दर्द दिमाग में नहीं, DNA में है! फाइब्रोमायल्जिया पर हुई इस इंटरनेशनल रिसर्च ने उड़ाए होश
जिसे लोग समझते रहे मानसिक भ्रम, उसका लिंक तो DNA से निकला, फाइब्रोमायल्जिया को लेकर रिसर्च में बड़ा खुलासा। ...और पढ़ें

फाइब्रोमायल्जिया पर हुई इस इंटरनेशनल रिसर्च (Image Source: AI Generated)

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प्रेट्र, नई दिल्ली। जब दर्द का कारण पता नहीं होता तो कई बार उस स्थिति को जैविक विकार के बजाय मानसिक रोग या दर्द करार दिया जाता है। ऐसा ही एक रोग है- फाइब्रोमायल्जिया। यह एक क्रोनिक दर्द की स्थिति है, जिससे पूरे शरीर में मांसपेशियों और हड्डियों के दर्द, ज्यादा थकान, नींद, याददाश्त और मूड से संबंधित समस्याएं जैसी परेशानियां होती है। नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित निष्कर्षों ने इस स्थिति के लिए एक स्पष्ट जैविक आधार की पहचान की है।
7 देशों के 53 शोधकर्ताओं ने किया विश्लेषण
शोधकर्ताओं ने मानव जीनोम के 26 क्षेत्रों में डीएनए सीक्वेंस (अनुक्रम) भिन्नताओं की पहचान की, जो फाइब्रोमायल्जिया के विकास के जोखिम को प्रभावित करती हैं। इन क्षेत्रों में शामिल कई जीन मस्तिष्क और तंत्रिका कार्य में लगे होते हैं। इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए सात देशों के 53 शोधकर्ताओं ने अमेरिका, ब्रिटेन, फिनलैंड, एस्टोनिया, डेनमार्क, और आइसलैंड के 11 स्वास्थ्य अनुसंधान अध्ययनों के डेटा का विश्लेषण किया है।
इस अध्ययन के सह-वरिष्ठ लेखक तथा किंग्स कालेज, लंदन के जीनोमिक एपिडेमियोलाजी की प्रोफेसर फ्रांसेस विलियम्स के मुताबिक, 20 लाख से अधिक व्यक्तियों के डीएनए का अध्ययन से इस बात पर विश्वास किया जा सकता है कि नतीजे वास्तविक हैं। साथ ही यह फाइब्रोमायल्जिया दर्द के इलाज की दिशा में नया मार्ग खोल सकता है।
सोचने के तरीके को मौलिक स्तर पर बदला
लुनेफेल्ड-टैनेबाम रिसर्च इंस्टीट्यूट और कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी के एक अन्य शोधकर्ता माइकल वेनबर्ग का कहना है कि इस अध्ययन ने फाइब्रोमायल्जिया के बारे में हमारे सोचने के तरीके को मौलिक स्तर पर बदल दिया है। दशकों से इसके रोगियों यह कहकर खारिज कर दिया जाता रहा है कि उनका दर्द केवल मानसिक है। लेकिन यह अध्ययन निष्कर्ष इस स्थिति के स्पष्ट जैविक आधार की पुष्टि करते हैं।
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इनमें दिखे जोखिम वाले कारक
चिह्नित 26 आनुवंशिक भिन्नताओं में फाइब्रोमायल्जिया के जोखिम से सबसे मजबूत संबंध वाला एक जीन एचटीटी के भीतर था। इस जीन में म्यूटेशन हंटिंग्टन रोग का कारण बन सकते हैं, जो एक गंभीर और घातक न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार है। इन 26 में से एक अन्य भिन्नता एक रिसेप्टर जीपीआर52 की ओर इशारा करती है जो एचटीटी स्तरों को नियंत्रित करती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस रिसेप्टर को पहले से ही हंटिंग्टन रोग में संभावित दवा लक्ष्य के रूप में जांचा जा रहा है।
कई बीमारियों के साथ ओवरलैप
अध्ययन फाइब्रोमायल्जिया और अन्य स्थितियों, जैसे कि कमर दर्द, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, और पोस्ट-ट्रामैटिक स्ट्रेस डिसआर्डर के बीच एक महत्वपूर्ण आनुवंशिक ओवरलैप भी दर्शाता है। तंत्रिका तंत्र के भीतर साझा जैविक तंत्र लोगों को इन स्थितियों के प्रति संवेदनशील बना सकते हैं। क्रानिक दर्द सिंड्रोम व्यक्तियों और परिवारों में एक साथ समूह बनाते हैं और आनुवंशिक रूप से समान होते हैं। उनसे जुड़े साझा तंत्र को लक्षित करना संभावित रूप से कई विकारों के में फायदेमंद हो सकता है।
हालांकि आनुवंशिकी ही एकमात्र कारक नहीं है, जिसे कि फाइब्रोमायल्जिया का जोखिम कारक माना जाए। इसके लिए अन्य जोखिम कारकों की भी पहचान करना जरूरी है। इसलिए इसका अध्ययन किया जाना चाहिए कि जीन, पर्यावरणीय संपर्क और जीवनशैली मिलकर फाइब्रोमायल्जिया सिंड्रोम के जोखिम में कैसे योगदान करते हैं। फाइब्रोमायल्जिया को सक्रिय करने वाले कारकों और तंत्रिका ऊतकों में संबंधित परिवर्तनों पर आगे का शोध इस क्रानिक दर्द की स्थिति को समझने और इसके इलाज में मदद करेगा।