बिस्तर पर लेटते ही फोन चलाने की लत? जानिए 'डूम-स्क्रॉलिंग' कैसे छीन रही है आपकी रातों की नींद
रात को रिलैक्स होने के लिए कई लोग सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करना शुरू कर देते हैं, लेकिन यह आदत आपकी नींद को प्रभावित कर रही है। ...और पढ़ें

क्या आप भी रात को देर तक चलाते हैं फोन? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। दिन भर की थकान के बाद जब हम बिस्तर पर लेटते हैं, तो अक्सर हमारा हाथ अपने स्मार्टफोन की ओर चला जाता है। सिर्फ 5 मिनट कहकर हम घंटों सोशल मीडिया या न्यूज फीड स्क्रॉल करते रह जाते हैं और हमें पता भी नहीं चलता।
सुनने में यह ऐसा लग सकता है कि खुद को रिलैक्स करने के लिए सोशल मीडिया पर फनी मीम्स देख रहे हैं, लेकिन असल में यह आदत आपकी मेंटल हेल्थ और नींद को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। आइए समझें कि रात के अंधेरे में डूम स्क्रॉलिंग करना कैसे आपकी नींद बिगाड़ रही है।
ब्लू लाइट का खेल
हमारा शरीर एक बायोलॉजिकल घड़ी के मुताबिक काम करता है। सूरज ढलने के बाद हमारा दिमाग मेलाटोनिन हार्मोन रिलीज करने का सिग्नल देने लगता है, जो हमें संकेत देता है कि अब सोने का वक्त हो गया है। लेकिन स्मार्टफोन की ब्लू लाइट इस सिग्नल को डिस्टर्ब कर देती है और मेलाटोनिन प्रोडक्शन कम हो जाता है। नतीजा यह होता है कि आप बिस्तर पर करवटें बदलते रहते हैं, लेकिन नींद का नामो निशान भी नहीं दिखता।

(AI Generated Image)
दिमाग अलर्ट मोड पर रहता है
नींद के लिए दिमाग का शांत होना जरूरी है, लेकिन डूम-स्क्रॉलिंग इसके ठीक उलट काम करती है। जब आप आक्रामक या रेज बेटिंग वाले वीडियो, राजनीतिक बहस या कोई दुखद खबर देखते हैं, तो आपका दिमाग ज्यादा अलर्ट हो जाता है। दिमाग जानकारी को प्रोसेस करने में लग जाता है, जिससे वह रिलैक्स नहीं हो पाता।
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तनाव और कोर्टिसोल का बढ़ना
डूम-स्क्रॉलिंग के दौरान हम अक्सर नेगेटिव कॉन्टेंट के संपर्क में आते हैं। युद्ध, दुर्घटनाएं या दूसरों की चकाचौंध भरी जिंदगी देखकर अनजाने में हमारे अंदर असुरक्षा और चिंता की भावना पैदा होती है। इससे शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ कोर्टिसोल न केवल नींद में खलल डालता है, बल्कि नींद की गुणवत्ता को भी खराब कर देता है, जिससे सुबह उठने पर आप थकान महसूस करते हैं।
डूम-स्क्रॉलिंग की लत कैसे तोड़ें?
अगर आप भी इस लत का शिकार हैं, तो कुछ छोटे बदलाव आपके जीवन में बड़ा सुधार ला सकते हैं-
- डिजिटल कर्फ्यू- सोने से कम से कम 1 घंटा पहले अपने फोन को खुद से दूर कर दें।
- पुराना तरीका अपनाएं- अलार्म के लिए फोन की जगह एक साधारण अलार्म घड़ी का इस्तेमाल करें, ताकि फोन बिस्तर तक न पहुंचे।
- स्क्रीन की जगह किताब- मोबाइल की जगह कोई अच्छी किताब पढ़ें या लाइट म्युजिक सुनें।
- नाइट मोड सेट करें- अगर फोन चलाना बहुत जरूरी हो, तो ब्लू लाइट फिल्टर या नाइट मोड चालू रखें।