या बहुत ज्यादा लचीलापन हासिल करना नहीं है। इसका असली मकसद ऐसी रोजाना की आदतें बनाना है जो आपको एक स्वस्थ दिल, मजबूत फेफड़े, शांत दिमाग और आने वाले कई सालों तक एक बेहतरीन जीवन दे सकें।

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