उम्र बढ़ी तो क्या हुआ, भाषा समझने में युवाओं से कम नहीं बुजुर्ग! ब्रेन स्कैन की मदद से साइंस ने खोजी अनोखी बात
हाल ही की स्टडी पुरानी धारणा को चुनौती देती है कि बुजुर्गों का दिमाग युवाओं के मुकाबले कमजोर होता है।

बुजुर्गों और युवाओं में भाषा समझने की गतिविधि एक जैसी (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली, प्रेट्र। लोगों में आम धारणा यह है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है याददाश्त कमजोर होने लगती है और दिमाग भी उतनी गति से काम नहीं कर पाता जितना युवावस्था में करता है। आपको जानकार हैरानी होगी कि हाल ही की एक स्टडी इस बारे में कुछ अलग खुलासा कर रही है, इसके मुताबिक बुजुर्गों और युवाओं का दिमाग भाषा समझने और उसको प्रोसेस करने के मामले में एक बराबर काम करता है।
बुजुर्गों और युवाओं में भाषा समझने की गतिविधि एक जैसी
इस नए अध्ययन के अनुसार बुजुर्गों में भाषा से जुड़े दिमाग के हिस्से की गतिविधि वैसी ही हो सकती है जैसी युवाओं में होती है, भले ही फैसला लेने से जुड़े दिमाग के सिस्टम की गतिविधि दोनों उम्र के लोगों में अलग-अलग हो सकती है। बताते चलें कि यह जानकारी नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में छपे एक शोध में हाल ही में सामने आई है।
वर्किंग मेमोरी और प्राब्लम-साल्विंग में होते हैं बदलाव
इसमें पता चला है कि भाषा को प्रोसेस करने वाले दिमाग के खास हिस्सों पर उम्र बढ़ने का असर दिमाग के दूसरे हिस्सों की तुलना में काफी कम होता है। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी और बोस्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का इस बारे में कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ कॉग्निटिव फंक्शन यानी सोचने-समझने की क्षमता कम होने लगती है, पिछले शोध के ब्रेन स्कैन से पता चला है कि वर्किंग मेमोरी (याददाश्त) और प्रॉब्लम-साल्विंग स्किल्स (चीजों को सुलझाने की क्षमता) से जुड़े ब्रेन नेटवर्क के काम करने के तरीके में बदलाव आते हैं।
उम्र बढ़ने पर स्थिर रहती हैं भाषा से जुड़ी क्षमताएं
मुख्य शोधकर्ता ऐनी बिलाट ने कहा, "यह बात अच्छी तरह से पता है कि उम्र बढ़ने के साथ एग्जीक्यूटिव फंक्शन, जैसे ध्यान देना, वर्किंग मेमोरी और काग्निटिव कंट्रोल, कम होने लगते हैं। इसी के साथ यह भी पता है कि इन सबके उलट, भाषा से जुड़ी क्षमताएं आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ काफी स्थिर बनी रहती हैं या फिर कई मामलों में देखा जाए तो उनमें सुधार भी देखने को मिलता है।" उन्होंने कहा, "हेल्दी एजिंग (उम्र बढ़ने की सामान्य प्रक्रिया) में ये दोनों तरह के फंक्शन असल में उलटी दिशा में जाते हैं। इस तरह कहा जा सकता है कि व्यवहार के मामले में यह बात काफी हद तक साबित हो चुकी है।
