यूरिन में भी नजर आते हैं प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण, मामूली समझकर नजरअंदाज करना पड़ जाएगा भारी
प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण काफी धीरे-धीरे विकसित होते हैं, जिसके कारण बीमारी सालों तक छिपी रहती है और शुरुआत में पता लगाना मुश्किल होता है।

प्रोस्टेट कैंसर का शुरुआत में पता क्यों नहीं चलता? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पुरुषों में होने वाले सबसे कॉमन कैंसर में प्रोस्टेट कैंसर भी शामिल है, लेकिन फिर भी ज्यादातर मामलों में इसका पता काफी देर से चलता है। बीमारी का देर से पता चलने की वजह से इलाज मुश्किल हो जाता है।
हालांकि, प्रोस्टेट कैंसर का इलाज मुमकिन है और इसके सफल होने की संभावना भी काफी ज्यादा है, लेकिन शुरुआती दौर में इसका पता मुश्किल से लगता है। साथ ही, इसके कुछ संकेत ऐसे होते हैं, जिन्हें पुरुष अक्सर बढ़ती उम्र की समस्या समझकर इग्नोर कर देते हैं। आइए इस बारे में डॉ. पर्ल आनंद (कंसल्टेंट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, एंड्रोमेडा कैंसर हॉस्पिटल, सोनीपत) से जानें।
शुरुआती स्टेज में पहचान मुश्किल क्यों है?
प्रोस्टेट कैंसर का जल्दी पता न चल पाने के पीछे कई कारण हैं-
- धीमी गति से विकास- प्रोस्टेट कैंसर के सेल्स आमतौर पर बहुत धीमी गति से बढ़ती हैं। शुरुआती ट्यूमर प्रोस्टेट ग्लैंड के अंदर ही सीमित रहते हैं और आस-पास के अंगों पर दबाव नहीं डालते। क्योंकि प्रोस्टेट पेल्विस के काफी अंदर स्थित होता है, इसलिए छोटे ट्यूमर न तो दर्द पैदा करते हैं और न ही बाहर से महसूस किए जा सकते हैं।
- सामान्य बीमारियों से समानता- प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती संकेत अक्सर बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया जैसे सामान्य बीमारियों से मिलते-जुलते होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट ग्लैंड का बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है। पुरुष अक्सर पेशाब संबंधी समस्याओं को बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह कैंसर का संकेत भी हो सकता है।
- स्क्रीनिंग की सीमाएं- प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन (PSA) टेस्ट और डिजिटल रेक्टल एग्जामिनेशन इसके डायग्नोसिस के लिए जरूरी तो हैं, लेकिन ये हमेशा सटीक नहीं होते। कई बार PSA का स्तर किसी इन्फेक्शन या दूसरी वजहों से भी बढ़ सकता है, जिसे फॉल्स पॉजिटिव कहा जाता है।
किन लक्षणों के नजर आने पर सावधान हो जाना चाहिए?
हालांकि, शुरुआती स्टेज में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन जैसे-जैसे कैंसर बढ़ता है शरीर कुछ संकेत देने लगता है।
- पेशाब शुरू करने में परेशानी होना या बहुत जोर लगाना पड़ना।
- पेशाब की धार का कमजोर या रुक-रुक कर होना।
- बार-बार यूरिन आने की इच्छा, खासकर रात के समय।
- पेशाब करने के बाद भी ऐसा महसूस होना कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ है।
- पेशाब में खून आना।
- सीमन में खून दिखना।
- अचानक इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या शुरू होना।
- पेशाब या इजेक्यूलेशन के दौरान दर्द या जलन महसूस होना।
अगर कैंसर प्रोस्टेट के बाहर हड्डियों या अन्य अंगों में फैलने लगता है, तो समस्या बढ़ सकती है-
- कूल्हों, पीठ या छाती में लगातार दर्द रहना।
- पैरों में कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना।
- बिना किसी कारण के बहुत थकान या वजन कम होना।
बचाव के लिए क्या करें?
प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करने के लिए 50 वर्ष की उम्र के बाद या अगर पारिवारिक इतिहास है तो 45 वर्ष के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर की सलाह पर PSA टेस्ट करवाना जरूरी है।
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