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    अगर आंखों में हो रहा है ऐसा दर्द, तो तुरंत भागें डॉक्टर के पास, वरना हमेशा के लिए जा सकती है विजन

    Updated: Thu, 08 Jan 2026 04:57 PM (IST)

    ग्लूकोमा, जिसे 'काला मोतिया' भी कहते हैं, आंखों की एक गंभीर बीमारी है जो अक्सर बिना दर्द के दृष्टि छीन लेती है। जनवरी में जागरूकता माह मनाया जाता है। ...और पढ़ें

    आंखों के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज (Picture Credit- AI Generated)

    आंखों के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. ग्लूकोमा 'काला मोतिया' आंखों की गंभीर बीमारी है

    2. शुरुआती लक्षण अक्सर खामोश होते हैं, बाद में दृष्टि हानि

    3. ओपन-एंगल, एंगल-क्लोजर और बच्चों में अलग लक्षण

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ग्लूकोमा, जिसे आम भाषा में 'काला मोतिया' भी कहा जाता है, आंखों की एक बेहद गंभीर स्थिति है। इसे अक्सर "सालेंट थीफ ऑफ साइट" (Silent Thief of Sight) भी कहा जाता है। इसलिए लोगों को इसके बारे में जागरूक करने के मकसद से हर साल जनवरी में ग्लूकोमा अवेयरनेस मंथ मनाया जाता है। 

    यह एक ऐसी बीमारी है, जिसकी शुरुआत बेहद खामोशी से होती है। शुरुआती दौर में मरीज को न तो आंखों में दर्द होता है और न ही विजन में कोई खास बदलाव महसूस होता है। इसलिए मरीज अक्सर डॉक्टर के पास तब पहुंचता है, जब बीमारी गंभीर स्टेज में पहुंच जाती है। यह बीमारी गंभीर इसलिए मानी जाती है, क्योंकि इसकी वजह से हुए विजन लॉस को वापस नहीं लाया जा सकता है। ऐसे में इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका समय पर ग्लूकोमा की पहचान करना है। 

    ऐसे में मैक्स मल्टी स्पेशलिटी सेंटर, पंचशील पार्क में ऑप्थैल्मोलॉजी (ग्लूकोमा सर्जरी, पीडियाट्रिक ग्लूकोमा) के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. देवेंद्र सूद से जाना कि समय रहते कैसे ग्लूकोमा के लक्षणों की पहचान कर सकते हैं।

    डॉक्टर ने बताया कि ग्लूकोमा के लक्षण इसके प्रकार पर निर्भर करते हैं, जिन्हें नीचे विस्तार से समझाया गया है:

    ओपन एंगल ग्लूकोमा (Open-Angle Glaucoma)

    यह सबसे सामान्य प्रकार का ग्लूकोमा है। यह धीरे-धीरे बढ़ता है:

    • शुरुआती संकेत: इसमें शुरू में कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन धीरे-धीरे व्यक्ति के चश्मे का नंबर बार-बार बदलने लगता है।
    • शाम की समस्या: कई मरीजों को शाम के वक्त आंखों में भारीपन, हल्का सिरदर्द या भौंहों के पास दबाव महसूस होता है। कम रोशनी में देखने में भी दिक्कत आ सकती है।
    • विजन का नुकसान: सबसे पहले व्यक्ति की 'साइड विजन' कमजोर होती है। अगर इलाज न मिले, तो यह धीरे-धीरे सेंट्रल विन (सामने देखने की क्षमता) को भी खत्म कर देता है।
    • नॉर्मल टेंशन ग्लूकोमा: इसके लक्षण भी ओपन एंगल ग्लूकोमा जैसे ही होते हैं, लेकिन इसमें आंखों का दबाव (Eye Pressure) सामान्य होने के बावजूद ऑप्टिक नर्व डैमेज हो जाती है।

    एंगल क्लोजर ग्लूकोमा (Angle-Closure Glaucoma)

    • यह एक मेडिकल इमरजेंसी है और यह अचानक हमला करता है। इसके लक्षणों को बिल्कुल नरअंदाज न करें:
    • अचानक आंखों में तेज दर्द और भयानक सिरदर्द होना।
    • बल्ब या रोशनी के चारों तरफ 'इंद्रधनुष जैसे रंगीन घेरे' (Halos) दिखाई देना।
    • विजन का अचानक धुंधला हो जाना और आंखों का लाल होना।
    • आंखों के दबाव के कारण जी मिचलाना या उल्टी होना।

    बच्चों में ग्लूकोमा (Paediatric Glaucoma)

    • ग्लूकोमा जन्मजात या बचपन में भी हो सकता है। इसके लक्षण बड़ों से अलग होते हैं:
    • आंख की पुतली या कॉर्निया का धुंधला या सफेद दिखाई देना।
    • बच्चे का तेज रोशनी से घबराना (Light Sensitivity)।
    • आंखों से लगातार पानी आना और आंखें बड़ी दिखना।

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