हाई ब्लड प्रेशर से जा सकती है आंखों की रोशनी, डॉक्टर ने बताया क्यों जरूरी है रेगुलर रेटिना चेकअप
क्या आप जानते हैं कि बढ़ा हुआ बीपी बिना किसी आहट के आपकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए छीन सकती है? ...और पढ़ें

सिर्फ दिल ही नहीं, आंखों को भी डैमेज कर सकता है हाई ब्लड प्रेशर (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन आज के समय में एक बहुत ही आम लाइफस्टाइल समस्या बन चुकी है। ज्यादातर लोगों को यह पता है कि यह हमारे मुख्य अंगों जैसे दिल, दिमाग और किडनी को नुकसान पहुंचाता है, जिससे आगे चलकर हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक या किडनी फेल होने का खतरा रहता है।
हालांकि, बहुत कम लोग यह जानते हैं कि ब्लड प्रेशर बढ़ने की वजह से हमारी आंखों को भी काफी भारी नुकसान हो सकता है। आइए, आज 17 मई को World Hypertension Day के मौके पर डॉ. प्रभजोत कौर (सीनियर कंसल्टेंट ऑप्थल्मोलॉजिस्ट, डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल, नई दिल्ली) से डिटेल में जानते हैं इस बारे में।

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रेटिना स्क्रीनिंग से हो सकती है बीपी की पहचान
डॉक्टर कहती हैं कि एक रेटिना स्पेशलिस्ट होने के नाते, हम अपनी ओपीडी में कई बार ऐसे मरीज देखते हैं जिनका रेटिना चेक करने पर हमें शक होता है कि शायद उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ रहता है। जब हम उनका प्रेशर चेक करवाते हैं, तो यह बात सही निकलती है। इस तरह, कई बार हाई बीपी का ऐसा मरीज जो शायद अपनी दवाइयां ठीक से नहीं ले रहा हो, उसकी पहचान एक रूटीन रेटिना चेकअप से आसानी से हो जाती है।
कब बढ़ जाता है आंखों को नुकसान पहुंचने का खतरा?
अगर बीपी लंबे समय से ऊपर-नीचे हो रहा है या लगातार हाई रहता है, तो यह चिंता का विषय है। इसके साथ ही अगर मरीज को कोलेस्ट्रॉल बढ़ने, खराब लिपिड प्रोफाइल, किडनी की समस्या या डायबिटीज जैसे अन्य जोखिम हैं, तो रेटिना और आंखों पर बुरा असर पड़ने का खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
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हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी और इसके लक्षण
डॉ. आगे कहती हैं, सबसे आम समस्या जो हम देखते हैं, वह है 'हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी'। इसमें आंखों की रेटिना की ब्लड सप्लाई खराब होने लगती है। खून की सप्लाई कम पहुंचने की वजह से आंखों में कई तरह के बदलाव आते हैं:
- ऑप्टिक डिस्क में सूजन आ सकती है।
- डिस्क पेलर हो सकता है।
- रेटिना में ब्लड स्पॉट्स या 'कॉटन वूल स्पॉट्स' दिखाई दे सकते हैं।
- रेटिना में सूजन आने की वजह से मरीज की दृष्टि काफी हद तक प्रभावित या धुंधली हो सकती है।
इन शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज
मरीजों को अपने शरीर में होने वाले छोटे बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। अगर आपको ये लक्षण महसूस हों, तो तुरंत एक विस्तृत आई चेकअप करवा लेना चाहिए:
- आंखों में धुंधलापन महसूस होना।
- कंट्रास्ट कम लगना या साफ न दिखना।
- आंखों में ज्यादा चकाचौंध महसूस होना।
- देखने में दिक्कत होना या ऐसे छोटे-छोटे काम करने में परेशानी होना जो पहले आसानी से हो जाते थे।

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हमेशा के लिए जा सकती है आंखों की रोशनी
सबसे बेहतर स्थिति यह होती है कि इस बीमारी को गंभीर होने से पहले ही पकड़ लिया जाए, जो कि लगातार रेटिना स्क्रीनिंग के जरिए ही संभव है। अगर ध्यान न दिया जाए तो 'रेटिनल वेन ऑक्लूजन' या 'रेटिनल आर्टरी ऑक्लूजन' जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं, जिनमें रेटिना की ब्लड सप्लाई पूरी तरह ब्लॉक हो जाती है। इसके कारण ऑप्टिक नर्व डैमेज होने से आंखों की रोशनी हमेशा के लिए भी जा सकती है।
क्यों जरूरी है साल में दो बार रेटिना चेकअप?
यह बहुत जरूरी है कि हाई ब्लड प्रेशर के मरीज नियमित रूप से आंखों की जांच करवाते रहें ताकि अंधेपन के खतरे को कम किया जा सके।
- हाइपरटेंशन के किसी भी मरीज का एक 'बेसलाइन आई चेकअप' जरूर होना चाहिए, जिसमें कॉर्निया से लेकर रेटिना तक की बारीकी से जांच की जाती है।
- डायलेटेड रेटिना चेकअप में थोड़ा समय लगता है, लेकिन एक प्रॉपर बेसलाइन चेकअप होना बहुत जरूरी है।
- अगर जांच में कोई समस्या नहीं भी निकलती है, तो भी हर 6 महीने से 1 साल के अंदर फॉलो-अप करते रहना चाहिए, चाहे आपको कोई लक्षण महसूस हों या न हों।
सही लाइफस्टाइल है सबसे बड़ा बचाव
सबसे अच्छी बात यह है कि अगर हाइपरटेंसिव आई कॉम्प्लिकेशन्स का समय रहते पता चल जाए, तो इसे आसानी से रोका जा सकता है। सही बीपी कंट्रोल, रेगुलर एक्सरसाइज, हेल्दी डाइट, नमक कम खाने, स्मोकिंग कम करने और स्ट्रेस मैनेजमेंट जैसे आसान कदमों से आंखों की बीमारियों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
एक साधारण रेटिना चेकअप न सिर्फ आपकी आंखों की रोशनी बचाने में मदद करता है, बल्कि यह आपके पूरे शरीर की सेहत और बीपी कंट्रोल का भी संकेत देता है। आंखों के जरिए हम मरीज को उसकी सेहत से जुड़ी कई अहम बातें बता पाते हैं, इसलिए हाइपरटेंशन से होने वाली परेशानियों से बचने के लिए रेगुलर आई चेकअप बहुत ही जरूरी है।