वह तारीख जब पहली बार दुनिया को पता चला- 'जानलेवा है सिगरेट', पैकेट पर हुई चेतावनी लिखने की शुरुआत
इतिहास में 11 जनवरी 1964 की तारीख स्वास्थ्य जगत के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। यही वह दिन था जब अमेरिका के सर्जन जनरल लूथर एल. टेरी ने अपनी ऐतिह ...और पढ़ें

कब और कैसे हुई सिगरेट के पैकेट पर 'चेतावनी' लिखने की शुरुआत? (Image Source: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि एक हेल्थ रिपोर्ट इतनी विस्फोटक हो सकती है कि उसे जारी करने से पहले सरकार को शेयर बाजार गिरने का डर सताने लगे?
जी हां, 11 जनवरी 1964 को ठीक ऐसा ही हुआ था। यह वो तारीख थी जब अमेरिका में एक ऐसी सच्चाई दुनिया के सामने आई, जिसे सालों से गुप्त बैठकों में परखा जा रहा था। उस दिन दुनिया को पहली बार आधिकारिक तौर पर पता चला कि जिस सिगरेट को लोग शौक से पी रहे हैं, वह असल में जानलेवा है और फेफड़ों के कैंसर की मुख्य जड़ है।

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7,000 वैज्ञानिक लेखों का निचोड़
यह कोई साधारण रिपोर्ट नहीं थी, बल्कि 387 पन्नों का एक विस्तृत दस्तावेज था। इसे तैयार करने के लिए 7,000 से भी अधिक वैज्ञानिक लेखों की गहराई से समीक्षा की गई थी। इस रिपोर्ट ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया कि सिगरेट पुरुषों में फेफड़े के कैंसर का मुख्य कारण है। साथ ही, यह महिलाओं में भी फेफड़ों के कैंसर की संभावना को बढ़ाती है और ‘क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस’ का सबसे बड़ा कारण है।
गुप्त बैठकें और विशेषज्ञों की कमेटी
इस रिपोर्ट की नींव 1961 में पड़ी थी, जब चार बड़े स्वास्थ्य संगठनों ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी से राष्ट्रीय जांच की मांग की थी। इसके बाद 1962 में लूथर टेरी ने 10 विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाई।
इस कमेटी की सबसे दिलचस्प बात यह थी कि इसमें आधे सदस्य स्मोकर (धूम्रपान करने वाले) थे और आधे नॉन-स्मोकर। तंबाकू उद्योग इस रिपोर्ट को प्रभावित न कर सके, इसके लिए कमेटी की सभी बैठकें पूरी तरह से गुप्त रखी जाती थीं।
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शनिवार को रिपोर्ट जारी करने की अनोखी वजह
टेरी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट जारी करने के लिए शनिवार का दिन चुना। इसके पीछे एक खास रणनीति थी। वे नहीं चाहते थे कि रिपोर्ट के कारण शेयर बाजार अचानक गिर जाए। शनिवार को बाजार बंद रहता है, इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि इससे बाजार सुरक्षित रहेगा और रविवार के अखबारों में इस खबर को प्रमुखता से जगह मिलेगी।
उनकी यह रणनीति काम कर गई। अगले दिन यह खबर सभी बड़े अखबारों की हेडलाइन और टीवी की लीड स्टोरी बन गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में टेरी ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि सिगरेट पुरुषों में मौत का खतरा 70% तक बढ़ा देती है।

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विज्ञापन पर बैन से हुई बदलाव की शुरुआत
इस रिपोर्ट का असर जबरदस्त रहा। 1964 में अमेरिका में करीब 42% वयस्क धूम्रपान करते थे, लेकिन इस रिपोर्ट के बाद इन आंकड़ों में गिरावट शुरू हुई और आज यह संख्या घटकर लगभग 12-13% रह गई है।
सरकार ने भी उठाए कड़े कदम:
1965: पहली बार सिगरेट के पैकेट पर चेतावनी लिखी गई- "कॉशन: सिगरेट स्मोकिंग मे बी हेजार्डस टू यूअर हेल्थ" (सावधानी: सिगरेट पीना आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है)।
1971: टीवी और रेडियो पर सिगरेट के विज्ञापनों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया।
खुद स्मोकर थे सर्जन जनरल लूथर टेरी
हालांकि, इस रिपोर्ट ने कैंसर के खतरे को उजागर किया, लेकिन 1964 की इस रिपोर्ट में निकोटीन को ‘एडिक्शन’ नहीं माना गया था। इसे बाद में 1988 की रिपोर्ट में शामिल किया गया। रिपोर्ट का असर खुद सर्जन जनरल लूथर टेरी पर भी पड़ा। वे खुद लंबे समय से स्मोकर थे, लेकिन अपनी ही रिपोर्ट के निष्कर्षों को देखने के बाद उन्होंने सिगरेट छोड़ दी।