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    दिल का बोझ या दिमाग का केमिकल लोचा? विज्ञान की नजर से समझें रोने के बाद क्यों हल्का हो जाता है मन

    Updated: Tue, 27 Jan 2026 10:39 AM (IST)

    क्या कभी कोई फिल्म देखते समय आपकी आंखों में आंसू आए हैं या किसी अपने को सफलता मिलती देख आपकी आंखें भर आई हैं? अक्सर हम रोने को सिर्फ दुख या दर्द से जो ...और पढ़ें

    रोने के बाद मन हल्का क्यों लगता है? जानिए आंसुओं के पीछे का अनोखा विज्ञान (Image Source: AI-Generated)

    रोने के बाद मन हल्का क्यों लगता है? जानिए आंसुओं के पीछे का अनोखा विज्ञान (Image Source: AI-Generated)

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    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर हम रोने को सिर्फ दुख या दर्द की निशानी मानते हैं, लेकिन विज्ञान की नजर में आंसुओं की कहानी इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है। जब हमारे पास कहने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं, तब ये आंसू ही हमारी भावनाओं की जुबान बनते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आंसू सिर्फ जज्बातों का इजहार नहीं हैं, बल्कि ये हमारी आंखों के 'बॉडीगार्ड' भी हैं? आइए, इस आर्टिकल में समझते हैं इसका दिलचस्प विज्ञान (Science of Crying)।

    Science of crying

    (Image Source: Freepik)

    आंसू आखिर हैं क्या?

    आंसू हमारी आंखों के सेहत के लिए जरूरी हैं। ये आंखों में नमी बनाए रखते हैं और उन्हें बैक्टीरिया, धूल और गंदगी से बचाते हैं। एक औसत इंसान की आंखें हर साल लगभग 15 से 30 गैलन आंसू बनाती हैं। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारे शरीर में आंसुओं का निर्माण कम होने लगता है। बता दें, अगर आंखों में आंसू न बनें, तो यह आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    कितने टाइप के होते हैं आंसू?

    विज्ञान के अनुसार, आंसू सिर्फ एक तरह के नहीं होते। इनके तीन मुख्य प्रकार हैं:

    • बेसल टियर्स: ये आंसू हमारी आंखों में हर वक्त रहते हैं। ये आंखों को पोषण देते हैं, नमी बनाए रखते हैं और कॉर्निया की सुरक्षा करते हैं।
    • रिफ्लेक्स टियर्स: जब आंखों में धूल या कोई तिनका चला जाता है, तो ये आंसू उसे बाहर निकालने के लिए आते हैं। ये आंखों की सफाई का काम करते हैं।
    • इमोशनल टियर्स: ये वो आंसू हैं जो खुशी, गम या किसी गहरे अहसास की वजह से निकलते हैं। इन्हें हमारा "लिम्बिक सिस्टम" हमारे "लैक्रिमल सिस्टम" को संकेत भेजकर तैयार करता है।

    crying feels good

    (Image Source: Freepik)

    कैसे बनता है आंसू?

    आपको जानकर हैरानी होगी कि हर आंसू तीन अलग-अलग परतों से मिलकर बना होता है:

    • भीतरी म्यूकस परत: यह आंसू को आंख की सतह से चिपकाए रखने में मदद करती है।
    • बीच की पानी वाली परत: यह आंखों को हाइड्रेटेड रखती है और बैक्टीरिया से बचाती है।
    • बाहरी ऑयली परत: यह आंसू की सतह को चिकना बनाती है और आंसू को हवा में भाप बनकर उड़ने से रोकती है।

    आंसू हमारी आंखों के ऊपर स्थित ग्रंथियों में बनते हैं और पलकों के छोटे छेदों के जरिए नाक की नली में चले जाते हैं, जहां वे या तो सोख लिए जाते हैं या भाप बन जाते हैं।

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    क्यों आता है रोना?

    जब हम बच्चे होते हैं, तो हमारी आंसू बनाने वाली ग्रंथियां पूरी तरह विकसित नहीं होतीं, इसलिए बच्चे अपनी परेशानी बताने के लिए रोने की आवाज निकालते हैं। हालांकि, जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, आवाज निकालने की जगह आंसू ले लेते हैं। वयस्कों पर जिम्मेदारियों का बोझ होता है, जिससे तनाव पैदा होता है। चाहे वह शारीरिक दर्द हो, रिश्तों की उलझन हो या समाज का दबाव- ये सब रोने की वजह बन सकते हैं।

    आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारा शरीर खुशी और गम के आंसुओं में फर्क नहीं कर पाता। जब भावनाएं बहुत तीव्र होती हैं- चाहे वह डर हो या बहुत ज्यादा खुशी, दिमाग बस इतना जानता है कि इस दबाव को बाहर निकालने के लिए आंसुओं की जरूरत है।

    crying benefits

    (Image Source: Freepik)

    अलग-अलग होते हैं खुशी और गम के आंसू

    जी हां। 'इमोशनल टियर्स' की रासायनिक बनावट बाकी आंसुओं से अलग होती है। वैसे तो सभी आंसुओं में इलेक्ट्रोलाइट्स और लिपिड्स होते हैं, लेकिन भावनाओं वाले आंसुओं में खास तरह के प्रोटीन और हार्मोन्स पाए जाते हैं।

    शोध बताते हैं कि जब हम भावनाओं में बहकर रोते हैं, तो उन आंसुओं के जरिए शरीर से कई तत्व बाहर निकलते हैं, जैसे कि प्रोलैक्टिन और एड्रेनोकोर्टिकोट्रोपिक हार्मोन। इन तत्वों के बाहर निकलने से शरीर का स्ट्रेस कम होता है और हम संतुलित महसूस करते हैं।

    रोने के फायदे

    रोने को कमजोरी समझना गलत है, क्योंकि इसके कई फायदे हैं (Why Crying Feels Good):

    • तनाव से छुटकारा: रोने से शरीर में 'कोर्टिसोल' का स्तर कम होता है, जिससे तनाव घटता है।
    • सामाजिक जुड़ाव: आंसू सामने वाले को यह संकेत देते हैं कि हमें मदद या सहारे की जरूरत है। इससे आपसी रिश्तों में विश्वास और सहानुभूति बढ़ती है।
    • गुस्सा कम करना: साल 2014 की एक स्टडी बताती है कि आंसू आक्रामकता को कम कर सकते हैं और लोगों के बीच एकता बढ़ाते हैं।

    इसलिए, अगली बार जब आपको रोना आए, तो खुद को रोकिए मत। यह आपके शरीर और मन का खुद को हेल्दी करने का एक तरीका है।

    Sources:

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