अचानक कम हो गया है पीरियड्स का फ्लो? राहत नहीं, हो सकती है खतरे की घंटी! एक्सपर्ट ने दी चेतावनी
अगर आपका पीरियड्स का फ्लो भी अचानक कम हो गया है, तो तुरंत सावधान हो जाएं। इसके पीछे कुछ मेडिकल कंडीशन जिम्मेदार हो सकते हैं। ...और पढ़ें

पीरियड्स के फ्लो पर ध्यान देना भी है जरूरी (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पीरियड्स हेल्दी हैं या नहीं, इसके लिए साइकिल के दिनों और फ्लो दोनों पर ध्यान देना जरूरी है। आमतौर पर हैवी ब्लीडिंग को पीसीओएस या फाइब्रॉइड्स से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन अगर फ्लो लाइट हो, तो उसे इग्नोर कर देते हैं।
पीरियड्स का फ्लो या उसकी अवधि अचानक कम होना भी आपकी सेहत के लिए खतरे की घंटी है। इसके पीछे हार्मोनल बदलाव, स्ट्रेस, लाइफस्टाइल या किसी छिपी हुई बीमारी का हाथ हो सकता है। इस बारे में जानने के लिए हमने डॉ. आस्था गुप्ता (सीनियर आईवीएफ कंसल्टेंट एंड फर्टिलिटी एक्सपर्ट, ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, दिल्ली आईवीएफ, नई दिल्ली) से कुछ सवाल पूछे। आइए जानें उन्होंने क्या बताया।
पीरियड्स का फ्लो कैसा होना चाहिए?
एक सामान्य और हेल्दी पीरियड वह माना जाता है जो 3 से 7 दिनों तक चले और जिसमें मीडियम फ्लो हो। सामान्य तौर पर, अगर आपको हर 3 से 4 घंटे में पैड या टैम्पोन बदलने की जरूरत पड़ रही है, तो इसे एक हेल्दी फ्लो माना जाता है।
कुछ महिलाओं को हमेशा से ही लाइट पीरियड्स होते हैं, लेकिन चिंता तब होनी चाहिए जब पीरियड्स अचानक बहुत कम हो जाएं, केवल 1 से 2 दिन ही चलें, या बार-बार मिस होने लगें। अगर इसके साथ आपको थकान, बालों का झड़ना या हार्मोनल इंबैलेंस के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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इसके पीछे कौन-से मेडिकल कंडीशन जिम्मेदार हो सकते हैं?
अचानक कम ब्लीडिंग होने के पीछे कई मेडिकल कारण हो सकते हैं। मुख्य रूप से थायरॉइड डिसऑर्डर, पीसीओएस, प्रीमैच्योर ओवेरियन इनसफिशिएंसी यानी समय से पहले ओवरीज का काम कम करना या यूटेरस में स्कारिंग इसके जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके अलावा, शरीर में खून की भारी कमी या कोई पुरानी बीमारी भी पीरियड्स के फ्लो को प्रभावित कर सकती है।

क्या गर्भनिरोधक ब्लीडिंग के पैटर्न को बदलते हैं?
जी हां, हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्टिव्स जैसे गोलियां या इंजेक्शन अक्सर ब्लीडिंग के पैटर्न को बदल देते हैं। इनके कारण यूटेरस की परत पतली हो जाती है, जिससे कई महिलाओं को बहुत कम, कम समय के लिए या कभी-कभी पीरियड्स बिल्कुल न आने जैसी स्थिति का अनुभव होता है। हालांकि, यह आमतौर पर सुरक्षित होता है, लेकिन अगर अचानक कोई बदलाव या अनियमित स्पॉटिंग दिखे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
लाइफस्टाइल का पीरियड्स पर क्या असर पड़ता है?
हमारा शरीर तनाव की तरफ बहुत सेंसिटिव होता है। ज्यादा मानसिक तनाव, अचानक वजन का बढ़ना या घटना, और बहुत ज्यादा कसरत करना हमारे शरीर के हाइपोथैलेमिक-पिट्यूटरी-ओवेरियन एक्सिस को बाधित कर देता है। जब शरीर तनाव में होता है, तो वह रिप्रोडक्टिव हार्मोन्स को दबाकर केवल जरूरी बॉडी फंक्शन्स को प्राथमिकता देने लगता है। इसके कारण ओव्यूलेशन में देरी हो सकती है, जिससे पीरियड्स हल्के हो जाते हैं या बंद भी हो सकते हैं।
जांच के लिए कौन से टेस्ट जरूरी हैं?
अगर आप भी ऐसे बदलावों का सामना कर रही हैं, तो डॉक्टर कुछ खास टैस्ट की सलाह दे सकते हैं, जैसे-
- ब्लड टेस्ट- हीमोग्लोबिन, थायरॉइड फंक्शन और हार्मोन लेवल, जैसे- FSH, LH और प्रोलैक्टिन की जांच।
- प्रेग्नेंसी टेस्ट- अक्सर सबसे पहले इसकी सलाह दी जाती है।
- पेल्विक अल्ट्रासाउंड- यूटेरस और ओवरीज की स्थिति देखने के लिए।
- अन्य टेस्ट- कुछ खास मामलों में हिस्टेरोस्कोपी या एमआरआई के लिए भी कहा जा सकता है, ताकि समस्या की सही जड़ का पता लगाया जा सके।