धीरे-धीरे आपकी पुतली को ढक सकती है यह बीमारी! इन लक्षणों को इग्नोर करना पड़ सकता है भारी
टेरिजयम या नाखूना आंखों में पतले टिशूज की ग्रोथ होती है। यह कैंसरकारी नहीं होता और आंखों के सफेद हिस्से को ढंकना शुरू कर देता। इसका फैलाव कॉर्निया तक ...और पढ़ें
-1767967318487_m.webp)
आंखों की इस समस्या को पहचानें, जानें कारण और उपचार (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
नाखूना आंखों में पतले टिशूज की असामान्य ग्रोथ है
धूप, धूल-मिट्टी इसके मुख्य कारण हो सकते हैं
बचाव के लिए यूवी-प्रोटेक्टिव सनग्लास पहनें
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। टेरिजियम या सर्फर आई के नाम से जानी जाने वाली यह आंखों की एक आम समस्या है। लेकिन कॉर्निया तक टिशूज की ग्रोथ या मांस बढ़ जाने पर आंखों की रोशनी पर इसका प्रभाव पड़ना शुरू हो जाता है। महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में यह समस्या ज्यादा देखी गई है। आखिर यह समस्या क्या है, इसके क्या कारण और उपचार है आइए जानते हैं।
ये हैं कारण
वैसे तो टेरिजियम या नाखूना होने का सटीक कारण ज्ञात नहीं है, लेकिन ज्यादा धूप या धूल-मिट्टी में काम करने वाले लोगों को यह समस्या होती है। बच्चों में यह समस्या कम ही देखने को मिलती है। इन लोगों को ज्यादा खतरा रहता है:
- धूप, धूल-मिट्टी में काम करने वाले
- किसान
- मछुआरे
ऐसे नजर आते हैं लक्षण
- आंखों में टिश्यूज का बढ़ जाना
- आंखों में जलन और सूजन
- आंख के अंदर कुछ फंसे होने का एहसास
- कॉर्निया तक ग्रोथ होने पर विजन में परेशानी
ऐसे लगा सकते हैं पता
इस समस्या का पता डॉक्टर आंखों की जांच के दौरान लगा लेते हैं। आमतौर पर इसके लिए अलग से कोई टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती।
- आंखों की नमी बनाए रखना है जरूरी
ज्यादातर मामलों में नाखूना के इलाज के लिए सनग्लासेस पहनाने और आर्टिफिशियल टियर्स का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। आर्टिफिशियल टियर्स से आंखों की नमी बरकरार रहती है और टेरिजियम का आकार बढ़ने का खतरा कम हो जाता है। विजन में किसी प्रकार की समस्या आने पर सर्जरी से इसे रिमूव करने की सलाह दी जाती है। साथ ही यह दिखने में भी अच्छा नहीं लगता तो लोग इसे रिमूव करवाने का विकल्प चुनते हैं।
खबरें और भी
- दोबारा लौट सकता है
सूजन बनी रहने की वजह से टेरिजियम कॉर्निया तक फैल जाता है। कई बार रिमूव करने के बाद भी यह लौटकर दोबारा आ जाता है। ऐसे में सालाना आई स्पेशलिटस से जांच कराते रहना इससे बचे रहने का बेहतर उपचार है।
बचाव के लिए अपनाएं ये तरीके
- यूवीए और यूवीबी किरणों को रोकने वाले सनग्लास पहनें
- बाहर निकलने पर हैट लगाएं
- नजर वाले चश्मे में यूवी प्रोटेक्शन वाली कोटिंग होनी चाहिए।