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    रात में देर तक मोबाइल की लत बिगाड़ रही सेहत, नींद बेहतर करने को सोने से इतनी देर पहले बंद करें मोबाइल

    By Jagmohan Sharma Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Sat, 17 Jan 2026 04:33 PM (GMT+05:30)

    रात में घंटों मोबाइल चलाने की आदत से शरीर और दिमाग थक जाता है, जिससे नींद का चक्र बिगड़ रहा है। बुलंदशहर के कल्याण सिंह मेडिकल कॉलेज में अनिद्रा, चिड़ ...और पढ़ें

    रात में देर तक मोबाइल की लत बिगाड़ रही स्वास्थ्य, प्रतीकात्मक फोटो (Image Source: Freepik)

    रात में देर तक मोबाइल की लत बिगाड़ रही स्वास्थ्य, प्रतीकात्मक फोटो (Image Source: Freepik)

    HighLights

    1. देर रात मोबाइल के इस्तेमाल से शरीर और दिमाग थक रहा।

    2. मेलाटोनिन हार्मोन बाधित होने से नींद का चक्र बिगड़ रहा।

    जागरण संवाददाता, बुलंदशहर। बेड पर लेटकर रात के समय घंटों तक मोबाइल चलाने की आदत से शरीर के साथ दिमाग भी थक रहा है। इस बिगड़ती आदत की चपेट में केवल बच्चे और युवा ही नहीं बल्कि बुजुर्ग भी चपेट में है।
    मेलाटोनिन हार्मोन पर असर होने से नींद का चक्र बिगड़ गया है। इससे अनिंद्रा, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव की दिक्कत बढ़ रही है। ऐसे मरीज कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कालेज के मनोरोग विभाग में पहुंच रहे है।

    कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कालेज के मनोरोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. विवेक गुप्ता ने बताया कि पिछले कुछ साल में लैपटाप और मोबाइल पर लोगों की समय बढ़ रहा है। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को बाधित करती है।

    यह हार्मोन नींद के चक्र के नियंत्रित करता है। यदि यह चक्र अनियमित होता है तो व्यक्ति मानसिक रूप से असंतुलित महसूस करने लगता है। इस कारण डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी समस्याएं होने लगती है। उन्होंने बताया कि व्यक्ति की हर उम्र में नींद की आवश्यकता अलग-अलग होती है।

    छह से आठ घंटे गहरी नींद लेना जरूरी 

    डा. विवेक गुप्ता के अनुसार हर व्यक्ति को औसतन एक बार में छह से आठ घंटे गहरी नींद लेना जरूरी है। इस दौरान मेलाटोनिन और एंडोफिर्न जैसे हार्मोन स्रावित होते हैं जो सकारात्मक सोच, खुशी, ऊर्जा और शारीरिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। अत्याधिक स्क्रीन टाइम खासकर सोने से पहले मोबाइल का उपयोग इन हार्मोन्स स्राव को खत्म कर देता है। इसके चलते लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

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    रोजाना ओपीडी में 10 से 15 मरीज पहुंच रहे हैं। बच्चे और युवा ही नहीं 50 वर्ष तक की आयु के भी लोग चपेट में आ रहे हैं।

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    बुजुर्गों तक में रील देखने की लत

    पहले तो युवा मनोरंजन के लिए मोबाइल पर रील देखते हैं। बाद में इसकी लत लगती है तो मोबाइल का समय बढ़ता जाता है। यही लत दो घंटे तक पहुंचती है और आंख और दिमाग को प्रभावित करती है।

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    सोने से एक घंटे पहले बंद कर दें मोबाइल

    चिकित्सकों का कहना है कि सोने से एक घंटे पहले मोबाइल अन्य डिजिटल स्क्रीन को बंद कर दें। शांत वातावरण में नियमित समय सोने की आदत डालने की आदत से ही नींद बेहतर होगी। बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक संतुलन बना रहता है।

    • मोबाइल को कभी भी तकिए के नीचे या सिर के पास रखकर न सोएं।
    • सोने से पूर्व शांत और अंधेरे कमरे में जाएं।
    • अपने मोबाइल को कमरे से बाहर रखें या एयरप्लेन मोड में करें।
    • अपने मोबाइल को नियमित रूप से साफ भी करते रहें।