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    खर्राटे लेने वालों सावधान! यह सिर्फ नींद की बीमारी नहीं, हार्ट अटैक का है सीधा सिग्नल; डॉक्टर ने बताए बचाव के तरीके

    Updated: Tue, 10 Feb 2026 07:54 PM (IST)

    नींद के दौरान खर्राटे के चलते आक्सीजन की कमी और बार-बार सांस रुकने से फेफड़ों पर दबाव पड़ता है, जो लंबे समय तक रहने से गंभीर हृदय रोगों का कारण बन सकत ...और पढ़ें

    खर्राटे: दिल के दौरे और फेफड़ों की बीमारियों का सीधा संकेत (Picture Credit- AI Generated)

    खर्राटे: दिल के दौरे और फेफड़ों की बीमारियों का सीधा संकेत (Picture Credit- AI Generated)

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    विकास मिश्र, लखनऊ। खर्राटे के चलते कुछ लोगों की रात में बार-बार नींद टूटती है। दरअसल, सोते समय नाक या मुंह के जरिये हवा का फ्लो बाधित होने से यह समस्या होती है। खर्राटे की समस्या कभी-कभार हो या सोते समय आप हल्का खर्राटा लेते हैं, तो यह चिंताजनक है, लेकिन यह समस्या लगतार बनी रहती है, तो चिंताजनक है। 

    इससे नींद की गुणवत्ता खराब होती है, साथ ही अनेक बीमारियों का जोखिम भी बढ़ता है। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के रेस्पिरेटरी मेडिसिन, कार्डियोलाजी एवं मानसिक रोग विभाग के एक हालिया शोध की मानें तो खर्राटे को नजरअंदाज करने से स्ट्रोक, दिल का दौरा और हार्ट फेल्योर का खतरा बढ़ता है, साथ ही फेफड़े की गंभीर बीमारी- क्रोनिक आब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी  डिजीज (सीओपीडी) और फाइब्रोसिस का जोखिम भी तीन गुणा तक बढ़ जाता है। 

    दरअसल, नींद में सांस रुकने से आक्सीजन का स्तर तेजी से गिरता है, जिससे रक्तचाप और दिल पर दबाव बढ़ता है। इससे फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। केजीएमयू का यह शोध 26 जनवरी को वर्ल्ड जर्नल ऑफ कार्डियोलाजी में प्रकाशित किया गया है।  

    कितनी गंभीर है यह समस्या

    भारत में लगभग 11 करोड़ से अधिक लोग निद्रा विकार- आब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया (ओएसए) से पीड़ित हैं। कामकाजी वयस्कों में यह गंभीर समस्या है। कुल मरीजों में 60 प्रतिशत पुरुष एवं 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। खर्राटे के साथ एप्निया है तो इससे फेफड़े और दिल कमजोर होते हैं। इससे पल्मोनरी हाइपरटेंशन (फेफड़ों की धमनियों में उच्च रक्तचाप) का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है।  

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    कैसे होता है पल्मोनरी हाइपरटेंशन

    शोध में शामिल लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रो. अजय वर्मा के अनुसार, स्लीप एप्निया के दौरान व्यक्ति की सांस कुछ सेकंड से लेकर एक मिनट तक के लिए रुक सकती है। अध्ययन में 150 से अधिक ऐसे आब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया के मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें 71.68 प्रतिशत में पल्मोनरी हाइपरटेंशन की पुष्टि हुई। यह दुर्लभ और गंभीर रोग है, जिसमें फेफड़ों की धमनियों में दबाव बहुत अधिक बढ़ जाता है। इससे हृदय के दाहिने हिस्से को फेफड़ों तक रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। 

    ऐसी स्थिति में हार्ट फेल्योर का खतरा तीन गुणा तक बढ़ता है। समय पर पहचान और उपचार न होने पर ओएसए हृदय और फेफड़ों पर गंभीर दुष्प्रभाव डालता है। स्लीप एप्निया से पीड़ित व्यक्ति को डाक्टर की सलाह से पल्मोनरी हाइपरटेंशन की जांच जरूर कराना चाहिए। चिकित्सा संस्थानों में इसकी पुष्टि के लिए इकोकार्डियोग्राफी की जाती है। ओएसए में बार-बार होने वाली आक्सीजन की कमी फेफड़ों की रक्त नलिकाओं को संकुचित करती है, जिससे पल्मोनरी हाइपरटेंशन विकसित हो सकता है। यह अध्ययन भविष्य में स्लीप एप्निया के मरीज को गंभीर होने से बचाव में अहम रोल निभाएगा। इससे इलाज की गाइडलाइन भी बनेगी।  

    स्लीप एप्निया को लेकर गंभीरता जरूरी

    केजीएमयू में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रो सूर्यकांत बताते हैं कि स्लीप एप्निया को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी है। यही कारण है कि ज्यादातर मरीज लापरवाही बरतते हैं। अगर रोगी सही समय पर इलाज करा लें, तो समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है। सबसे पहले जरूरी है कि लक्षण की पहचान करें। स्लीप एप्निया मुख्य रूप से नींद के दौरान गले की मांसपेशियों के अत्यधिक शिथिल होने के कारण होता है, जिससे वायुमार्ग संकुचित या बंद हो जाता है और सांस बार-बार रुकती है।  

    स्लीप एप्निया के मुख्य कारण

    • मोटापा (गर्दन की चर्बी) 
    • शारीरिक बनावट  
    • खराब दिनचर्या 
    • उम्र और आनुवंशिक कारण  

    स्लीप एप्निया व पल्मोनरी हाइपरटेंशन से बचाव

    लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रो. अजय वर्मा ने बताया स्लीप एप्निया से बचने के लिए स्वस्थ वजन, नियमित व्यायाम करने के साथ धूम्रपान और शराब से दूरी महत्वपूर्ण है। पीठ की बजाय करवट लेकर सोना, गले की मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाओं से परहेज करना और सांस की नली को साफ रखने के लिए सीएपीएपी मशीन का उपयोग कारगर है। सीएपीएपी मशीन का प्रयोग स्लीप एप्निया के इलाज और इसके दुष्प्रभाव से होने वाले पल्मोनरी हाइपरटेंशन को कम करने के लिए सबसे प्रभावी माना जाता है। ऑक्सीजन थेरेपी या दंत उपकरणों की भी मदद ली जा सकती है।

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