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    ब्रेन स्ट्रोक का खतरा टाल सकती हैं आपकी ये 7 आदतें, क्या आप भी कर रहे हैं इन्हें इग्नोर?

    By Niharika PandeyEdited By: Harshita Saxena
    Updated: Wed, 28 Jan 2026 03:36 PM (IST)

    ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर स्थिति है और इसके लिए कई कारक जिम्मेदार होते हैं। उन कारणों से बचाव और लाइफस्टाइल में बदलाव इसके खतरे को काफी हद तक टाल सकता है ...और पढ़ें

    ब्रेन स्ट्रोक से बचाव: इन 7 जोखिम कारकों को समझें और नियंत्रित करें (Picture Credit- AI Generated)

    ब्रेन स्ट्रोक से बचाव: इन 7 जोखिम कारकों को समझें और नियंत्रित करें (Picture Credit- AI Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ब्रेन तक सही मात्रा में खून न पहुंच पाना और उसकी वजह से होने वाली ऑक्सीजन की कमी ब्रेन स्ट्रोक का कारण बनती है। यह एडल्ट्स में शारीरिक अक्षमता लाने वाले सबसे बड़े कारणों में से एक माना जाता है।

    ब्रेन में ब्लॉकेज या फिर ब्रेन में ब्लीडिंग जैसे दो रूपों में यह सामने आ सकता है। इससे बचने का सबसे आसान तरीका है इसके जोखिमों से खुद को बचाना। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि ब्रेन स्ट्रोक से बचने के लिए किन खतरों से बचना जरूरी है। 

    ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण

    • चेहरे, हाथ या पैरों में अचानक ही सुन्नपन महसूस होना।
    • भ्रम होना, बोलने में परेशानी या शब्द स्पष्ट न होना।
    • आंखों में धुंधलापन या बॉडी का बैलेंस बिगड़ जाना।
    • बेवजह सिर में तेज दर्द।

    इन खतरों से करें अपना बचाव

    • हाई ब्लड प्रेशर: यह स्ट्रोक का सबसे प्रमुख कारण है। बुजुर्गों में हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक के खतरे को चार गुना तक बढ़ा सकता है। डॉक्टर से इसे सही रेंज में लाने के लिए सलाह लें।
    • धूम्रपान: यह ब्रेन में ब्लॉकेज के खतरे को दोगुना और हेमरेज स्ट्रोक के खतरे को चार गुना तक बढ़ा सकता है। इसकी वजह से ब्रेन तक ब्लड का सप्लाई करने वाली गर्दन की मुख्य आर्टरी कैरोटिड में कोलेस्ट्रॉल इकट्ठा होने लगता है। इससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
    • हार्ट डिजीज: कोरोनरी आर्टरी डिजीज, वॉल्व में खराबी, धड़कनों का अनियमित हो जाना और हार्ट चेंबर का बड़ा हो जाना ब्लड क्लॉट का कारण बनता है। जब यह क्लॉट टूटता है, तो वह ब्लड वेसल्स को ब्लॉक करता है या ब्रेन तक पहुंच जाता है। ऐसे में हार्ट हेल्थ का ध्यान रखना और डॉक्टर से रेगुलर चेकअप जरूरी है।
    • पहले भी आया हो स्ट्रोक: अगर किसी को पहले भी स्ट्रोक आया हो तो उन लोगों की तुलना में खतरा बढ़ जाता है, जिन्हें पहले कभी स्ट्रोक नहीं आया। पहले स्ट्रोक के बाद अपने ब्रेन का ध्यान रखना और भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि यह ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
    • डायबिटीज: यह बॉडी में सिर्फ शुगर या ग्लूकोज के इस्तेमाल करने की क्षमता को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि पूरे शरीर के ब्लड वेसल्स में विनाशकारी बदलाव लेकर आता है। अगर स्ट्रोक के वक्त ब्लड ग्लूकोज का स्तर हाई हो, तो ब्रेन को ज्यादा डैमेज होने का खतरा रहता है। 
    • कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन: लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल या एलडीएल खून के जरिए हर सेल्स तक पहुंच जाता है। एलडीएल की ज्यादा मात्रा ब्लड वेसल्स को सिकोड़ देती है, जोकि हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण बनती है।
    • एक्टिव न रहना: शारीरिक रूप से सक्रिय न रहने वाले या मोटापे के शिकार लोगों में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा तीन गुना ज्यादा होता है।

    खतरे के इन कारणों को टालना है मुश्किल

    • उम्र
    • जेंडर
    • फैमिली हिस्ट्री

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