नामी ब्रांड्स भी नहीं हैं सुरक्षित! बेबी फूड में मिले हानिकारक तत्व, क्वालिटी टेस्ट की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
महाराष्ट्र FDA कमिश्नर ने बच्चों के पोषण और बेबी फूड प्रोडक्ट्स पर कड़ी निगरानी रखने का फैसला किया है।
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बेबी प्रोडक्ट्स की सुरक्षा में लापरवाही खतरनाक (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। छोटे बच्चों के लिए बाजार में मिलने वाला खाने को कंपनियां काफी पौष्टिक बताकर बेचती हैं और माता-पिता उन पर भरोसा करके अपने बच्चों के लिए वही बेबी फूड खरीदते भी हैं। लेकिन क्या आपने सोचा है कि इस आकर्षक पैकेजिंग और विटामिन-मिनरल्स के दावों के बीच असल में आपके बच्चे की थाली में क्या जा रहा है?
ये मुद्दा अब चर्चा में आ गया है, क्योंकि महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने साफ किया है कि बच्चों के पोषण और बेबी फूड से जुड़े प्रोडक्ट्स अब फूड रेगुलेटर्स की खास निगरानी में रहेंगे। ये फैसले एक सरकारी डेटा को देखते हुए लिया गया है, जिसमें बच्चों के कई प्रोडक्ट्स तय मानकों पर पूरी तरह खरे नहीं उतरे हैं।
जांच में क्या सामने आया?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) लगातार इन प्रोडक्ट्स की जांच कर रहा है। साल 2024-25 में बच्चों के लिए मिल्क फॉर्मूला और बेबी फूड के 522 सैंपल्स की जांच की गई थी, जिसमें 45 प्रोडक्ट्स तय मानकों पर खरे नहीं उतरे।
इनमें 5 सैंपल असुरक्षित पाए गए, 18 सब-स्टैंडर्ड यानी खराब गुणवत्ता के थे और 22 सैंपल्स में गलत लेबलिंग और भ्रामक दावे मिले।
इसके पहले के सालों में भी बेबी प्रोडक्ट्स के सैंपल में ऐसी खामियां देखने को मिली हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि बाजार में कड़े नियमों की जरूरत है, ताकि बच्चों की सेहत से किसी तरह का खिलवाड़ न हो सके।
सावधानी है जरूरी
नवजात बच्चे सबसे संवेदनशील होते हैं। इसलिए उनके खाने में किसी भी तरह की गड़बड़ी खतरनाक रिस्क पैदा कर सकती है। इसके बावजूद बेबी प्रोडक्ट्स की जांच में भ्रामक लेबलिंग, माइक्रोबियल कंटैमिनेशन, पेस्टिसाइड्स, हैवी मेटल, पोषक तत्वों की गलत जानकारी जैसी समस्याएं सामने आती रहती हैं। इसलिए कोई नामी ब्रांड होना भी अब सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं देता।
एक्सपायर्ड खाना और चीनी का खेल
हाल ही में बेगलुरु में एक कंपनी पर कार्रवाई के दौरान 3.7 मेट्रिक टन एक्सपायर हो चुका बेबी फूड जब्त हुआ, जिसे कोर्ट के आदेश से नष्ट किया गया। बच्चों के खाने के मामले में यूं एक्सपायरी डेट निकल जाना बहुत गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। इसके अलावा, खाने में एक्स्ट्रा चीनी की ज्यादा मात्रा और पोषण से जुड़ी गलत जानकारी भी चिंता का विषय है।
आगे का रास्ता क्या होना चाहिए?
अमेरिका जैसे देशों में जब किसी प्रोडक्ट में खराबी पाई जाती है, तो सार्वजनिक नोटिस जारी करके प्रोडक्ट का लॉट नंबर और एक्सपायरी डेट बताकर लोगों को सतर्क किया जाता है। भारत को भी ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, ताकि बच्चों की सेहत के साथ किसी भी तरह का समझौता करने से पहले कंपनियां सौ बार सोचें।
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