चमगादड़ और पक्षियों की बीट से फैलता है यह जानलेवा फंगस! सीधे फेफड़ों और आंखों पर करता है अटैक
फेफड़ों समेत कई अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है चमगादड़ और पक्षियों की बीट से फैलने वाला दुर्लभ हिस्टोप्लाज्मा संक्रमण। ...और पढ़ें

दुर्लभ हिस्टोप्लाज्मा संक्रमण (Image Soure: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। चमगादड़ और पक्षियों के मल से दूषित मिट्टी में पनपने वाले हिस्टोप्लाज्मा कैप्सुलेटम फंगस इंसानों में मात्र फेफड़ों को ही नहीं बल्कि गंभीर मामलों में मस्तिष्क, आंख, लिवर समेत शरीर के कई अन्य महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाता है।
गुरुग्राम में एक महिला की आंख में मिले दुर्लभ हिस्टोप्लाज्मा संक्रमण के मामले ने इस फंगल बीमारी को लेकर चिकित्सकों का ध्यान खींचा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसके लक्षण कई बार टीबी या सामान्य फेफड़ों के संक्रमण से मिलते-जुलते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श व जांच करानी चाहिए।
समय पर दवा शुरू होने पर उपचार संभव
समय पर एंटी-फंगल दवाएं शुरू होने पर अधिकांश मरीजों का सफल उपचार संभव है। सर गंगाराम अस्पताल के चेस्ट मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डा. उज्ज्वल पारख ने बताया कि अधिकांश स्वस्थ लोगों में संक्रमण हल्का रह सकता है, लेकिन कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों में यह फेफड़ों से आगे बढ़कर मस्तिष्क, आंख, लिवर, अस्थि मज्जा, लिम्फ नोड्स (लसिका ग्रंथि) और एड्रिनल ग्लैंड (अधिवृक्क ग्रंथियों) तक फैल सकता है।
ऐसे मरीजों में बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है। पीएसआरआइ अस्पताल की पल्मोनोलाजी, क्रिटिकल केयर एवं स्लीप मेडिसिन की वरिष्ठ सलाहकार डा. नीतू जैन के अनुसार यह फंगस उन स्थानों की मिट्टी में पनपता है, जहां लंबे समय तक चमगादड़ या पक्षियों का मल जमा रहता है।
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पुराने भवनों की सफाई, गोदामों, तहखानों, निर्माण या खोदाई के दौरान दूषित मिट्टी के सूक्ष्म कण हवा में फैल जाते हैं। सांस के साथ शरीर में पहुंचने के बाद संक्रमण सबसे पहले फेफड़ों को प्रभावित करता है। अगर जोखिम वाले वातावरण में काम करने वाले लोग सतर्क रहते हैं, समय पर पहचान व उपचार के लिए जागरूक हैं तो इससे बचा जा सकता है।
हिस्टोप्लाज्मा कैप्सुलेटम का किम लोगों को अधिक खतरा?
एचआइवी संक्रमित मरीज
कैंसर का उपचार करा रहे मरीज
अंग प्रत्यारोपण करा चुके मरीज
लंबे समय तक स्टेरायड लेने वाले मरीज
कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले अन्य लोग
लक्षण
दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी बने रहना
बुखार या ठंड लगना 4सांस लेने में तकलीफ या सांस फूलना
सीने में दर्द या जकड़न
अत्यधिक थकान और कमजोरी
बिना कारण वजन कम होना
बचाव के लिए बरतें ये सावधानियां
जहां चमगादड़ या पक्षियों का मल जमा हो, वहां सफाई या खोदाई के दौरान एन-95 मास्क और दस्तानों का इस्तेमाल करें।
धूल उड़ने से बचने के लिए सफाई से पहले मिट्टी को हल्का गीला कर लें।
पुराने बंद भवनों, तहखानों और गोदामों में काम करते समय सुरक्षा उपाय अपनाएं।
लगातार खांसी, बुखार या सांस लेने में तकलीफ होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच कराएं।