एंग्जायटी सिर्फ हालात का नतीजा नहीं, आपके 'जीन्स' का भी है असर; नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने किया साबित
एक नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने चिंता के लक्षणों से जुड़े 74 जेनेटिक स्थानों की पहचान की है, जिनमें से 39 पहली बार खोजे गए हैं। ...और पढ़ें

नई रिसर्च में सामने आया एंग्जायटी और जीन्स का सीधा कनेक्शन (Image Source: AI-Generated)

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प्रेट्र, नई दिल्ली। क्या आप भी अक्सर जरूरत से ज्यादा चिंता करते हैं? अगर हां, तो आपको जानकर हैरानी होगी कि इसका कनेक्शन आपके जीन्स से जुड़ा हो सकता है। हाल ही में हुए एक बेहद अहम शोध में वैज्ञानिकों ने इंसानी जीनोम में 74 ऐसी जगहों का पता लगाया है, जिनका सीधा संबंध हमारी चिंता के लक्षणों से है। आइए जानते हैं इस दिलचस्प रिसर्च से जुड़ी सभी जरूरी बातें।

(Image Source: AI-Generated)
पहली बार मिले 39 नए जेनेटिक सुराग
इस अध्ययन की सबसे खास बात यह है कि वैज्ञानिकों द्वारा पहचानी गई इन 74 जगहों में से 39 स्थानों को पहली बार चिंता के साथ जोड़कर देखा गया है। विज्ञान की दुनिया में यह चिंता और जेनेटिक्स के बीच संबंधों को दर्शाने वाला अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि 'जीनोम' आखिर होता क्या है? आसान भाषा में समझें तो, जीनोम किसी भी जीव के संपूर्ण डीएनए या आनुवंशिक सामग्री का एक पूरा सेट होता है। यह एक ऐसी 'बुकलेट' की तरह है, जिसमें किसी जीव के निर्माण, उसके विकास, शरीर के काम करने के तरीके और प्रजनन से जुड़े सारे जैविक निर्देश मौजूद होते हैं।
कैसे हुआ यह बड़ा खुलासा?
यह कोई छोटा शोध नहीं है। किंग्स कॉलेज लंदन और ऑस्ट्रेलिया के क्यूआईएमआर बर्गहोफर मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने मिलकर करीब 6,93,869 लोगों के जेनेटिक डेटा की गहराई से जांच की।
इस विशाल डेटाबेस के विश्लेषण से यह बात साफ हुई कि जिन लोगों में चिंता के गंभीर लक्षण होते हैं, उनके अंदर कुछ खास तरह के जेनेटिक अंतर काफी ज्यादा आम होते हैं। वैज्ञानिकों की यह अहम स्टडी मशहूर जर्नल 'नेचर ह्यूमन बिहेवियर' में प्रकाशित हुई है।
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बायोलॉजी और जीवन के अनुभवों का तालमेल
इस शोध ने वैज्ञानिकों को चिंता के पीछे छिपे बायोलॉजिकल क्रम को लेकर एक बिलकुल नई समझ दी है। किंग्स कॉलेज लंदन की रिसर्च फेलो मेगन स्केल्टन ने इस खोज पर रोशनी डालते हुए बताया कि यह अध्ययन यह समझने की दिशा में एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है कि हमारी बायोलॉजिकल प्रक्रियाएं चिंता के खतरे पर किस तरह असर डाल सकती हैं।
हालांकि, उन्होंने एक बेहद जरूरी बात भी स्पष्ट की है। किसी भी इंसान में चिंता का जोखिम सिर्फ उसके जेनेटिक्स से तय नहीं होता। यह दरअसल जेनेटिक्स, व्यक्ति की जिंदगी के निजी अनुभवों, उसके हालात और मनोवैज्ञानिक कारकों के बीच का आपसी तालमेल होता है। यानी आपका डीएनए एक भूमिका जरूर निभाता है, लेकिन आपके जीवन की परिस्थितियां भी इसमें बराबर की हिस्सेदार होती हैं।