स्मार्टफोन बना रहे है डिजिटल डिमेंशिया का शिकार, रील्स और डूमस्क्रॉलिंग की लत घटा रही अटेंशन स्पैन
स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग डिजिटल डिमेंशिया का कारण बन रहा है, जिससे याददाश्त और एकाग्रता प्रभावित होती है। ...और पढ़ें
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स्मार्टफोन की बढ़ती लत से कमजोर हो रहा दिमाग (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप जैसे डिवाइसेज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। हमारे काम और बच्चों की पढ़ाई का ये अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन स्क्रीन के सामने घंटों बिताना हमारे दिमाग पर असर डाल सकता है।
डॉ. बिपलब दास (डायरेक्टर- न्यूरोलॉजी एंड इंटरवेंशनल न्यूरोरेडियोलॉजी, बत्रा हॉस्पिटल) बताते हैं कि इन डिवाइसेज पर ज्यादा निर्भर रहने की वजह से याददाश्त, ध्यान लगाने की क्षमता और सोचने-समझने की शक्ति से जुड़ी समस्याएं होती हैं।
इसे ही डिजिटल डिमेंशिया कहा जाता है। हालांकि, ये कोई बीमारी नहीं है, बल्कि ज्यादा स्क्रीन टाइम का दिमाग पर होने वाले असर के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। आइए जानें ये क्या समस्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
स्मार्टफोन पर बढ़ती निर्भरता से घटता अटेंशन स्पैन
आजकल लोग छोटी से छोटी बात के लिए भी स्मार्टफोन पर निर्भर रहते हैं। फोन नंबर, अपॉइंटमेंट्स या रोजमर्रा के रास्ते याद रखने के लिए भी लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। इसके कारण याददाश्त कमजोर होने लगती है।
इसके अलावा, दिनभर 15-20 सेकंड के वीडियो देखना, डूमस्क्रॉलिंग और बार-बार फोन का नोटिफिकेशन चेक करना हमारे अटेंशन स्पैन को कम कर देता है। इसके कारण पढ़ाई पर फोकस करना या किसी काम पर ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है। यह समस्या सिर्फ एक वर्ग की नहीं है। आज बच्चों से लेकर वयस्कों तक, हर किसी का अटेंशन स्पैन घटता जा रहा है।
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नींद पर असर
आजकल लोग रिलैक्स करने के लिए देर रात तक जागकर सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हैं। रात में फोन का इस्तेमाल हमारे नेचुरल स्लीप साइकिल को बिगाड़ देता है। डिवाइस से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे दिमाग को रिलैक्स नहीं करने देती, जिससे दिमाग को समझ नहीं आता कि सोने का वक्त हो गया है। नींद की कमी के कारण फोकस कम होता है, नई चीजें सीखने की क्षमता घटती है और याददाश्त पर भी गहरा असर पड़ता है।
दिमाग पर स्मार्टफोन का असर कम करने के लिए क्या करें?
सबसे पहले अपने स्क्रीन टाइम को लिमिट करें। जब काम हो, सिर्फ तभी फोन का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, रोजाना एक्सराइज, वॉकिंग, बाहर समय बिताना और लोगों से मिलने-जुलने की आदत अपनाएं। इससे आपका दिमाग एक्टिव रहेगा और आपको बेहतर महसूस होगा।