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    सुबह उठने वाले या देर रात तक काम करने वाले, सेहत और मेहनत के मामले में किसका लाइफस्टाइल है सबसे बेस्ट?

    Updated: Fri, 10 Jul 2026 05:30 PM (GMT+05:30)

    कोई देर तक जागकर काम खत्म करने पर विश्वास करता है तो किसी को जल्दी उठकर अपनी टू डू लिस्ट कंप्लीट करनी है। ...और पढ़ें

    देर तक जागने वाले या जल्दी उठने वाले, कौन हैं बेस्ट? (Image Source: AI Generated)

    देर तक जागने वाले या जल्दी उठने वाले, कौन हैं बेस्ट? (Image Source: AI Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हमारे आसपास बहुत से लोग होते हैं जिनका रहन-सहन कभी मेल ही नहीं खाता। कोई देर रात तक जागकर अपना काम खत्म करने पर विश्वास करता है तो किसी को जल्दी उठकर फटाफट अपनी टू डू लिस्ट कंप्लीट करनी है। सवाल यह है कि इन दोनों में से बेहतर कौन सा तरीका या जीवनशैली है? किसका लाइफस्टाइल सेहत और मेहनत दोनों नजरिए से बेस्ट माना जाएगा? चलिए इस अटपटे सवाल का जवाब खोजते हैं। 

    सुबह जल्दी उठने वालों का लाइफस्टाइल 

    सुबह जल्दी उठने वालों की खासियत होती है कि वो जल्दी सोते हैं, जल्दी उठते हैं और उनके दिन का पहला हिस्सा एकदम एनर्जेटिक बीतता है। उनका स्लीप पैटर्न और बॉडी क्लॉक ठीक से काम करती है तो उन्हें टाइम मैनेजमेंट में बहुत कम दिक्कत होती है। इस बारे में साल 2021 की एक स्टडी भी कहती है कि जो लोग सुबह जल्दी उठते हैं, उनमें माइंडफ़ूलनेस ज्यादा देखी जाती हैं। बताते चलें कि इनके पास सोशल सपोर्ट भी होता है।   

    देर रात तक जागने वालों का लाइफस्टाइल 

    नाइट आउल कहलाने वाले लेट लतीफ लोग देर से सोते हैं, देर से उठते हैं और दिन के दूसरे हिस्से में ज्यादा एनर्जेटिक फील करते हैं। अब क्योंकि सोसाइटी जल्दी उठने वाले स्लीप पैटर्न को फॉलो करती है, इसी वजह से एक तो इनका स्लीप साइकल हर समय बिगड़ा हुआ रहता है और दूसरा इस लाइफस्टाइल के लोगों को सोशल सपोर्ट भी नहीं मिल पाता। देखा जाए तो इनकी बड़ी चुनौती पर्याप्त नींद लेना है। वरना इस रूटीन को फॉलो करने वाले लोगों में मोटापे, टाइप 2 डायबिटीज और डिप्रेशन का खतरा भी ज्यादा होता है। 

    दोनों में से कौन बेहतर? 

    दोनों ही तरह के लोगों का अपना-अपना लाइफस्टाइल है और इसमें जेनेटिक्स का बड़ा रोल होता है, जिसके बारे में लोग बहुत कम जानते हैं। नेचर सर्केडियन रिदम यानी शरीर की 24 घंटे वाली बायोलॉजिकल घड़ी को फॉलो करता है, जबकि शरीर की अपनी एक पर्सनल घड़ी भी होती है जिसे स्लीप क्रोनोटाइप कहा जाता है। इस तरह दोनों में से किसी को एक बेहतर नहीं कहा जा सकता। बस ध्यान देने वाली बात यह है कि नींद चाहे सुबह ली जाए या रात में, पूरी होना जरूरी है। डॉक्टर्स हमेशा हेल्दी रहने के लिए ही हर दिन 7-8 घंटे की नींद लेने पर जोर देते हैं।  

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    Source: Healthline