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सावधान! जिसे आप 'मामूली मोच' समझ रहे हैं, कहीं वह हड्डियों की कोई गंभीर बीमारी तो नहीं?

Updated: Sun, 26 Jul 2026 04:54 PM (IST)

अक्सर लोग मोच को सामान्य समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन लगातार बना रहने वाला दर्द हड्डियों की गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।

हर खिंचाव और 'मोच' को इग्नोर करना हो सकता है खतरनाक (Image Source: AI-Generated)

हर खिंचाव और 'मोच' को इग्नोर करना हो सकता है खतरनाक (Image Source: AI-Generated) 

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सुबह टहलते वक्त पैर मुड़ जाना या भारी सामान उठाते वक्त कंधे में दर्द होना बेहद आम बात है। हम में से ज्यादातर लोग इसे सिर्फ एक 'मोच' समझकर भूल जाते हैं। यह सच है कि रोजमर्रा के ये दर्द अक्सर छोटी-मोटी चोटों का ही परिणाम होते हैं, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता।

मेदांता अस्पताल, नोएडा में मेडिकल ऑन्कोलॉजी और कैंसर केयर के डायरेक्टर व हेड, डॉ. सज्जन राजपुरोहित चेताते हैं कि लगातार बने रहने वाले दर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई बार जिसे हम साधारण मोच मान बैठते हैं, वह दरअसल हड्डियों की किसी गंभीर बीमारी का इशारा हो सकता है, जिसके लिए तुरंत डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए।

Bone health warning signs Hindi

(Image Source: AI-Generated) 

मोच और हड्डियों की तकलीफ को कैसे पहचानें?

जोड़ों पर हड्डियों को आपस में जोड़ने वाले लिगामेंट्स में जब चोट लगती है, तो उसे मोच कहते हैं। अगर आप आराम करते हैं, चोट पर बर्फ लगाते हैं, उसे बांधकर रखते हैं और प्रभावित हिस्से को थोड़ा ऊंचा रखते हैं, तो मोच का दर्द कुछ दिनों या हफ्तों में ठीक हो जाता है।

लेकिन, जब इन सब के बाद भी आराम न मिले या चोट के हिसाब से दर्द बहुत ज्यादा हो, तो मामला कुछ और हो सकता है। हड्डियों का दर्द सामान्य मोच से इस तरह अलग होता है:

  • यह दर्द एक धीमी और गहरी टीस की तरह महसूस होता है।
  • यह लगातार बना रहता है और समय के साथ बढ़ता जाता है।
  • मोच की तरह यह आराम करने से ठीक नहीं होता, बल्कि आपकी रातों की नींद तक उड़ा सकता है।

मोच के धोखे में छिपी हो सकती हैं ये गंभीर समस्याएं

कई बीमारियां ऐसी हैं जिनके शुरुआती लक्षण बिल्कुल मोच जैसे लगते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में:

  • स्ट्रेस फ्रैक्चर: जो लोग अचानक से अपना वर्कआउट बढ़ा देते हैं, या फिर एथलीट्स, रनर्स और सेना के जवानों में यह समस्या बहुत देखी जाती है। इसमें हड्डियों के अंदर बहुत बारीक दरारें आ जाती हैं। कई बार ये दरारें सामान्य एक्स-रे में भी नहीं दिखतीं और इन्हें पहचानने के लिए बोन स्कैन या एमआरआई का सहारा लेना पड़ता है।
  • ऑस्टियोपोरोसिस वाले फ्रैक्चर: बढ़ती उम्र के साथ हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। ऐसे में बुजुर्गों को हल्की-सी चोट लगने पर भी फ्रैक्चर हो सकता है। लोग अक्सर इस दर्द को तब तक नजरअंदाज करते हैं, जब तक कि चलना-फिरना मुहाल न हो जाए।
  • हड्डियों का इन्फेक्शन: हालांकि इसके मामले कम आते हैं, लेकिन इसमें तेज दर्द के साथ सूजन, रेडनेस और बुखार जैसी शिकायतें होती हैं। अगर इसका तुरंत इलाज न हो, तो हड्डियों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।
  • हड्डियों का ट्यूमर या कैंसर: यह एक दुर्लभ स्थिति है, लेकिन लगातार होने वाला दर्द बोन कैंसर या शरीर के अन्य हिस्सों से हड्डियों तक फैले कैंसर का संकेत भी हो सकता है। इसमें दर्द रात के वक्त काफी बढ़ जाता है और आस-पास सूजन या गांठ महसूस हो सकती है। ऐसे में जल्द से जल्द बीमारी को पकड़ना ही सबसे बेहतर बचाव है।

ये संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं

अगर आपके शरीर में इनमें से कोई भी लक्षण नजर आ रहा है, तो बिना देर किए डॉक्टर से मिलें:

  • दर्द का दो से तीन हफ्तों से ज्यादा खिंच जाना।
  • दर्द का कम होने के बजाय और बिगड़ना।
  • बिना किसी चोट के अचानक दर्द शुरू हो जाना।
  • दर्द वाली जगह पर शरीर का वजन न संभाल पाना।
  • दर्द के साथ बुखार, सूजन, थकान या बिना वजह वजन का कम होना।
  • रात में दर्द के कारण आंख खुल जाना या एक ही जगह पर बार-बार तकलीफ होना।

डॉक्टर कैसे लगाते हैं बीमारी की असली जड़ का पता?

लगातार हो रहे दर्द की जड़ तक पहुंचने के लिए डॉक्टर सबसे पहले आपकी जांच करते हैं और मेडिकल हिस्ट्री समझते हैं। जरूरत पड़ने पर एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई या बोन स्कैन की सलाह दी जाती है। कुछ विशेष परिस्थितियों में ब्लड टेस्ट या बायोप्सी भी की जा सकती है।

घबराएं नहीं, संभव है इलाज

सबसे अच्छी बात यह है कि अगर समय रहते बीमारी का पता चल जाए, तो हड्डियों की कई गंभीर समस्याओं का बेहतरीन इलाज मौजूद है। चाहे मामला स्ट्रेस फ्रैक्चर का हो, इन्फेक्शन का या फिर ऑस्टियोपोरोसिस का, सही समय पर उठाया गया कदम आपको किसी भी बड़ी जटिलता से बचा सकता है।

चोट के बाद उठने वाला हर दर्द केवल "मोच" नहीं होता। अगर आपका दर्द लगातार बना हुआ है, आपको कुछ असामान्य लग रहा है या तकलीफ बढ़ रही है, तो सिर्फ दर्द निवारक दवाइयों के सहारे दर्द को न दबाएं। अपने शरीर के संकेतों को समझें और अपनी सेहत को सुरक्षित रखने के लिए सही समय पर विशेषज्ञ की मदद लें।

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