नॉर्मल BMI के झांसे में न आएं! अब 'वेस्ट-टू-हाइट रेशियो' बताएगा सेहत की असली सच्चाई
अक्सर हम मोटापे को मापने के लिए 'बॉडी मास इंडेक्स' (BMI) को ही सबसे सही पैमाना मानते हैं, लेकिन एक नए शोध ने इस धारणा को चुनौती दी है। शोध के अनुसार, ...और पढ़ें

बुजुर्गों में मोटापे का पता लगाने में वेस्ट-टू-हाइट रेशियो बेहतर (Image Source: Freepik)
HighLights
बीएमआई बुजुर्गों को मोटापे के खतरे से गुमराह कर सकता है
'वेस्ट-टू-हाइट रेशियो' पेट की चर्बी का बेहतर माप बताता है
यह नया पैमाना बुजुर्गों में जोखिम की समय पर पहचान करेगा
प्रेट्र, नई दिल्ली। क्या आपको लगता है कि बीएमआई (BMI) सामान्य होने का मतलब है कि आप मोटापे के खतरे से बाहर हैं? अगर आप या आपके घर के बुजुर्ग ऐसा सोचते हैं, तो सावधान हो जाएं। एक नए शोध ने खुलासा किया है कि मोटापे को मापने का यह सबसे आम तरीका बुजुर्गों को धोखे में रख सकता है। शोध के मुताबिक, उम्रदराज लोगों में सेहत का सही हाल जानने के लिए बीएमआई नहीं, बल्कि 'वेस्ट-टू-हाइट रेशियो' कहीं ज्यादा सटीक और भरोसेमंद पैमाना है।

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क्यों बेहतर है वेस्ट-टू-हाइट रेशियो?
बीएमआई (BMI) की सबसे बड़ी कमी यह है कि यह शरीर में फैट के वितरण को सही से नहीं बता पाता। इसके उलट, 'वेस्ट-टू-हाइट रेशियो' पेट के आसपास जमा फैट को बेहतर ढंग से मापता है। पेट की चर्बी का सीधा असर शरीर के जरूरी अंगों और हमारी समग्र सेहत पर पड़ता है। इसलिए, यह अनुपात बुजुर्गों की सेहत का हाल बताने में ज्यादा सक्षम है।
क्या कहता है शोध?
यह महत्वपूर्ण जानकारी ब्रिटेन की शेफील्ड और नॉटिंघम यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में सामने आई है। शोधकर्ताओं ने 'हेल्थ सर्वे फॉर इंग्लैंड' के डेटा का उपयोग करते हुए साल 2005 से 2021 के बीच मोटापे के रुझानों (ट्रेंड्स) का बारीकी से विश्लेषण किया। डॉ. लारा ग्रे और डॉ. मैग्डेलेना ओपाजो ब्रेटन ने पाया कि मोटापे के ये ट्रेंड मुख्य रूप से बढ़ती उम्र, आसपास के वातावरण और पीढ़ियों में आए अंतर के कारण थे।
बीएमआई कैसे कर सकता है गुमराह?
डॉ. लारा ग्रे ने बीएमआई की सीमाओं को समझाते हुए कहा कि यह पैमाना खासकर बूढ़े लोगों को गुमराह कर सकता है। उम्र बढ़ने के साथ अक्सर लोगों का 'मसल मास' कम हो जाता है। ऐसे में बीएमआई की रीडिंग सामान्य आ सकती है, जिससे बुजुर्गों को यह गलतफहमी हो सकती है कि उन्हें मोटापे का कोई खतरा नहीं है, जबकि वास्तव में वे जोखिम में हो सकते हैं।
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समय पर देखभाल संभव
शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर स्क्रीनिंग टूल के तौर पर 'वेस्ट-टू-हाइट रेशियो' का ज्यादा इस्तेमाल किया जाए, तो जोखिम वाले बुजुर्गों की पहचान समय रहते की जा सकती है। यह न केवल बीमारी को पकड़ने में मदद करेगा, बल्कि उन्हें समय पर सही देखभाल उपलब्ध कराने में भी मददगार साबित होगा।