सिरदर्द की गोली खा रहे हैं? सावधान! आपकी ये पेनकिलर बैक्टीरिया को बना रही अमर, WHO की रिपोर्ट ने उड़ाए होश
जब आप बीमार होते हैं तो इस उम्मीद के साथ दवा लेते हैं कि जल्द ही हम अच्छा महसूस करेंगे। लेकिन जिस तरह बैक्टीरिया संक्रमण में ये दवाएं प्रभावहीन साबित ...और पढ़ें

दर्द निवारक बढ़ा रहे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस, WHO रिपोर्ट ने किया सावधान (Picture Credit- Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। एंटीबायोटिक्स दवाओं के असर से मुक्त खतरनाक किस्म के संक्रमण में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। विशेषज्ञों की मानें तो तेजी से बढ़ता एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस माडर्न मेडिसिन के भविष्य के लिए अब खतरा बन चुका है। भारत जैसे देशों में गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से दूर बड़ी आबादी के बीच दवा-रोधी संक्रमण का जोखिम कहीं अधिक है। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है कि दक्षिण और पूर्व एशिया में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस वैश्विक औसतन की तुलना में लगभग दोगुणा हो चुका है।
- 15 प्रतिशत हर वर्ष वृद्धि हो रही है एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस में (विश्व स्वास्थ्य संगठन की नई रिपोर्ट के अनुसार)
- 6 में से एक संक्रमण पर सामान्य एंटीबायोटिक्स बेअसर साबित हुई 2023 में, रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें मूत्रमार्ग संक्रमण (यूटीआइ), गोनोरिया और ई.कोलाई के इलाज में प्रयोग होने वाली दवाएं शामिल हैं।
- 10 लाख लोगों की हर वर्ष मौत होती है एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के चलते, वहीं हर साल 50 लाख मौतों के पीछे एक प्रमुख कारण एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस भी होता है।
- 3 में से एक संक्रमण एंटीबायोटिक्स के प्रति रेजिस्टेंट होता है दक्षिणपूर्व एशियाई और पूर्वी भूमध्यसागरीय देशों में, जो वैश्विक औसत से दोगुणा और यूरोप के मुकाबले तीन गुणा है।
कम आय वाले देशों के सामने गंभीर चुनौती
- कम और मध्यम आय वर्ग के देशों में रेजिस्टेंस की समस्या अपेक्षाकृत बहुत गंभीर है। इसका एक बड़ा कारण है कि इन देशों में स्वास्थ्य देखभाल का तंत्र कमजोर है, जिससे पहचान करने, बचाव और उपचार करने में काफी मुश्किलें आती हैं।
- 1.3 खरब डालर की कमी हो सकती है वैश्विक उत्पादन आउटपुट में 2050 तक एएमआर के चलते। इससे जहां इलाज के खर्च में वृद्धि होगी, वहीं लोगों की उत्पादकता में गिरावट भी आएगी।
- 3.9 करोड़ लोगों की मौत हो सकती है दवा-रोधी संक्रमण के चलते अगले 25 वर्षों में दुनियाभर में लांसेट के एक अध्ययन के मुताबिक ।
- 140 देश शामिल हो चुके हैं अब तक 2015 में लांच हुए डब्ल्यूएचओ के एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस सर्विलांस सिस्टम के साथ।
- 40 प्रतिशत प्रयोग में आने वाली कामन एंटीबायोटिक्स दवाएं संक्रमण के उपचार में निष्प्रभावी हो चुकी हैं।
बचाव का कारगर तरीका
- स्वच्छता की आदत बनाएं, ताकि संक्रमण के शिकार न बनें।
- जरूरत होने पर ही डाक्टर के परामर्श पर एंटीबायोटिक का प्रयोग करें
- डॉक्टर के परामर्श पर जरूरी टीकाकरण कराएं।
दर्द निवारक दवाएं भी जिम्मेदार!
एक रिपोर्ट की मानें तो दर्द निवारक दवाएं भी एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की वृद्धि का कारण बन सकती हैं। रिसर्च जर्नल एनपीजे के मुताबिक आइबुप्रोफेन और एसिटामिनोफेन ई.कोलाई में म्यूटेशन को बढ़ाते हैं। इससे आम बैक्टीरिया एंटीबायोटिक सिप्रोफ्लोक्सासिन के प्रति अधिक प्रतिरोधी हो जाते हैं। इस अध्ययन से स्पष्ट है कि कई सारी दवाओं के इस्तेमाल से जोखिम बढ़ता है। अधिक उम्र के लोगों को एक साथ दर्द, नींद या ब्लडप्रेशर के लिए दी जाने वाली दवाएं भी आंतों के बैक्टीरिया को एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधी बनाती हैं। ई. कोलाई से आंत और यूरिनरी ट्रैक्ट जैसे संक्रमण हो सकते हैं। ऐसी दशा में पतले दस्त हो सकते हैं जो कभी-कभी खूनी होते हैं, मतली, उल्टी, पेट दर्द और ऐंठन हो सकती है।
क्यों खतरनाक है एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस
बैक्टीरिया के दवारोधी होने की स्थिति में बीमार व्यक्ति के उपचार के विकल्प बहुत सीमित हो जाते हैं। इससे कई अन्य परेशानियां खड़ी हो सकती हैं जैसे :
- इससे बीमारी गंभीर होने, बार-बार संक्रमण या मौत का खतरा उत्पन्न हो जाता है।
- दवाओं के गंभीर तरह के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।
- लंबे समय तक हास्पिटल में भर्ती कराने की नौबत आ सकती है। उपचार काफी महंगा हो सकता है।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस होने के कारण
एंटीबायोटिक दवाओं का दुरुपयोग या आवश्यकता से अधिक प्रयोग l बैक्टीरिया के म्यूटेशन होने से दवाएं बेअसर हो जाती हैं l किसी अन्य व्यक्ति से ड्रग रेजिस्टेंट बैक्टीरिया का संक्रमण होने से।
एंटीबायोटिक दवा बीच में छोड़ने का प्रभाव
अगर डाक्टर एंटीबायोटिक दवा की खुराक और इसकी अवधि तय करते हैं, तो उनका यह निर्णय जांच रिपोर्ट पर आधारित होता है। अच्छा महसूस होने या लक्षण बेहतर होने का मतलब यह नहीं होता कि संक्रमण पूरी तरह ठीक हो गया है।