Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    कोविड के बाद अब इबोला के नए स्ट्रेन ने दुनियाभर में बढ़ाई टेंशन! वैक्सीन को लेकर पढ़ें लेटेस्ट अपडेट

    Updated: Sat, 23 May 2026 06:53 PM (IST)

    मध्य अफ्रीका, खासकर डीआर कांगो में इबोला का नया 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन तेजी से फैल रहा है, जिसके लिए मौजूदा वैक्सीन प्रभावी नहीं है। विश्व स्वास्थ्य सं ...और पढ़ें

    इबोला वायरस ने बढ़ाई चिंता (Picture Credit- AI Generated)

    इबोला वायरस ने बढ़ाई चिंता (Picture Credit- AI Generated)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य अफ्रीका खासकर डीआर कांगो में एक बार फिर इबोला का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इस संक्रमण के चलते सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। यह वायरस पिछले कई सालों से चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे में इसके बढ़ते मामले खतरे की घंटी साबित हो सकते हैं। 

    खासकर अब यह चिंता का ज्यादा बड़ा कारण बन रहा है, क्योंकि इस बार संक्रमण का जो नया 'स्ट्रेन' सामने आया है, उसका कोई पुख्ता इलाज फिलहाल मौजूद नहीं है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने भी साफ कर दिया है कि नई वैक्सीन आने में कम से कम 6 से 9 महीने का समय लग सकता है। 

    ऐसे में सवाल यह है कि जब इबोला की वैक्सीन पहले से मौजूद है, तो फिर इस नए स्ट्रेन से निपटने में इतना समय क्यों लग रहा है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

    क्या है इबोला और इसका नया खतरा?

    इबोला की खोज सबसे पहले साल 1976 में हुई थी और यह तभी से एक बेहद खतरनाक वायरस बना हुआ है। यह वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ और बंदरों जैसे जानवरों से इंसानों में फैलता है। साल 2014 में पश्चिम अफ्रीका में फैले इसके 'जैरे स्ट्रेन' ने करीब 11,000 लोगों की जान ली थी। उस समय मृत्यु दर इतनी ज्यादा थी कि वैज्ञानिकों ने जल्द ही इसके लिए वैक्सीन (एर्वेबो) और इलाज ढूंढ लिया।

    नया स्ट्रेन क्यों है खतरे की घंटी?

    इस बार जो स्ट्रेन लोगों को अपना शिकार बना रहा है, वह 'बुंडीबुग्यो' (Bundibugyo) स्ट्रेन है। यह इबोला का एक दुर्लभ प्रकार है, जिसके मामले पहले सिर्फ 2007 और 2012 में ही देखे गए थे। समस्या यह है कि जो वैक्सीन 'जैरे स्ट्रेन' के लिए बनाई गई थी, वह इस नए 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन पर कितनी कारगर है, इसका कोई प्रमाण नहीं है।

    खबरें और भी

    वैक्सीन में क्यों हो रही है देरी?

    WHO के मुताबिक, इस नए स्ट्रेन के लिए दो अलग-अलग वैक्सीन पर काम चल रहा है:

    • पहली वैक्सीन: यह पुरानी इबोला वैक्सीन (rVSV) की तकनीक पर ही आधारित है, लेकिन अभी तक इसका क्लिनिकल ट्रायल यानी इंसानों पर परीक्षण शुरू नहीं हुआ है।
    • दूसरी वैक्सीन: यह सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) और ऑक्सफोर्ड द्वारा मिलकर बनाया जा रहा है, जो कोविड वैक्सीन की तकनीक पर आधारित है। हालांकि, अभी इसका जानवरों पर टेस्ट होना भी बाकी है।

    यही वजह है कि सुरक्षित और असरदार वैक्सीन बाजार में आने में कम से कम 6 से 9 महीने का समय लग सकता है।

    क्या नई महामारी की है आहत?

    ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या इबोला भी कोविड की तरह महामारी की वजह बन सकता है। हालांकि, अभी घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह कोविड-19 या खसरे की तरह हवा से नहीं फैलता। यह तभी फैलता है जब कोई व्यक्ति संक्रमित मरीज के खून या किसी अन्य शारीरिक तरल पदार्थ के सीधे संपर्क में आता है।

    फिलहाल, WHO ने इसे 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी' घोषित कर दिया है। भले ही नई वैक्सीन में समय लगे, लेकिन जागरूकता और सावधानी ही इस समय बचाव का सबसे बड़ा साधन है।

    यह भी पढ़ें- इबोला को लेकर भारत अलर्ट, अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों के लिए स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी

    यह भी पढ़ें- दिल्ली एयरपोर्ट पर इबोला को लेकर एडवाइजरी जारी, कांगो-युगांडा से आने वाले यात्रियों पर नजर; जानें गाइडलाइन