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एंटीबायोटिक फेल, तो काम आएगी कैंसर की दवा! निमोनिया के दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया का मिला हल

Published: Fri, 14 Aug 2026 08:43 AM (IST)

वैज्ञानिकों ने बैक्टीरिया के खिलाफ नया हथियार ढूंढ लिया है, अब कैंसर की दवा से भी हो सकेगा निमोनिया का इलाज।

कैंसर की दवा अब दवा-प्रतिरोधी जीवाणु से लड़ने में सक्षम (Image Source: AI Generated)

कैंसर की दवा अब दवा-प्रतिरोधी जीवाणु से लड़ने में सक्षम (Image Source: AI Generated)

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प्रेट्र, नई दिल्ली। बीते कुछ सालों से ऐसी खबरों की भरमार है कि अब जीवाणु दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर रहे हैं, यानी अब उन्होंने इन दवाओं के बीच रहना सीख लिया है। इसकी वजह से कई बीमारियों की दवाएं भी इलाज में बेअसर हो गई हैं, लेकिन अब इस साइंस ने इस चुनौती का भी हल ढूंढ लिया है। 

बता दें कि हाल ही में निमोनिया के खतरनाक बैक्टीरिया में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) जैसी समस्याओं से निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि दवा प्रतिरोधी निमोनिया पैदा करने वाले रोगाणुओं से भी लड़ा जा सकता है। 

कैंसर की दवा अब दवा-प्रतिरोधी जीवाणु से लड़ने में सक्षम 

राजीव गांधी सेंटर फार बायोटेक्नोलॉजी (आरजीसीबी) के विज्ञानियों ने इस बारे में जानकारी दी कि एफडीए द्वारा अनुमोदित कैंसर की एक दवा का उपयोग निमोनिया पैदा करने वाले और रोगाणुरोधी प्रतिरोध में योगदान देने वाले एक दवा-प्रतिरोधी जीवाणु से लड़ने के लिए किया जा सकता है। इस तरह यह नया शोध निमोनिया के मरीजों में नई आशा पैदा करता है।  

सोराफेनिब न्यूमोनिया में असरदार 

संस्थान ने बताया कि पहचानी गई दवा का नाम सोराफेनिब है, जो दुनिया भर में जीवाणु निमोनिया के प्रमुख कारणों में से एक, स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया से लड़ने में सहायक हो सकती है। अमेरिकन सोसाइटी फॉर माइक्रोबायोलॉजी के जर्नल एमबायो में प्रकाशित नतीजों से पता चलता है कि सोराफेनिब एक प्रमुख जीवाणु नियामक प्रोटीन को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय यानी खत्म कर देता है। इस शोध के बाद एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी संक्रमणों के उपचार के लिए एक संभावित नया दृष्टिकोण सामने खुलता है, जो हर साल दस लाख से ज्यादा मौतों के लिए जिम्मेदार हैं। 

एंटीमाइक्रोबियल थेरेपी के विकास में आ सकती है तेजी 

इसके बाद से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि ये नतीजे बैक्टीरिया के रेगुलेटरी एंजाइम को लक्षित करके अगली पीढ़ी की एंटीमाइक्रोबियल थेरेपी के विकास को तेज करने में भूमिका निभा सकते हैं। इससे रेस्पिरेटरी पैथोजन से लड़ने के लिए सिर्फ पारंपरिक एंटीबायोटिक्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा बल्कि एंटीबायोटिक-रेसिस्टेंट इन्फेक्शन के खिलाफ एक अहम हथियार भी मिल सकता है। इसी के साथ यह शोध इस बात पर भी ध्यान केंद्रित करता है कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस दुनिया की गंभीर पब्लिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है।

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