ना थकान रहेगी ना बिगड़ेंगे हॉर्मोन! थायरॉइड के मरीजों के लिए रामबाण हैं ये 3 आसान योगासन
अगर आप थायरॉइड की वजह से वजन बढ़ने या घटने की समस्या से परेशान हैं तो इन योगासन को शामिल कर सकते हैं।

थायरॉइड के लिए बेस्ट योगासन (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मॉडर्न लाइफस्टाइल के चलते बिगड़ते खानपान, खराब रहन-सहन और तनाव ने थायरॉइड पर सबसे बुरा प्रभाव डाला है। तितली के आकार का यह छोटा सा ग्लैंड हॉर्मोन को कुछ इस तरह कंट्रोल करता है कि जरा भी गड़बड़ होने पर शरीर का वजन एकदम से बढ़ने और घटने लगता है। वहीं, थकान, मूड स्विंग्स और हेयर फॉल जैसी बहुत सी समस्याएं भी शरीर को घेर लेती हैं।
अगर अपका भी थायरॉइड संतुलित नहीं रहता तो इन्हें कई योगासन ऐसे हैं जिनकी मदद से इसे फिर से ठीक किया जा सकता है। आइए इनपर एक नजर डालें:
हलासन
इसे हलासन इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसे करते समय शरीर की शेप बिल्कुल हल की तरह लगती है। यह आसन गले के एरिया पर प्रेशर डालकर थायरॉइड ग्लैंड को एक्टिव करने में मदद करता है।
कैसे करें?
सबसे पहले एक मैट बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं।
इस दौरान दोनों हाथ शरीर के बगल में जमीन पर होने चाहिए।
सांस लेते हुए पैरों को ऊपर उठाना है फिर पैरों को सिर के पीछे ले जाएं।
कोशिश करें कि पंजे पीछे की तरफ जमीन पर लगें।
इस स्थिति में अपनी शारीरिक क्षमता के हिसाब से रुकते हुए फिर से पुरानी पोजिशन में आएं।
मत्स्यासन
मत्स्यासन को फिश पोज भी कहते हैं, जिसे थायरॉइड के लिए बहुत ही असरदार आसन माना जाता है। इसमें गर्दन और गले की मांसपेशियों में खिंचाव होता है, जिससे ब्लड सप्लाई बढ़ती है।
कैसे करें?
पीठ के बल लेटकर पद्मासन की मुद्रा में आ जाएं।
अब हाथों को कूल्हों पर रखते हुए कोहनी फर्श पर टिका लें।
इसके बाद सांस लेते हुए चेस्ट और सिर को ऊपर की तरफ उठा लेना है।
ध्यान रहे कि इसमें पीठ को धनुष की तरह मोड़ लेना है।
भुजंगासन
भुजंगासन जिसे कोबरा पोज कहते हैं, थायरॉइड ग्रन्थि में ब्लड सप्लाई बढ़ाने में मदद करता है। इसे नियमित रूप से करने से हॉर्मोन्स संतुलित रहते हैं और शरीर में लचीलापन बना रहता है।
कैसे करें?
पेट के बल लेटकर दोनों कंधों के पास अपनी हथेलियां जमीन पर रखें।
अब लंबी सांस लेते हुए अपनी चेस्ट को ऊपर की तरफ उठाना है।
इस दौरान गर्दन पीछे की तरफ झुकी होनी चाहिए।
कुछ सेकंड इस पोजिशन में रुकना है।
इसके बाद सांस छोड़ते हुए फिर से उसी पोजिशन में लौट आना है।
