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पीरियड्स का सिर्फ सामान्य दर्द या कुछ और? समझिए कैसे एंडोमेट्रियोसिस बढ़ा रहा है डायबिटीज का खतरा

Updated: Thu, 13 Aug 2026 08:20 AM (IST)

महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस के चलते बांझपन के साथ ही अब टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम की रिसर्च सामने आई है।

एंडोमेट्रियोसिस वाली महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा (Image Source: AI Generated)

एंडोमेट्रियोसिस वाली महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा (Image Source: AI Generated)

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प्रेट्र, नई दिल्ली। महिलाओं की बीमारियों को लेकर कभी खुलकर बात नहीं की जाती और सामाजिक ढांचा भी कुछ ऐसा है कि महिलाएं जिम्मेदारी के चलते अपनी सेहत को अनदेखा करती जाती हैं। एंडोमेट्रियोसिस उन्हीं में से एक है, जिसमें पीरियड्स में भयंकर दर्द होता है लेकिन इसे सामान्य दर्द समझकर ध्यान नहीं दिया जाता। 

एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की परत जैसे टिश्यू गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगते हैं। एंडोमेट्रियोसिस के कारण पेल्विक एरिया में तेज दर्द, पीरियड्स के दौरान दर्द और फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसमें जान लेने वाली बात यह है कि अगर इसे लंबे समय तक नजरअंदाज कर दिया जाए तो इससे बांझपन का खतरा भी बढ़ जाता है, पर इस खतरे के साथ एक और जोखिम जुड़ गया है। दरअसल, इससे जुड़ी एक स्टडी इसका लिंक डायबिटीज से भी बता रही है। 

एंडोमेट्रियोसिस वाली महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा

हाल ही में, महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस से डायबिटीज के जोखिम पर स्टडी सामने आई है। इसमें पता चला है कि जिन महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस है, उनमें टाइप-2 डायबिटीज का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में 46 प्रतिशत अधिक होता है।

अमेरिका के शोधकर्ताओं की टीम ने साल 1996 से 2021 के बीच यूटा पॉपुलेशन डाटाबेस में लगभग 30 लाख महिलाओं पर नजर रखी, इस दौरान लगभग एक लाख महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस की पहचान हुई थी। शोधकर्ताओं ने पाया, "एंडोमेट्रियोसिस न होने वाली महिलाओं की तुलना में एंडोमेट्रियोसिस वाली महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा लगभग दोगुना हो जाता है।" 

क्रोनिक सूजन का डायबिटीज के विकास में योगदान

शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि डायबिटीज का खतरा एंडोमेट्रियोसिस के अलग-अलग प्रकारों के हिसाब से अलग-अलग था। इस तरह स्टडी पर गौर करें तो इससे साफ पता चलता है कि इस बीमारी के लंबे समय में सेहत पर पहले सोचे गए असर से कहीं अधिक असर हो सकते हैं। 

इस शोध की बात करें तो इससे जुड़ी जानकारी डायबेटोलोजिया नामक जर्नल में प्रकाशित हुई है। इसमें कहा गया है कि एंडोमेट्रियोसिस में होने वाली क्रोनिक सूजन यानी लंबे समय तक रहने वाली सूजन इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज के विकास में योगदान दे सकती है। हम सभी जानते हैं कि इंसुलिन रेजिस्टेंस टाइप 2 डायबिटीज होने के प्रमुख कारणों में से एक है, जिसमें शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति किसी भी तरह प्रतिक्रिया करना कम कर देती है।