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    सावधान! जिस ओमेगा-3 सप्लीमेंट को समझ रहे थे 'ब्रेन बूस्टर', वह निकला बेअसर? नई स्टडी बड़ा खुलासा

    Updated: Sun, 26 Jul 2026 08:00 AM (IST)

    अगर आप भी याददाश्त अच्छी करने के लिए ओमेगा-3 सप्लीमेंट लेते हैं तो यह रिपोर्ट आपको निराश कर सकती है। ...और पढ़ें

    ओमेगा-3 सप्लीमेंट से कोई खास फायदा नहीं (Image Source: AI Generated)

    ओमेगा-3 सप्लीमेंट से कोई खास फायदा नहीं (Image Source: AI Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हमने अक्सर यह सुना है कि दिमाग की सेहत के लिए ओमेगा-3 फैटी एसिड एक जरूरी पोषक तत्व है जो दिमाग की कोशिकाएं बनाने, कोशिका की दीवारों को लचीला रखने और न्यूरान्स को नए कनेक्शन बनाने और दूसरी कोशिकाओं से बातचीत करने में मदद करते हैं। यही वजह है कि इसे डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। पर क्या हो अगर हम कहें कि ओमेगा-3 फैटी एसिड से दिमाग को कोई फायदा नहीं होता? यह बात मन में बहुत से सवाल खड़े करती है लेकिन हाल ही की एक स्टडी यही संकेत कर रही है। 

    ओमेगा-3 सप्लीमेंट से कोई खास फायदा नहीं

    वैसे तो कई शोध से पता चला है कि जिन लोगों के खून में ओमेगा-3 का स्तर अधिक होता है, उनकी सोचने-समझने की क्षमता बेहतर होती है और दिमाग अधिक स्वस्थ दिखता है। साथ ही, उन्हें डिमेंशिया का खतरा भी कम होता है। इसके उलट, जान लेने वाली बात यह है कि अल्जाइमर से पीड़ित लोगों में ओमेगा-3 का लेवल कम पाया गया है। लेकिन हाल ही में किया गया एक शोध इन बातों के एकदम उलट इशारा कर रहा है। दरअसल, ज्यादातर क्लिनिकल ट्रायल्स में यह पाया गया है कि ओमेगा-3 सप्लीमेंट्स से सोचने-समझने की क्षमता या डिमेंशिया के लक्षणों में लगभग कोई फायदा नहीं होता है।

    प्रोफेसर डा. क्रिस्टीन याफे ने कहा, "यह बात सहज रूप से समझ में आती है कि न्यूरान्स की सेहत के लिए फैटी एसिड की जरूरत होती है। समस्या यह है कि ज्यादातर सबूत, खासकर ट्रायल के सबूत, इस बात का बिल्कुल भी समर्थन नहीं करते हैं।" पिछले महीने प्रकाशित हुआ एक शोध इसका बेहतरीन उदाहरण है। 

    आधे लोगों में अल्जाइमर का जेनेटिक रिस्क

    क्लिनिकल ट्रायल करने वाले विज्ञानियों ने हर पहलू का ध्यान रखने की कोशिश की। इसमें शामिल लोग ज्यादा उम्र के थे और अधिक मछली नहीं खाते थे (जिसमें ओमेगा-3 भरपूर मात्रा में होता है), जिससे पता चलता है कि उन्हें सप्लीमेंट से सबसे अधिक फायदा हो सकता था। लगभग आधे लोगों में अल्जाइमर का जेनेटिक रिस्क अधिक था। यह ऐसा ग्रुप था, जिसके बारे में विशेषज्ञों का मानना था कि उन्हें अधिक ओमेगा-3 की जरूरत हो सकती है। शोधकर्ताओं ने कुछ लोगों का लंबर पंचर भी किया ताकि यह पक्का किया जा सके कि सप्लीमेंट से दिमाग में ओमेगा-3 का लेवल बढ़ा है।

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