वायु प्रदूषण और कैंसर का सीधा कनेक्शन: पीएम 2.5 से बचकर टाला जा सकता है फेफड़ों के कैंसर का खतरा
प्रदूषण के चलते बढ़ रहा फेफड़ों का कैंसर आने वाले समय की एक बड़ी चिंता है।

पीएम 2.5 से बचाव कम करेगा फेफड़ों के कैंसर का जोखिम (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रेट्र, नई दिल्ली। इन दिनों लगातार बढ़ता प्रदूषण खतरे की घंटी ही है क्योंकि अब यह पर्यावरण के लिए ही नहीं बल्कि हमारी सेहत के लिए भी उतना ही भारी पड़ रहा है। हम सभी जानते हैं कि वायु प्रदूषण सेहत के लिए कितना नुकसानदायक है, खासकर कि जब बात फेफड़ों की स्वास्थ्य की हो तो इसे और भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इसे लेकर हाल ही में आई स्टडी भी इसी ओर इशारा कर रही है।
पीएम 2.5 से बचाव कम करेगा फेफड़ों के कैंसर का जोखिम
वायु प्रदूषण शरीर के लगभग हर अंग प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसी के मद्देनजर शोधकर्ताओं ने सामान्य वायु प्रदूषकों के लंबे समय तक संपर्क में आने के साथ वैश्विक कैंसर के बढ़ते जोखिम का विश्लेषण किया। नेचुरल हेल्थ में प्रकाशित इन नतीजों में यह बात सामने आई कि इसमें पीएम 2.5 मुख्य रूप से जिम्मेदार है। शोधकर्ताओं ने इसकी रोकथाम के लिए कहा कि अगर लोगों को पीएम 2.5 के संपर्क में आने से बचाया जाए तो 17.9 प्रतिशत ट्रैकेल, ब्रोंकियल और फेफड़ों के कैंसर के मामलों को रोका जा सकता है।
88.2 लाख कैंसर के मामलों के लिए पीएम 2.5 जिम्मेदार
शोधकर्ताओं ने बताया कि साल 2000 से 2020 के बीच पहचाने गए कैंसर के कुल 10. 9 करोड़ मामलों में से 88.2 लाख मामले 2.5 माइक्रोन या 0.0025 मिलीमीटर से छोटे कण (पीएम2.5) के संपर्क के कारण हुए। चीन के विज्ञान अकादमी सहित शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि वैश्विक स्तर पर पीएम 2.5, ओजोन और नाइट्रस आक्साइड के स्तर में प्रत्येक 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की वृद्धि कैंसर के जोखिम को क्रमशः 16 प्रतिशत, 4.23 प्रतिशत और 11.7 प्रतिशत बढ़ाने से संबंधित थी।
महिलाएं जानलेवा बीमारियों के लिए ज्यादा संवेदनशील
यह रिपोर्ट महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर भी बड़ा खुलासा करती है। इसके मुताबिक, महिलाओं को ज्यादातर घातक बीमारियों के लिए लगातार अधिक संवेदनशील पाया गया। शोधकर्ताओं ने कहा कि लगभग पूरी वैश्विक जनसंख्या यानी लगभग 99 प्रतिशत लोग ऐसी हवा में सांस लेते हैं जिसमें प्रदूषक स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के वायु गुणवत्ता दिशानिर्देशों से कहीं ज्यादा हैं। इसमें भी हैरान करने वाली बात यह कि राजधानी दिल्ली इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल है।
