क्यों देर से होती है सर्वाइकल कैंसर की पहचान, डॉक्टर ने बताया साइलेंट किलर का सच
सर्वाइकल कैंसर एक 'साइलेंट किलर' है, जो शुरुआती चरणों में बिना लक्षणों के पनपता है। डॉ. सरिता कुमारी के अनुसार, जागरूकता की कमी और देर से पता चलने के ...और पढ़ें
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सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए डॉक्टर की सलाह और जागरूकता (Picture Credit- Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सर्वाइकल कैंसर उन चुनिंदा कैंसर में से एक है, जिसे अगर समय रहते पकड़ लिया जाए, तो इसे रोकना सबसे आसान होता है। इसके बावजूद, हर साल हजारों महिलाएं इस बीमारी के कारण अपनी जान गंवा देती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह लोगों में जागरूकता की कमी है।
इसलिए लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के मकसद से हर साल जनवरी महीने में सर्वाइकल अवेयरनेस मंथ मनाया जाता है। इस बीमारी के बढ़ने की एक वजह एक खतरनाक मिथक भी है। अधिकतर महिलाएं सोचती हैं कि "मुझे कोई तकलीफ नहीं है, इसलिए मुझे कोई खतरा भी नहीं है।"
क्या कहते हैं डॉक्टर?
हालांकि, सच्चाई इससे काफी अलग है। इस बारे में जानने के लिए मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, द्वारका में गाइने सर्जिकल ऑन्कोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट और यूनिट हेड डॉ. सरिता कुमारी से बात की। डॉक्टर बताती हैं कि असल में सर्वाइकल कैंसर एक 'साइलेंट किलर' है। ऐसा इसलिए क्योंकि शुरुआती चरणों में यह चुपचाप शरीर में पनपता है और कोई चेतावनी भी नहीं देता।
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(Picture Credit- AI Generated)
शुरुआत में क्यों नहीं चलता पता?
इस बीमारी के शुरुआती दौर में अक्सर महिलाओं को न तो दर्द होता है और न ही कोई असुविधा महसूस होती है। वे पूरी तरह स्वस्थ महसूस करती हैं और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जीती रहती हैं। उन्हें अंदाजा भी नहीं होता कि शरीर के अंदर असामान्य सेल्स धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। इसके कुछ खतरनाक लक्षणों में असामान्य ब्लीडिंग, डिस्चार्ज में दुर्गंध या पेल्विक पेन शामिल हैं, जो तब सामने आते हैं जब बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच जाती है और तब तक इलाज मुश्किल हो जाता है।
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HPV और जांच की भूमिका
ज्यादातर मामलों में सर्वाइकल कैंसर के पीछे 'ह्यूमन पैपिलोमावायरस' (HPV) जिम्मेदार होता है। यह सेक्शुअल एक्टिविटी से फैलने वाला एक बेहद सामान्य वायरस है। सबसे डराने वाली बात यह है कि HPV संक्रमण के खुद के कोई लक्षण नहीं होते। यही वजह है कि स्क्रीनिंग (जांच) इतनी जरूरी है। 'पैप स्मीयर' (Pap Smear) या 'HPV टेस्ट' जैसी सामान्य जांचों के जरिए डॉक्टर कैंसर बनने से सालों पहले ही शरीर में हो रहे बदलावों (Pre-cancerous changes) को पकड़ सकते हैं और बीमारी को रोक सकते हैं।
जागरूकता की कमी भी है वजह
हमारे देश में शर्म, डर और जागरूकता की कमी के कारण अक्सर महिलाएं डॉक्टर के पास जाने से कतराती हैं। ऐसे में अक्सर कैंसर का पता तब चलता है, जब वह काफी बढ़ चुका होता है। डॉक्टर कहती हैं यह स्थिति दुखद है, क्योंकि अगर पहली स्टेज में इसका पता चल जाए, तो इलाज पूरी तरह संभव है।
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(Picture Credit- AI Generated)
ऐसे करें अपना बचाव
डॉक्टर आगे बताती हैं कि खामोशी को सुरक्षा न समझें। सिर्फ इसलिए जांच न कराना क्योंकि आपको लगता है कि "मुझे कोई लक्षण नहीं दिख रहे", एक बड़ी गलती हो सकती है। सर्वाइकल कैंसर से बचने का रास्ता बीमारी के इलाज से नहीं, बल्कि जागरूकता से शुरू होता है। इसलिए निम्न बातों का ध्यान रखें-
- नियमित जांच कराएं।
- HPV वैक्सीन लगवाएं।
- शरीर के किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें।