पहली बार बने हैं माता-पिता? डॉक्टर से जानें शिशु के पहले एक महीने में किन बातों का रखें खास ध्यान
नवजात शिशु को शुरुआती 30 दिनों में बहुत खास देखभाल की जरूरत होती है, ताकि वह बाहर के वातावरण से ताल-मेल बैठा सके। ...और पढ़ें

नवजात शिशु की देखभाल करने के लिए जरूरी बातें (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बच्चे जन्म के बाद का एक महीना बच्चे और पेरेंट्स, दोनों के लिए ही काफी नाजुक और इमोशनल होता है। इन शुरुआती 30 दिनों को नियोनेटल पीरियड कहा जाता है, जिस दौरान शिशु को खास देखभाल की जरूरत होती है।
पहली बार माता-पिता बने कपल्स के लिए यह काफी सवालों भरा हो सकता है कि बच्चे को कैसे फीड कराएं, नहलाएं या नहीं, बच्चा ठीक से सांस ले रहा है या नहीं। ऐसी ही उलझनों को दूर करने के लिए डॉ. सिद्धार्थ मदभुशी (कंसल्टेंट नियोनेटोलॉजिस्ट एंड मेडिकल डायरेक्टर, अंकुरा हॉस्पिटल्स फॉर वुमन एंड चिल्ड्रन, पुणे) कुछ जरूरी बातें बता रहे हैं। आइए जानें।
पोषण और ब्रेस्टफीडिंग का महत्व
शिशु के बेहतर विकास के लिए ब्रेस्टफीड करवाना सबसे जरूरी है। मां का दूध नवजात के लिए पोषण का सबसे अच्छा सोर्स है और पहले छह महीनों तक केवल ब्रेस्टफीड ही कराया जाना चाहिए। यह न केवल बच्चे का वजन बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि उसकी बीमारियों से लड़ने को भी बढ़ाता है और दिमाग के विकास में सहायक होता है। अगर ब्रेस्टफीडिंग में कोई परेशानी हो, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
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(AI Generated Image)
नींद और सुरक्षा
नवजात शिशु दिन में लगभग 16 से 18 घंटे सोते हैं, जो छोटे-छोटे इंटरवेल में होता है। बच्चे को हमेशा सख्त गद्दे पर पीठ के बल लिटाना चाहिए। ऐसा करने से सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम का खतरा कम हो जाता है और बच्चा सुरक्षित रहता है।
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स्वच्छता और इन्फेक्शन से बचाव
शिशु की त्वचा और शरीर बहुत सेंसिटिव होते हैं। इन्फेक्शन से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें-
- अंबिकल कॉर्ड की देखभाल- जन्म के पहले सप्ताह में इसे साफ और सूखा रखें जब तक कि यह प्राकृतिक रूप से गिर न जाए। शुरुआत में स्पंज बाथ देना ही बेहतर होता है।
- हाथ धोना- बच्चे को छूने से पहले हमेशा अपने हाथ धोएं। घर में आने वाले मेहमानों की संख्या सीमित रखें और बीमार लोगों को बच्चे से दूर रखें।
- डायपर मैनेजमेंट- त्वचा को साफ, सूखा और रैश-फ्री रखने के लिए बार-बार डायपर बदलें। डॉक्टर की सलाह पर हल्की बैरियर क्रीम का इस्तेमाल किया जा सकता है।
कंगारू केयर
शिशु के लिए कंगारू केयर को बेहद जरूरी माना जाता है। शिशु को अपनी त्वचा से सटाकर रखने को कंगारू केयर कहते हैं। यह तकनीक बच्चे को गर्म रखने, ब्रेस्टफीडिंग में सुधार करने और माता-पिता व बच्चे के बीच इमोशनल कनेक्शन को मजबूत करने में मदद करती है। इससे बच्चे की सांस लेने की प्रक्रिया और वजन में भी सुधार होता है।
वैक्सीनेशन और तापमान का ध्यान
नवजात शिशु अपने शरीर का तापमान खुद नियंत्रित नहीं कर पाते। उन्हें बड़ों की तुलना में कपड़ों की एक एक्स्ट्रा लेयर पहनानी चाहिए, लेकिन ध्यान रहे कि उन्हें बहुत ज्यादा कपड़ों में न लपेटें। इसके अलावा, जन्म के पहले 30 दिनों में BCG, हेपेटाइटिस B और OPV जैसे टीके डॉक्टर की निगरानी में लगवाना जरूरी है। टीकाकरण बच्चे को गंभीर इन्फेक्शन्स से बचाने के लिए बेहद जरूरी है।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
माता-पिता को कुछ संकेतों पर नजर रखना चाहिए। अगर बच्चा दूध कम पिए, उसे बुखार हो, सांस लेने में दिक्कत हो, त्वचा पीली पड़ जाए, वह बहुत ज्यादा रोए या पेशाब कम करे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।