सर्दी में पैरों की उंगलियां पड़ रही हैं काली या हो रही झनझनाहट? तो हो जाएं सावधान, हो सकती है गंभीर समस्या
ठंडी हवा और रुखेपन के कारण पैरों से जुड़ी अनेक परेशानियां होती हैं । जो मधुमेह से ग्रसित हैं या ...और पढ़ें

सर्दियों में रखें पैरों का खास ख्याल (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। डॉ. के.के. पाण्डेय (वैस्कुलर व एंडोवैस्कुलर, सर्जन, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली) के अनुसार सर्दी के मौसम में पौष्टिक भोजन के ढेर सारे विकल्प हमारे सामने होते हैं। साग-सब्जियों और फलों की भरमार रहती है, पर यह मौसम अनेक चुनौतियां भी लेकर आता है। अगर मधुमेह ग्रस्त हैं या धूमपान की आदत है तो इन दिनों पैरों से जुड़ी समस्या होने की आशंका रहती है। पैरों की अंगुलियों के काली पड़ने या पैरों में लाल धब्बे या झनझनाहट होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
मधुमेह है तो क्या करें?
डायबिटीज के मरीजों के पंजों और टांगों की खून की नलियों में निरंतर चर्बी जमा होने के कारण शुद्ध खून की सप्लाई अपेक्षाकृत कम हो जाती है। सर्दी के दिनों में यह समस्या अधिक बढ़ने की आशंका होती है। आवश्यक सावधानी न बरतने पर पैरों की अंगुलियां काली पड़ जाती हैं। यदि आप डायबिटीज से ग्रसित हैं तो पैरों को सूखा और साफ रखने का प्रयास करना चाहिए।
क्यों होती है झनझनाहट?
अगर आप हुक्का, तंबाकू या धूमपान करते हैं तो ठंड के दिनों में पैरों की अंगुलियों के काली पड़ने की आशंका रहती है। वहीं कुछ लोगों के पैरों में लाल धब्बे पड़ने या झनझनाहट होने की आशंका होती है। इससे असहनीय दर्द भी हो सकता है। दरअसल, ऐसे लोगों के पैरों की खून की नलियों में सिकुड़न हो जाती है। सर्द हवाओं के कारण रक्त सप्लाई भी अवरुद्ध हो जाती है। कई बार यह समस्या अंगुलियों में गैंगरीन और घाव का भी रूप ले लेती है।
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(Picture Courtesy: Freepik)
वैस्कुलाइटिस है तो क्या करें?
वैस्कुलाइटिस यानी खून की नलियों के दीवारों की सूजन से ग्रस्त मरीजों के लिए यह मौसम दर्द भरा हो सकता है। उनके पैरों की खून की नलियों में अक्सर खून का जमाव हो जाता है जिससे शुद्ध रक्त का प्रवाह पूरी तरह बंद भी हो जाता है। इससे पैरों की अंगुलियों के खोने की आशंका बढ़ जाती है। इन समस्याओं से बचाव के लिए दवाइयों के साथ सर्दी में पैरों को बचाने का प्रयास करना चाहिए।
रेनाड्स रोग से ग्रस्त महिलाएं
यह खून की नलियों के अत्यधिक संवेदनशीलता से जुड़ा हुआ रोग है। पैरों में सर्दी लगते ही रक्त नलियां सिकुड़ने लगती हैं और खून का प्रवाह इससे अस्थायी रूम से बाधित हो जाता है। अगर यह बार-बार होने लगे तो पैरों की अंगुलियों में नीलापन और लाली बढ़ जाती है। अंततः यह घाव में भी परिवर्तित हो सकता है। इस समस्या को दवाइयों के साथ खानपान की सतर्कता के साथ दूर किया जा सकता है। इसके लिए चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।
इन बातों का रहे ध्यान
- नंगे पैर जमीन पर चलने से बचें, ओस आच्छादित घास पर टहलने से परहेज करें।
- हमेशा अपने पैरों को सूती या ऊनी मोजों से ढककर रखें।
- बिजली के हीटर से या गर्म पानी की बोतल से पैरों की सिंकाई न करें।
- धूप निकलने पर ही पांच से छह किलोमीटर की सैर करें।
- तंबाकू या धूमपान का सेवन बिल्कुल बंद कर देना चाहिए।
- अगर दर्द असहनीय हो रहा हो और पैरों में काला रंग या काली पपड़ी दिखे तो अनुभवी वैस्कुलर सर्जन से सलाह अवश्य लें।
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