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    घंटों बैठकर काम करने वाले जरूर करें 'सूक्ष्म व्यायाम': घुटनों और कमर के दर्द से बचने का अचूक उपाय है योग

    Updated: Tue, 16 Jun 2026 04:30 PM (IST)

    योग जीवन जीने का विज्ञान है, जिसमें सूक्ष्म व्यायाम को दिनभर में कभी भी किया जा सकता है, खासकर घंटों बैठकर काम करने वालों के लिए। ...और पढ़ें

    दर्द से मुक्ति और स्वस्थ जीवन का रहस्य (Picture Credit- AI Generated)

    दर्द से मुक्ति और स्वस्थ जीवन का रहस्य (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. सूक्ष्म व्यायाम से शरीर में अकड़न और दर्द से पाएं छुटकारा

    2. योग मन को प्रशिक्षित कर मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक विकास करे

    3. स्वच्छ हवा, पानी, खुराक और प्रकृति से जुड़कर स्वस्थ जीवन जिएं

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। योग जीवन जीने का विज्ञान है। इसे व्यवहार में लाना जरूरी है, फिर देखिए उसका क्या लाभ होता है। सूक्ष्म व्यायाम तो हर किसी को करना चाहिए। इसे दिनभर में कभी भी और कहीं भी किया जा सकता है। लोग अपने कामों में इतना व्यस्त हो चुके हैं कि उन्हें अपना ही खयाल ही नहीं रहता। इसका दुष्प्रभाव शरीर पर पड़ता है। 

    डॉ. हंसा जी योगेन्द्र (योग गुरु एवं निदेशक द योग इंस्टीट्यूट, मुंबई) के मुताबिक एक ही जगह घंटों बैठे रहने से शरीर में अकड़न, लगातार खड़े रहने से घुटनों और कमर में दर्द जैसी समस्याएं हो रही हैं। अगर सुबह उठकर व्यायाम नहीं कर पा रहे हैं या समय नहीं है, तो काम करते हुए बैठे-बैठे पैरों को सीधे कर सकते हैं, थोड़ा खड़े होकर शरीर में सक्रियता ला सकते हैं। अंगुलियों, हाथों-पैरों में थोड़ा खिंचाव लाने का प्रयास करें। 

    गर्दन को घुमाकर अगल-बगल देख सकते हैं। यह सब काम करते-करते भी हो सकता है। इससे शरीर में रोग नहीं होंगे, शरीर का लचीलापन बना रहेगा और जोड़ों की समस्याओं से बचे रहेंगे। सक्रिय रहने से शरीर में ऊर्जा बढ़ती है। योग में सभी को सहज भावासन के लिए प्रेरित किया जाता है। ये छोटी-छोटी चीजें जीवन को बेहतर बना सकती हैं।

    मन को करें प्रशिक्षित

    आजकल लोग मानसिक तौर पर अस्वस्थ हो रहे हैं। इसके लिए योग को जीवन में उतारना होगा, क्योंकि यह मन का प्रशिक्षण भी है। योगी कहते हैं कि इंसान का मन विकसित मस्तिष्क है-मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः। मनुष्य का मन ही सभी दुखों और समस्याओं का कारण है। यही मन आपको खुशियां, रोग मुक्त जीवन दे सकता है और आनंद की स्थिति में ला सकता है। इसे स्वच्छ करना है। यह हर समय इधर-उधर देखता और सीखता रहता है। हमारी सभी ज्ञानेंद्रियां हमारी समझ बढ़ाती हैं। 

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    आप ऐसी चीजें देखें, जो हमारा विकास करें। आप ज्ञानेंद्रियों का गलत प्रयोग करेंगे, तो उससे दुख और तनाव मिलेगा, डर और बेचैनी बढ़ेगी। जब आपका मन योग से प्रशिक्षित होगा, तो समझने और सोचने की प्रवृत्ति सकारात्मक होगी। मन तभी सही ढंग चल सकता है, जब वह शांत, संतुलित और समत्व की स्थिति में हो।

    योग से भावनात्मक विकास

    योग की एक परिभाषा है कि समत्वं योग उच्यते। गीता में कहा गया है कि सुख और दुख से ऊपर उठो। बुद्धि, सोचने की क्षमता और भावनाओं के कारण हम दुखी होते हैं। भावनाओं के नियंत्रण के लिए बुद्धि का उपयोग करना चाहिए। मन अशांत होने पर एक लंबी सांस लेने से भी राहत मिल जाती है। 

    आप थोड़ा भुजंगासन, सलभासन, धनुरासन, वक्रासन कर लें तो भी सकारात्मकता महसूस करेंगे। कमजोर होते मन को आसन, व्यायाम, प्राणायाम ही सही स्थिति में रख सकता है। आज इंसान का मन और शरीर दोनों थका हुआ है। जब योग को जीवन में उतारेंगे तो स्वाभाविक रूप से स्वस्थ रहेंगे।

    प्रकृति से जोड़ें संबंध

    इंसान को प्रकृति के साथ संबंध जोड़ लेना चाहिए। सूर्य के उगने से लेकर डूबने तक हमारी सारी गतिविधियां पूरी हो जानी चाहिए। शेष समय में खुद को शांत और स्थिर रखना है। पहला भोजन सूर्योदय के कुछ समय बाद और अंतिम भोजन सूर्यास्त तक हो जाना चाहिए। आजकल सब कुछ फास्ट हो रहा है, यहां तक भोजन भी। लोगों को फुरसत नहीं है। हमें समझना होगा कि हमारे जीवन के लिए हवा, पानी और खुराक स्वच्छ होनी चाहिए। 

    इन तीनों में से एक नहीं होगा, तो जीवन नहीं रहेगा। स्वच्छ हवा लीजिए, अपनी सांस पर ध्यान दें, लंबी सांस का अभ्यास करें। इसी तरह पानी बहुत आवश्यक है, शरीर में 78 प्रतिशत पानी ही है। सुबह उठने पर एक गिलास गुनगुना पानी पीने का नियम बनाएं। खुराक सही रखें। रेडीमेड भोजन नुकसानदेह है, कोई भी प्रोडक्ट घर के भोजन से स्वस्थ नहीं है। दिन का अंतिम भोजन सात बजे तक हो जाना चाहिए। राजगीरा, बाजरा, ज्वार आदि को भोजन में शामिल करना चाहिए। पेय में नींबू, अदरक, छाछ लें। ये सब सेहतमंद रहने के कुछ उपाय हैं। जीवन को योगमय बनाएं। योग को हर व्यक्ति को सीखना और जीवन में उतारना चाहिए।

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