थकान, बालों का झड़ना और मुंहासे... शरीर में होने वाले इन बदलावों को ना लें हल्के में; PMOS हो सकती है वजह
अनियमित माहवारी, इनफर्टिलिटी और मां बनने में आ रही दिक्कतों के पीछे एक आम कारण हो सकता है- पीसीओएस (अब पीएमओएस कहा जाता है)।

पीसीओएस के लक्षण समझना जरूरी (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हर दिन एक नए मुंहासे, दर्द देने वाले ऐक्ने, चेहरे पर अत्यधिक बाल, सिर के बालों का पतला होना आदि, अगर ऐसे बदलाव आपके जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं, तो इसे हल्के में लेने से आगे चलकर बड़ी मुसीबत हो सकती है।
अगर खानपान अच्छा होने के बाद भी वजन तेजी से बढ़ रहा है या आपको हर समय थकान महसूस होती है, तो संभव है कि ये पीएमओएस के लक्षण हों। कुछ समय पहले तक यह माना जाता था कि अगर गर्भधारण में कठिनाई आ रही है, तो इसे पीसीओडी यानी ओवरी में सिस्ट के कारण हो सकता है।
अब विशेषज्ञों ने इसे पीसीओडी के अलावा पीएमओएस का लक्षण माना है। दरअसल, उक्त समस्याओं को पीएमओएस नाम की एक छतरी के नीचे रखकर देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इससे महिलाओं की सेहत को प्रजनन स्वास्थ्य से आगे एक वृहत परिप्रेक्ष्य में समझने में मदद मिल सकती है।
क्या है पीएमओएस?
पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीएमओएस) एक अधिक जटिल हार्मोनल और मेटाबालिज्म संबंधी विकार है। इसमें एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का उच्च स्तर, इंसुलिन प्रतिरोध और अनियमित ओव्यूलेशन की समस्या से जुड़े लक्षणों का अध्ययन किया जाता है।
अगर ये लक्षण अधिक बढ़ जाएं व इनका उचित समय पर उपचार न किया जाए तो यही टाइप-2 डायबिटीज, दिल की बीमारियों व प्रजनन से जुड़े जोखिम को सामने लाता है। बता दें कि ज्यादातर महिलाएं पीएमओएस के लक्षणों से अनभिज्ञ रहती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो दुनिया भर में पीएमओएस से पीड़ित 70 प्रतिशत महिलाएं इसके लक्षणों को समझ नहीं पातीं या अनजाने में ही अनदेखा कर देती हैं।
पीएमओएस शरीर के कई हार्मोंस को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण न केवल ओवरी में सिस्ट की आशंका रहती है, बल्कि यह शरीर के हार्मोन तंत्र व मेटाबोलिज्म पर प्रभाव डालता है। साथ ही इससे छोटी बच्चियों की समस्याओं को समझने में मदद मिल सकती है। पीसीओएस को पीएमओएस नाम देने से बच्चियों को समय पर माहवारी न होना, कम या अत्यधिक होना, एक्ने, चेहरे या शरीर पर बालों की बढ़ोत्तरी आदि को अधिक बेहतर तरीके से देखा जा सकता है।
कारणों को जानें
पीएमओएस कई कारकों का संयोजन होता है। इसका मुख्य कारण है हार्मोन में असंतुलन। उदाहरण के लिए एंड्रोजन में वृद्धि या अन्य हार्मोनल असंतुलन के कारण चेहरे या शरीर के अत्यधिक बाल उगना, मुंहासे, सिर के बालों का पतला होना और अनियमित ओव्यूलेशन जैसी समस्याएं पीएमओएस के कारण हो सकती हैं।
इससे पीड़ित महिलाओं में इंसुलिन प्रतिरोध या इंसुलिन संवेदनशीलता अधिक देखी जाती है। इसके कारण शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया कर पाती हैं। शरीर इसकी भरपाई के लिए अधिक इंसुलिन का उत्पादन करता है।
इसका समय पर उपचार न हो तो डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। इस कारण ओवरी की गतिविधि भी प्रभावित हो सकती है। इसी तरह यदि परिवार में कोई पहले भी पीएमओएस या पीसीओएस से पीड़ित रहा है, तो उन्हें पीएमओएस का जोखिम बना रहता है। इन दिनों जिस प्रकार से जीवनशैली अनियमित हो गयी है। यह भी पीएमओएस का बड़ा कारण बनकर उभरा है।
पीसीओएस/पीएमओएस के लक्षण
- मासिक धर्म की अनियमितता, चक्र में देरी या कम या अत्यधिक रक्तस्राव होना।
- वजन बढ़ना, पेट के आसपास चर्बी बढ़ना।
- जबड़े, ठोड़ी और गालों के आसपास मुंहासे होना।
- एंड्रोजन का स्तर बढ़ने से चेहरे, छाती या शरीर पर बालों की वृद्धि।
- सिर के बालों का झड़ना या पतला होना।
- लगातार थकान व कमजोरी
- मनोदशा में बदलाव, तनाव, आत्मविश्वास कम होना आदि।
इन बीमारियों का बढ़ता है खतरा
- गर्भावस्था में डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर
- पेट के आसपास चर्बी बढ़ना व मोटापा
- टाइप 2 डायबिटीज
- हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन)
- हाई कोलेस्ट्राल
- कार्डियोवैस्कुलर डिजीज
- स्लीप एप्निया
- मेटाबोलिक स्टीटोहेपेटाइटिस
- गर्भाशय की आंतरिक परत में असामान्य वृद्धि या कैंसर आदि।
मानसिक सेहत का रहे ध्यान
पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को इन्फर्टिलिटी, मोटापा व चेहरे पर अनचाहे बालों, मुहांसों आदि के कारण एंजाइटी का सामना करना पड़ सकता है। प्रजनन स्वास्थ्य खराब रहने और सौंदर्य संबंधी समस्याओं के कारण वे समाज का सामना करने से बचती हैं।
परिवार में भी भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यह जरूरी है कि यदि वे पीसीओएस से जूझ रही हैं तो मानसिक सेहत का ध्यान रखें। तनाव प्रबंधन के लिए विशेषज्ञों से परामर्श लें।
पीएमओएस का प्रबंधन: जीवनशैली में जरूरी बदलाव
- कुल कैलोरी में अधिक फाइबर, कांप्लेक्स कार्ब की मात्रा बढ़ा दें। इससे इंसुलिन असंतुलन बेहतर होगा।
- मीठा और प्रोसेस्ड फूड कम करके हरी पत्तेदार सब्जियां व मौसमी फल खाएं।
- हरी सब्जियां और फल खाएं।
- कसरत के लिए रोजाना 30-45 मिनट समय निकालें। इससे वजन और हार्मोन नियंत्रण में रह सकते हैं।
- तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन, योग के साथ अच्छी नींद जरूरी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार,
- विश्व स्तर पर महिलाओं में ओव्यूलेशन न होने व इनफर्टिलिटी का सबसे आम कारण है पीसीओएस।
- पीसीओएस एक दीर्घकालिक मेटाबोलिज्म संबंधी स्थिति है, जो प्रजनन आयु के बाद भी बनी रहती है।
- पीसीओएस एक दीर्घकालिक हार्मोनल स्थिति है जो अनुमानित 8-13% महिलाओं को प्रभावित करती है।
मिसकैरिज का खतरा
जर्नल आफ एंडोक्राइनोलाजी एंड मेटाबोलिज्म में प्रकाशित शोध के अनुसार, पीएमओएस अधिक बढ़ जाए या हार्मोन असंतुलन अधिक होने पर दिल की बीमारियां, इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा 68 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। अगर इस समस्या का निदान न किया जाए तो मिसकैरिज की आशंका बनी रहती है।
छोटी उम्र से दें ध्यान
पीसीओएस किशोरावस्था में शुरू हो सकता है, पर आमतौर पर गर्भधारण करने में कठिनाई होती है तो महिलाएं इस पर ध्यान देती हैं। छोटी उम्र से इसके लक्षणों पर ध्यान दें। प्राइमरी एमेनोरिया यानी पीरियड न आए तो तुरंत चिकित्सक से मिलें। पीरियड शुरू होने पर बंद हो जाना, देरी से आना या अधिक आने जैसे किसी भी लक्षण को हल्के में न लें। हर स्त्री में पीएमओए के अलग लक्षण के कारण इसका पता करना एक चुनौती है। आपके ओवरी में सिस्ट है तो गर्भधारण नहीं कर सकतीं, ऐसा न सोचें। ओव्यूलेशन ट्रैकिंग, जीवनशैली में बदलाव व उचित चिकित्सकीय परामर्श से गर्भधारण संभव है। ध्यान रहे कि पीएमओएस पूरी तरह ठीक नहीं हो सकता लेकिन उचित समय पर निदान व उपचार से इसके लक्षणों को नियंत्रित करना कठिन नहीं है।
डॉ. मधु गोयल, स्त्री रोग विशेषज्ञ, वरिष्ठ स्त्रीरोग विषेषज्ञ, फोर्टिस लाफेम, नई दिल्ली
वजन पर रहे नियंत्रण
पीएमओएस से पीड़ित होने के बाद भी महिलाएं वर्षों तक इससे जूझती रहती हैं। दरअसल, इसके लक्षण धीरे धीरे विकसित होते हैं। यदि आपने ध्यान नहीं दिया तो यह प्रजनन स्वास्थ्य से लेकर हृदयरोग, टाइप-2 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियां दे सकता है। इसका कारण आनुवंशिक भी हो सकता है पर उसपर आपका नियंत्रण नहीं है। जो आपके हाथ में है वह है आप रोजमर्रा के जीवन में अपना ध्यान कैसे रखती हैं। खानपान कैसा है, नींद का पैटर्न कैसा है, कितना सक्रिय रहती हैं? आदि। बेहतर होगा आप वजन पर नियंत्रण रखें। यदि आप आठ से दस प्रतिशत भी वजन घटा लेती हैँ तो यह लक्षणों को नियंत्रित कर सकता है। कई बार यह रिवर्स भी हो सकता है।
डॉ. सुशीला कटारिया, इंटरनल मेडिसिन, मेदांता गुरुग्राम
