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    सिगरेट का धुआं नहीं, आपकी सांस ही बन रही दुश्मन! ट्रैफिक और घर की ये चीजें दे रही लंग कैंसर को दावत?

    By Niharika PandeyEdited By: Harshita Saxena
    Updated: Sat, 17 Jan 2026 06:58 PM (IST)

    फेफड़े का कैंसर होने की सबसे बड़ी वजह धूम्रपान को माना जाता है, लेकिन ऐसा नहीं करने वाले लोगों में भी खतरा बना रहता है। औरों के द्वारा धूम्रपान करने, ...और पढ़ें

    धूम्रपान न करने वालों को भी हो सकता है फेफड़ों का कैंसर (Picture Credit- Freepik)

    धूम्रपान न करने वालों को भी हो सकता है फेफड़ों का कैंसर (Picture Credit- Freepik)

    HighLights

    1. धूम्रपान न करने वालों में भी फेफड़ों का कैंसर संभव है

    2. सेकंडहैंड स्मोक, रेडॉन गैस, प्रदूषण मुख्य कारण हैं

    3. लक्षणों में खांसी, सांस फूलना, वजन घटना शामिल हैं

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। लंग कैंसर या फेफड़े के कैंसर को लेकर लोगों की यही धारणा होती है कि यह स्मोकिंग करने वाले लोगों को ही होता है। लेकिन लंग कैंसर के हजारों ऐसे मामले सामने आते हैं, जिसका शिकार वो लोग भी होते हैं, जिन्होंने कभी भी सिगरेट नहीं पी होती है। हम रोजाना कई ऐसी बाहरी चीजों के संपर्क में आते हैं, जो कि लंग कैंसर के खतरे को बढ़ाने का काम करती हैं। आइए, जानते हैं उन वजहों को जो नॉन-स्मोकर्स में लंग कैंसर का कारण बन सकते हैं।

    हमारे आस-पास हैं ढेरों वजहें

    • सेकंडहैंड स्मोक: अन्य लोगों द्वारा छोड़े जाने वाले सिगरेट के धुंएं में सांस लेने पर।
    • रेडॉन गैस: यह नेचुरल रेडियोएक्टिव गैस है, जोकि घर के अंदर भी हो सकती है।
    • गाड़ी का धुंआ और वायु प्रदूषण: लंबे समय तक ऐसे धुंएं में सांस लेते रहने पर।
    • कुछ केमिकल्स: एस्बेस्टस, अर्सेनिक या क्रोमियम जैसे केमिकल।
    • अन्य प्रकार का धुंआ: जंगल की आग या लकड़ी जलने वाले धुंएं के लगातार संपर्क में रहने पर।

    लंग कैंसर की फैमिली हिस्ट्री 

    अगर माता–पिता, भाई-बहनों में से किसी को भी 50 की उम्र से पहले लंग कैंसर की समस्या हुई है तो इसका खतरा बढ़ जाता है।

    सिगरेट न पीने वालों में पाया जाता है ऐसा कैंसर

    मुख्य रूप से लंग कैंसर के दो टाइप होते हैं स्मॉल सेल लंग कैंसर और नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर। जो लोग धू्म्रपान नहीं करते हैं उनमें नॉन स्मॉल सेल लंग कैंसर का सबटाइप एडेनोकार्सिनोमा पाया जाता है। आमतौर पर लक्षणों के नजर आने से पहले यह फेफड़े के बाहरी हिस्से में धीरे-धीरे बढ़ता रहता है।

    ये होते हैं लक्षण

    • लगातार खांसी होना
    • सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ
    • सीने में भारीपन
    • थकान
    • गला बैठना
    • वजन का अचानक कम हो जाना

    ऐसे बचे रह सकते हैं खतरे से

    • सिगरेट या बीड़ी के धुंएं से दूर रहें
    • घर पर रेडॉन गैस की जांच करें
    • अगर आप केमिकल वाली जगह पर काम करते हैं तो सुरक्षा के सभी नियमों का पालन करें और गियर्स अच्छी तरह पहनें
    • हैवी ट्रैफिक में जाने से बचें और प्रदूषण को लेकर जारी की गई एडवाइजरी का पालन करें।

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    Disclaimer: लेख में उल्लेखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो, तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।