कैंसर मरीजों के लिए बड़ी खुशखबरी! पुणे के वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला बिना साइड इफेक्ट का इलाज
पुणे के वैज्ञानिकों ने कैंसर के इलाज में एक बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने एक लक्षित दवा वितरण प्रणाली विकसित की है जो सीधे कैंसर कोशिकाओं पर हमला क ...और पढ़ें
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पुणे के वैज्ञानिकों ने खोजा कैंसर का बिना साइड इफेक्ट वाला इलाज (Picture Credit- AI Generated)

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प्रेट्र, नई दिल्ली। कैंसर के इलाज में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करने का दावा किया गया है। पुणे के विज्ञानियों ने ऐसी लक्षित दवा वितरण प्रणाली विकसित की है, जो सीधे कैंसर कोशिकाओं और ट्यूमर पर हमला करती है।
इससे शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल एडवांस्ड हेल्थकेयर मैटीरियल्स में प्रकाशित हुआ है। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से-
पुणे में हुई स्टडी
पुणे स्थित अगारकर रिसर्च इंस्टीट्यूट (एआरआई) के विज्ञानियों ने स्तन कैंसर के लिए एक बायोडिग्रेडेबल नैनोकैरियर प्लेटफार्म विकसित किया है, जिसे लक्षित जीन थेरेपी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह प्रणाली विशेष प्रकार के बायोडिग्रेडेबल मेसोपोरस सिलिका नैनोकणों पर आधारित है।
इन नैनोकणों में दवा या चिकित्सीय पदार्थ को अधिक मात्रा में वहन करने की क्षमता होती है। इनके माध्यम से छोटे हस्तक्षेपकारी आरएनए (एसआईआरएनए) अणुओं को कैंसर कोशिकाओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाता है। ये अणु उन प्रोटीनों के निर्माण को रोकते हैं, जो बीमारी और ट्यूमर के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।
ट्यूमर पर असरदार है दवा
विज्ञानियों ने बताया कि एसआईआरएनए को दो ऐसे महत्वपूर्ण जीनों के विरुद्ध पहुंचाया गया, जो ट्यूमर को जीवित रखने और उपचार के प्रति उसकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करते हैं। नैनोकैरियर ट्यूमर के सूक्ष्म वातावरण में पहुंचकर नियंत्रित तरीके से चिकित्सीय पदार्थ छोड़ता है, जिससे दवा का प्रभाव अधिक सटीक और प्रभावी बनता है।
ब्रेस्ट कैंसर मॉडल पर किए गए प्रयोगों में इस तकनीक ने उल्लेखनीय परिणाम दिए। शोध में कैंसर कोशिकाओं की मृत्यु दर बढ़ी और ट्यूमर की वृद्धि में स्पष्ट कमी दर्ज की गई। प्रतिरक्षा दोष से ग्रसित चूहों पर परीक्षण के दौरान भी नैनोकैरियर मुख्य रूप से ट्यूमर वाले हिस्सों में ही एकत्रित हुआ और शरीर के अन्य अंगों पर विषाक्त प्रभाव बेहद कम पाया गया।
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शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन उन बढ़ते प्रमाणों को और मजबूत करता है, जिनके अनुसार एप्टामर-निर्देशित नैनोकैरियर तकनीक ट्यूमर की सटीक पहचान और उपचार की प्रभावशीलता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।