सिरदर्द और बेचैनी कहीं कैफीन ओवरडोज तो नहीं? चाय-कॉफी लवर्स इन लक्षणों को भूलकर भी न करें इग्नोर
अगर आप भी कॉफी लवर हैं और दिन भर में कई कप चाय या कॉफी पीते हैं, तो इसका आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। ...और पढ़ें

जरूरत से ज्यादा कॉफी पीने से सेहत पर कैसे पड़ सकता है असर? (Image Credit - Canva)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हम में से ज्यादातर लोग अपनी सुबह की शुरूआत चाय या कॉफी की चुस्की से करते हैं। इसमें मौजूद कैफीन नींद भगाने और प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने का बेहतरीन तरीका है। कई बार हम बिना सोचे-समझे दिन भर में कई कप चाय-कॉफी पी लेते हैं।
जरूरत से ज्यादा कैफीन लेना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि एक दिन में कैफीन की कितनी मात्रा सुरक्षित है और ज्यादा होने पर शरीर कौन-से संकेत देता है। चलिए जानते हैं।
एक दिन में कैफीन की कितनी मात्रा सुरक्षित है?
FDA के अनुसार, एडल्ट्स को दिन भर में 400 मिलीग्राम यानी 2 से 3 कप से ज्यादा कैफीन नहीं लेना चाहिए। इसे ज्यादा मात्रा में लेने पर ओवरडोज का खतरा बढ़ जाता है। टीनएजर्स को 100 मिलीग्राम से ज्यादा कैफीन नहीं लेना चाहिए। ब्रेस्टफीडिंग वाली महिलाएं जरूरत से ज्यादा कैफीन लेने से बचें। वहीं, प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए रोजाना 200 मिलीग्राम से कम चाय या कॉफी पीना सेफ माना जाता है, क्योंकि अभी यह साफ नहीं है कि इससे बच्चे पर क्या असर पड़ेगा।
हर किसी के शरीर पर कैफीन का असर अलग-अलग तरीके से होता है। कुछ लोगों को थोड़ी सी चाय-कॉफी से भी घबराहट महसूस होने लगती है, खासकर अगर वे कोई दवा ले रहे हों। इसलिए अपनी सेहत के लिए कैफीन की सही मात्रा जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित है।
कैफीन ओवरडोज के लक्षण

(Image Source: AI-Generated)
- हार्ट रेट बढ़ना
- डायरिया
- सिरदर्द
- एंग्जायटी
- अधिक प्यास लगना (पॉलीडिप्सिया)
- घबराहट या बेचैनी महसूस होना
- ज्यादा यूरिन आना
- नींद न आना
ज्यादा मात्रा में कैफीन लेने से शरीर में सिर्फ यही लक्षण नजर नहीं आते हैं, बल्कि सांस लेने में परेशानी या सांस फूलना (डिस्पेनिया), अचानक ब्लड प्रेशर का बढ़ना (हाइपरटेंशन), मांसपेशियों में ऐंठन, मतली और उल्टी, भ्रम या दौरे जैसी परेशानी हो सकती है।
खबरें और भी
कैफीन ओवरडोज के नुकसान

(Image Source: AI-Generated)
- किडनी डैमेज होना
- ब्रेन डैमेज होना
- हार्ट डैमेज होना
- खून में पोटैशियम की कमी (हाइपोकैलिमिया)
- हाई ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया)
- खून में काफी ज्यादा एसिड होना (मेटाबोलिक एसिडोसिस)
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Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।