बच्चों में स्मार्टफोन की लत के बड़े नुकसान, बचाव के लिए 'No Mobile Zones' सहित कई तरीके हो सकते हैं कारगर
बच्चों में स्मार्टफोन की लत गंभीर समस्या बन गई है। एक माता-पिता परेशान हैं क्योंकि उनका तीन साल का बच्चा फोन के बिना खाना नहीं खाता। न्यूरोफिजिशियन डॉ ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
बच्चे स्मार्टफोन के बिना खाना नहीं खाते, चिड़चिड़े हो रहे।
न्यूरोफिजिशियन ने बताया लत से एकाग्रता, भाषा विकास प्रभावित।
जागरण संवाददाता, मेरठ। जागृति विहार के रहने वाले एक माता-पिता इस बात से चिंतित हैं कि उनका तीन साल का बच्चा तब तक खाना नहीं खाता है जब तक कि उसके हाथ में स्मार्टफोन न थमा दिया जाए। यदि वह देने से इंकार करते हैं तो वह गुस्सा हो जाता है। सामने रखी चीजें उठाकर फेंकने लगता है। किसी भी चीज से उसका अटैचमेंट खत्म हो जाता है। जिद करता है। चिड़चिड़ा हो जाता है। इससे परेशान होकर माता-पिता न्यूरोफिजिशियन के पास पहुंचते हैं।
लक्षणों के आधार पर न्यूरोफिजिशियन बताती हैं कि बच्चे को स्मार्ट फोन की लत लग गई है। बच्चे को इससे निकालने के लिए अभिभावक को घर में नो माेबाइल जोन बनाने और नो फोन इटिंग पालिसी अपनाने की सलाह देती हैं। कहती हैं कि बच्चे पर ध्यान देने के साथ खुद की मोबाइल यूज करने की आदत पर नियंत्रण करें। क्योंकि बच्चा वही करता है, जो आपको करते हुए देखता है।
ऐसे मामले रोजाना लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक स्थित न्यूरोलाजी विभाग की ओपीडी में आ रहे हैं। न्यूरोफिजिशियन डा. दीपिका सागर का कहना है कि ओपीडी में 250 से 300 मरीज आते हैं। जिनमें से आठ से 10 केस बच्चों के स्मार्टफोन की लत से जुड़े होते हैं।

डा. दीपिका सागर के अनुसार ढाई से पांच साल तक के बच्चों में ये समस्या ज्यादा देखी जा रही है। स्मार्टफोन की लत लगने के कई कारण हैं। काम में व्यस्त होने पर अक्सर माता-पिता बच्चे के हाथ में फोन थमा देते हैं। बच्चे के रोने पर उसे खेल-खिलौने या पारंपरिक तरीके से शांत कराने के बजाए माता-पिता हाथ में फोन थमा देते हैं। यदि एक ही बच्चा है तो उसका दूसरा साथी स्मार्ट फोन ही है। माता-पिता को वह फोन चलाते देखता है तो वह भी वही करना चाहता है।
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स्मार्ट फोन पर अधिक देर तक गेम्स और वीडियो देखने से ब्लू लाइट के प्रभाव से दिमाग में डोपामाइन हार्मोंस तेजी से रिलीज होता है। जिससे बच्चे को तुरंत खुशी मिलती है और उसे फोन की लत लग जाती है। बच्चे को खाने के स्वाद से ज्यादा मोबाइल की स्क्रीन के रंगों और आवाज से जुड़ाव हो जाता है। इसी लत के चलते खाने से पहले फोन मांगने लगता है।
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ये हैं बच्चे को होने वाले नुकसान
- एकाग्रता में कमी हो जाती है। पढ़ाई या किसी काम में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता है। पढ़ाई में कमजोर हो सकता है।
- मोबाइल स्क्रीन संवाद को एकतरफा कर देता है। जिससे बच्चे के अंदर भाषा सीखने की गति धीमी हो सकती है।
- बच्चा माइग्रेन की चपेट में आ सकता है। लगातार स्क्रीन देखने से छोटे बच्चों के ब्रेन की सेल्स फैटी हो जाती हैं।
- दिमाग का अपना कोई ग्लूकोज का स्टोरेज नहीं होता है। स्क्रीन पर ज्यादा देर तक रहने से दिमाग के न्यूरान डैमेज होने लगते हैं।
- फोन छीनने पर गुस्सा हो जाना, चिड़चिड़ापन, जिद्दी हो सकता है। सिरदर्द, डिप्रेशन व दौरे की संभावना बढ़ सकती है।
- बच्चे की सोचने-समझने की शक्ति प्रभावित होती है। यदि वह गलत चीजें देखेगा तो आगे चलकर वैसा ही कार्य कर सकता है।
- स्क्रीन पर ज्यादा देर तक रहने सिरदर्द धीरे-धीरे गर्दन दर्द में परिवर्तित हो जाता है। इससे डिस्क की समस्या भी हो सकती है।
- मोबाइल में व्यस्त रहने पर फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है। शरीर में विटामिन डी-3 की कमी से दिमागी परेशानी बढ़ सकती है।
- आंखों की रोशनी कम होना,नींद की कमी और मोटापा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। शुगर अनियंत्रित हो सकता है।
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बचाव के लिए ये उपाय
- घर में नो फोन जोन बनाएं। एक कमरा ऐसा रखें। जहां फोन का उपयोग प्रतिवंधित हो। उस कमरे में बच्चों के साथ बैठें। उन्हें बोलकर कहानियां सुनाएं। अंताक्षरी या अन्य खेल खेलें। दादा-दादी, नाना-नानी के साथ, छोटे बच्चों का समूह बनाकर उन्हें समय बिताने दें।
- नो फोन इटिंग पालिसी अपनाएं। डाइनिंग टेबल पर खाना खाते समय फोन बंद कर दूर रख दें। शुरुआत में बच्चा राेएगा, खाना नहीं खाएगा। लेकिन जब आपको खाते देखेगा तो उसे भी भूख का अहसास होगा। धीरे-धीरे फोन देखकर खाने की लत दूर होगी।
- बच्चों को पार्क ले जाएं। उनको पेंटिंग और किताबों में व्यस्त करें। सोते समय मोबाइल दूसरे कमरे में रखें। दो साल से कम बच्चे को बिल्कुल स्क्रीन न देखने दें। दो से पांच साल तक के बच्चे को 30 मिनट, पांच से 10 साल तक के बच्चों के लिए एक घंटे से ज्यादा स्क्रीन न देखने दें। माता-पिता अपनी निगरानी में स्क्रीन टाइम कम करें।
सीएम ने भी की है अपील
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छोटे बच्चों को स्मार्ट फोन देने पर चिंता जताई है।कहा कि स्मार्ट फोन का उपयोग केवल आवश्यकता अनुसार होना चाहिए। छोटे बच्चों को इसके उपयोग से दूर रखें। क्योंकि यह उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है। माता-पिता से बच्चों को किताबों, पढ़ाई और संस्कारों से जोड़ने की अपील की है।