सिर्फ मूड का दुश्मन नहीं है 'स्ट्रेस', जानिए कैसे नर्वस सिस्टम के जरिए दिल तक पहुंचती है आफत
हम अक्सर मानसिक तनाव को केवल दिमाग से जुड़ी समस्या मान लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सीधे आपके दिल को भी नुकसान पहुंचा सकता है? वैज्ञानिकों क ...और पढ़ें

क्या मानसिक तनाव आपके दिल को बीमार बना रहा है? (Image Source: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर हम स्ट्रेस को यह सोचकर नजरअंदाज कर देते हैं कि यह बस 'मूड खराब' होने की बात है, लेकिन विज्ञान एक अलग ही कहानी बताता है। जी हां, मानसिक तनाव आपके शरीर के अंदर एक ऐसी खतरनाक चेन रिएक्शन शुरू करता है, जो सीधे आपके दिल पर हमला करता है।
एक स्टडी के हवाले से अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार का कहना है कि यह आपके दिमाग के एक हिस्से को 'ट्रिगर' करता है और वहां से शुरू होता है आपके नर्वस सिस्टम और दिल के बीच एक खतरनाक संवाद, जो आखिर दिल की गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है।

(Image Source: Freepik)
दिमाग में कैसे शुरू होता है तनाव?
जब हम तनाव में होते हैं, तो सबसे पहले हमारे दिमाग का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स हिस्सा उत्तेजित होता है। यह हिस्सा सक्रिय होकर हमारे लिम्बिक सिस्टम को सिग्नल भेजता है।
इसके बाद, लिम्बिक सिस्टम हमारे ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम को एक्टिव कर देता है। यह सिस्टम हमारे शरीर के अनैच्छिक कार्यों (जैसे सांस लेना और दिल की धड़कन) को नियंत्रित करता है।
Mental stress can be a trigger of cardiovascular events
— Dr Sudhir Kumar MD DM (@hyderabaddoctor) February 16, 2026
Stress stimulates the prefrontal cortex that in turn activates the limbic system with subsequent activation of the autonomic nervous system.
The autonomic nervous system then stimulates the heart, vessels, endocrine and… pic.twitter.com/Llc44MSK5F
शरीर पर क्या होता है इसका असर?
एक बार जब ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है, तो यह हमारे शरीर के कई प्रमुख हिस्सों को उत्तेजित करना शुरू कर देता है। इनमें हमारा दिल, रक्त वाहिकाएं, एंडोक्राइन सिस्टम और हमारा इम्यून सिस्टम शामिल हैं। इन सभी के बीच एक दोतरफा संचार शुरू हो जाता है, जो शरीर में कई बदलाव लाता है।
दिल और नसों को कैसे पहुंचता है नुकसान?
यह पूरी प्रक्रिया शरीर में कई नकारात्मक बदलाव लाती है, जो हार्ट हेल्थ के लिए खतरनाक हैं:
- धड़कन और ब्लड प्रेशर बढ़ना: तनाव की वजह से दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर दोनों बढ़ जाते हैं।
- नसों का सिकुड़ना: यह प्रक्रिया वैसोकॉन्स्ट्रिक्शन को बढ़ावा देती है, जिसका अर्थ है रक्त वाहिकाओं या नसों का सिकुड़ना।
- सूजन और मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी: तनाव शरीर में अंदरूनी सूजन और इम्यून सिस्टम की अति-सक्रियता पैदा करता है। साथ ही, यह मेटाबॉलिज्म से जुड़ी कई गड़बड़ियों को भी जन्म देता है।
- खून का गाढ़ा होना: यह प्लेटलेट्स के आपस में चिपकने की प्रक्रिया को बढ़ा देता है, जिससे खून के थक्के जमने का खतरा बढ़ सकता है।
ये सभी बदलाव- बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर, नसों का सिकुड़ना, सूजन और मेटाबॉलिक समस्याएं- मिलकर आखिर में हार्ट डिजीज के विकास का कारण बनते हैं। इसलिए, मानसिक तनाव को केवल एक विचार नहीं, बल्कि दिल की सेहत के लिए एक वास्तविक चेतावनी समझना चाहिए।